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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरिय तिरुमोळि

तिरुमङ्गै आळ्वार् की रचना · 1,084 पाशुर

उत्तर में बदरिकाश्रम से दक्षिण के मन्दिरों तक यात्रा करते हुए तिरुमङ्गै आळ्वार् द्वारा गाई गई 1,084 पाशुरों की महान रचना। यह नारायण नाम को पा लेने के आळ्वार् के आनन्द से आरम्भ होती है (पेरिय तिरुमोळि 1.1), और किसी भी अन्य आळ्वार् की रचना से अधिक दिव्यदेशों का मङ्गलाशासन करती है। सम्प्रदाय मानता है कि यदि नम्माळ्वार् की चार रचनाएँ चार वेद हैं, तो तिरुमङ्गै आळ्वार् की छह रचनाएँ उनके छह अंग हैं।

दशक

पत्तु 1

पत्तु 2

पत्तु 3

पत्तु 4

पत्तु 5

पत्तु 6

पत्तु 7

पत्तु 8

पत्तु 9

पत्तु 10

पत्तु 11