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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरिय तिरुमोळि 11.5

पत्तु 11 · दशक 11.5 · 10 पाशुर

पेरिय तिरुमोळि 11.5.1 · चार हज़ार में 1992वाँ पाशुर

माऩ् अमरुम् मॆऩ् नोक्कि वैदेवि इऩ् तुणैयाकाऩ् अमरुम् कल् अदर् पोय् काडु उऱैंदाऩ् काण् एडी!-काऩ् अमरुम् कल् अदर् पोय् काडु उऱैंद पॊऩ् अडिक्कळ्वाऩवर्-तम् सॆऩ्ऩि मलर् कंडाय् साऴले

अर्थ

(दो कन्याएँ ताना और उत्तर का खेल खेलती हैं: एक चिढ़ाती है, दूसरी ‘साऴल्!’ कहकर उत्तर देती है।) ‘देखो, सखी! हिरनी-सी कोमल आँखों वाली सीता को अपनी प्यारी संगिनी बनाकर वे पथरीले वन-मार्गों पर चले और वन में रहे!’ ‘पथरीले वन-मार्गों पर चलने और वन में रहने वाले वे स्वर्णिम चरण, जानती हो, देवताओं के सिरों पर सजे फूल हैं। साऴल्!’

शब्दशः

माऩ् अमरुम् मॆऩ् नोक्कि
हिरनी-सी कोमल दृष्टि वाली
वैदेवि इऩ् तुणैया
वैदेही, सीता को प्यारी संगिनी बनाकर
कल् अदर् पोय्
पथरीले मार्गों पर चलकर
एडी
अरी, सखी!
वाऩवर्-तम् सॆऩ्ऩि मलर्
देवताओं के सिरों पर सजे फूल
साऴले
साऴल्! कन्याओं के खेल की टेक
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.2 · चार हज़ार में 1993वाँ पाशुर

तंदै तळै कऴलत् तोऩ्ऱिप् पोय् आय्प्पाडिनंदऩ् कुल मदलैयाय् वळर्ंदाऩ् काण् एडी!-नंदऩ् कुल मदलैयाय् वळर्ंदाऩ् नाऩ्मुगऱ्कुत्तंदै काण् ऎंदै पॆरुमाऩ् काण् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! वे ऐसे जन्मे कि उनके पिता की बेड़ियाँ खुल गईं, आयर्पाडि चले गए और नन्दगोप के कुल के बालक बनकर पले-बढ़े!’ ‘नन्दगोप के कुल के बालक बनकर पले-बढ़े वे, जानती हो, चतुर्मुख ब्रह्मा के पिता हैं; वे मेरे पिता, प्रभु हैं। साऴल्!’

शब्दशः

तंदै तळै कऴलत् तोऩ्ऱिप्
ऐसे जन्मे कि उनके पिता की बेड़ियाँ खुल गईं
आय्प्पाडि
आयर्पाडि, ग्वालों का गाँव
नंदऩ् कुल मदलैयाय्
नन्दगोप के कुल के बालक के रूप में
नाऩ्मुगऱ्कुत् तंदै
चतुर्मुख ब्रह्मा के पिता
ऎंदै पॆरुमाऩ्
मेरे पिता, प्रभु
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.3 · चार हज़ार में 1994वाँ पाशुर

आऴ् कडल् सूऴ् वैयगत्तार् एशप् पोय् आय्प्पाडित्ताऴ् कुऴलार् वैत्त तयिर् उंडाऩ् काण् एडीताऴ् कुऴलार् वैत्त तयिर् उंड पॊऩ् वयिऱु इव्एऴ् उलगुम् उंडुम् इडम् उडैत्ताल् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! ताकि समुद्र से घिरे संसार के लोग उनका उपहास करें, वे आयर्पाडि गए और लम्बे केशों वाली ग्वालिनों का रखा हुआ दही खा गए!’ ‘दही खाने वाला वह सुनहरा पेट तो सातों लोक निगल लेने के बाद भी खाली जगह रखता था। साऴल्!’

