नित्य अनुष्ठान
जिन बातों से एक श्रीवैष्णव का दिन भरा रहता है: आळ्वारों के पाशुरों का पाठ, घर में पेरुमाळ् की आराधना, भोर, दोपहर और सन्ध्या की वैदिक प्रार्थना, और अर्पण के रूप में भोजन।
नित्यानुसन्धान
घर में प्रतिदिन पढ़े जाने वाले आळ्वारों के पाशुर: यह क्या है, पाठ कैसे आरम्भ होता है और कैसे समाप्त होता है, और वे रचनाएँ जिन्हें अधिकांश परिवार निभाते हैं।
पढ़िए →तिरुवाराधन
घर में पेरुमाळ् की आराधना: यह क्या है, कैसे की जाती है, और पाशुर कहाँ आते हैं।
पढ़िए →सन्ध्यावन्दन
दिन की तीन सन्धियों पर की जाने वाली दैनिक वैदिक प्रार्थना: यह क्या है, इसके चरण, और एक वेद से दूसरे वेद में यह कैसे भिन्न होती है।
पढ़िए →भोजन विधि
भोजन से पहले और बाद के मन्त्र: अन्न को जल से पवित्र किया जाता है और पहले कौर भीतर अर्पित किए जाते हैं, ताकि भोजन करना स्वयं आराधना बन जाए।
पढ़िए →ये पृष्ठ बताते हैं कि हर साधना क्या है, उसके चरण क्या हैं और उनका अर्थ क्या है; तिरुवाराधन, सन्ध्यावन्दन और भोजन विधि के पृष्ठों पर उनके मन्त्र भी दिए गए हैं। उन्हें उनके सही उच्चारण के साथ पिता या आचार्य से सीखिए, जैसी सदा से रीति रही है। क्रम और विवरण परिवारों और मठों के बीच अलग-अलग होते हैं; जहाँ ऐसा हो, वहाँ अपने आचार्य और अपने बड़ों का अनुसरण करें।