शब्दशः

वैयगत्तार् एशप्
ताकि संसार उनका उपहास करे
ताऴ् कुऴलार्
लम्बे, लहराते केशों वाली स्त्रियाँ
वैत्त तयिर् उंडाऩ्
उनका रखा दही खा गए
पॊऩ् वयिऱु
सुनहरा पेट
इडम् उडैत्ताल्
फिर भी खाली जगह रखता था
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.4 · चार हज़ार में 1995वाँ पाशुर

अऱियादार्क्कु आऩ् आयऩ् आगिप् पोय् आय्प्पाडिउऱि आर् नऱु वॆण्णॆय् उंडु उगंदाऩ् काण् एडी!-उऱि आर् नऱु वॆण्णॆय् उंडु उगंद पॊऩ् वयिऱ्ऱुक्कुऎऱि नीर् उलगु अऩैत्तुम् ऎय्दादाल् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! जो उन्हें नहीं जानते, उनके लिए वे बस गायें चराने वाले एक ग्वाले थे; वे आयर्पाडि गए और लटकते छींकों के मटकों का सुगन्धित मक्खन आनन्द से खा गए!’ ‘आनन्द से मक्खन खाने वाले उस सुनहरे पेट के लिए तो उछलते समुद्रों वाला सारा संसार भी पूरा नहीं पड़ता। साऴल्!’

शब्दशः

अऱियादार्क्कु
जो उन्हें नहीं जानते, उनके लिए
आऩ् आयऩ्
गायें चराने वाला ग्वाला
उऱि आर् नऱु वॆण्णॆय्
लटकते छींकों के मटकों का सुगन्धित मक्खन
ऎऱि नीर् उलगु अऩैत्तुम्
उछलते समुद्रों वाला सारा संसार
ऎय्दादाल्
पूरा नहीं पड़ता
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.5 · चार हज़ार में 1996वाँ पाशुर

वण्णक् करुङ् कुऴल् आय्च्चियाल् मॊत्तुंडुकण्णिक् कुऱुङ् कयिऱ्ऱाल् कट्टुंडाऩ् काण् एडी-कण्णिक् कुऱुङ् कयिऱ्ऱाल् कट्टुंडाऩ् आगिलुम्ऎण्णऱ्कु अरियऩ् इमैयोर्क्कुम् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! सुन्दर काले केशों वाली ग्वालिन ने उन्हें पीटा, और एक छोटी गाँठदार रस्सी से बाँध दिया!’ ‘भले ही वे छोटी गाँठदार रस्सी से बाँधे गए, वे अमर देवताओं के भी विचार से परे हैं। साऴल्!’

शब्दशः

वण्णक् करुङ् कुऴल् आय्च्चियाल्
सुन्दर काले केशों वाली ग्वालिन, यशोदा द्वारा
मॊत्तुंडु
पीटे गए
कण्णिक् कुऱुङ् कयिऱ्ऱाल्
एक छोटी गाँठदार रस्सी से
ऎण्णऱ्कु अरियऩ्
सारे विचार से परे
इमैयोर्क्कुम्
अमर देवताओं के लिए भी
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.6 · चार हज़ार में 1997वाँ पाशुर

कऩ्ऱप् पऱै कऱंग कंडवर्-तम् कण् कळिप्पमऩ्ऱिल् मरक्काल् कूत्तु आडिऩाऩ् काण् एडी!-मऩ्ऱिल् मरक्काल् कूत्तु आडिऩाऩ् आगिलुम्ऎऩ्ऱुम् अरियऩ् इमैयोर्क्कुम् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! जब ढोल ज़ोर-ज़ोर से बज रहे थे और देखने वाले सबकी आँखें आनन्द से भर गई थीं, तब उन्होंने गाँव के मैदान में काठ की टाँगों पर नृत्य किया!’ ‘भले ही उन्होंने मैदान में काठ की टाँगों पर नृत्य किया, वे अमर देवताओं के लिए भी सदा दुर्लभ हैं। साऴल्!’

शब्दशः

पऱै कऱंग
जब ढोल बज रहे थे
कंडवर्-तम् कण् कळिप्प
देखने वालों की आँखों को आनन्द देते
मऩ्ऱिल्
गाँव के मैदान में
मरक्काल् कूत्तु
काठ की टाँगों पर नृत्य
ऎऩ्ऱुम् अरियऩ्
सदा दुर्लभ
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.7 · चार हज़ार में 1998वाँ पाशुर

कोदै वेल् ऐवर्क्कु आय् मण् अगलम् कूऱु इडुवाऩ्तूदऩ् आय् मऩ्ऩवऩाल् सॊल्लुंडाऩ् काण् एडी!-तूदऩ् आय् मऩ्ऩवऩाल् सॊल्लुंडाऩ् आगिलुम्ओद नीर् वैयगम् मुऩ् उंडु उमिऴ्ंदाऩ् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! मालाओं से सजे भालों वाले पाँचों के लिए वे विशाल धरती में उनका हिस्सा माँगने दूत बनकर गए, और राजा ने उन्हें अपमानित किया!’ ‘भले ही वे दूत बनकर गए और राजा ने उनका अपमान किया, बहुत पहले उन्होंने उमड़ते जल वाली धरती को निगलकर फिर बाहर निकाला था। साऴल्!’

शब्दशः

कोदै वेल् ऐवर्क्कु आय्
मालाओं से सजे भालों वाले पाँचों, पाण्डवों के लिए
मण् अगलम् कूऱु इडुवाऩ्
विशाल धरती में हिस्सा पाने के लिए
तूदऩ् आय्
दूत बनकर
मऩ्ऩवऩाल् सॊल्लुंडाऩ्
राजा दुर्योधन द्वारा अपमानित हुए
ओद नीर् वैयगम्
उमड़ते जल वाली धरती
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.8 · चार हज़ार में 1999वाँ पाशुर

पार् मऩ्ऩर् मंगप् पडैदॊट्टु वॆम् समत्तुत्तेर् मऩ्ऩऱ्कु आय् अऩ्ऱु तेर् ऊर्ंदाऩ् काण् एडी!-तेर् मऩ्ऩऱ्कु आय् अऩ्ऱु तेर् ऊर्ंदाऩ् आगिलुम्तार् मऩ्ऩर्-तंगळ् तलैमेलाऩ् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! उस भयंकर युद्ध में जहाँ अस्त्र उठे और धरती के राजा नष्ट हुए, उस दिन उन्होंने रथी राजा के लिए रथ हाँका!’ ‘भले ही उन्होंने रथी राजा के लिए रथ हाँका, वे मालाधारी सभी राजाओं के सिरों से ऊपर खड़े हैं। साऴल्!’

शब्दशः

पार् मऩ्ऩर् मंग
जिससे धरती के राजा नष्ट हुए
वॆम् समत्तुत्
भयंकर युद्ध में
तेर् मऩ्ऩऱ्कु आय्
रथी राजा अर्जुन के लिए
तेर् ऊर्ंदाऩ्
रथ हाँका
तार् मऩ्ऩर्-तंगळ् तलैमेलाऩ्
मालाधारी राजाओं के सिरों से ऊपर
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.9 · चार हज़ार में 2000वाँ पाशुर

कंडार् इरंग कऴियक् कुऱळ् उरु आय्वण् ताराऩ् वेळ्वियिल् मण् इरंदाऩ् काण् एडीवण् ताराऩ् वेळ्वियिल् मण् इरंदाऩ् आगिलुम्विंडु एऴ् उलगुक्कुम् मिक्काऩ् काण् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! उन्होंने अपने आप को इतना छोटा बना लिया कि देखने वाले सबको दया आई, और उदार, मालाधारी राजा के यज्ञ में भूमि माँगी!’ ‘भले ही उन्होंने उस राजा के यज्ञ में भूमि माँगी, जानती हो, वे सातों लोकों से भी बड़े विष्णु हैं। साऴल्!’

शब्दशः

कंडार् इरंग
जिससे देखने वालों को दया आई
कऴियक् कुऱळ् उरु आय्
बहुत छोटे वामन बनकर
वण् ताराऩ् वेळ्वियिल्
उदार, मालाधारी राजा महाबली के यज्ञ में
मण् इरंदाऩ्
भूमि माँगी
विंडु
विष्णु
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पेरिय तिरुमोळि 11.5.10 · चार हज़ार में 2001वाँ पाशुर

कळ्ळत्ताल् मावलियै मूवडि मण् कॊंडु अळंदाऩ्वॆळ्ळत्ताऩ् वेंगडत्ताऩ् ऎऩ्बराल् काण् एडी!-वॆळ्ळत्ताऩ् वेंगडत्ताऩेलुम् कलिगऩ्ऱिउळ्ळत्तिऩ् उळ्ळे उळऩ् कंडाय् साऴले

अर्थ

‘देखो, सखी! चाल से उन्होंने महाबली से तीन पग भूमि ले ली और उसे नाप लिया, और कहते हैं वे समुद्र में और तिरुवेङ्कटम् पर रहते हैं!’ ‘भले ही वे समुद्र में और तिरुवेङ्कटम् पर रहते हों, जानती हो, वे ठीक यहीं, कलिकन्रि, तिरुमङ्गै आळ्वार्, के हृदय के भीतर हैं। साऴल्!’

शब्दशः

कळ्ळत्ताल्
चाल से
मूवडि मण् कॊंडु अळंदाऩ्
तीन पग भूमि लेकर नाप ली
वॆळ्ळत्ताऩ्
वे जो समुद्र में लेटे हैं
वेंगडत्ताऩ्
वे जो तिरुवेङ्कटम् पर खड़े हैं
कलिगऩ्ऱि उळ्ळत्तिऩ् उळ्ळे उळऩ्
वे कलिकन्रि के हृदय के भीतर हैं
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।