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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरिय तिरुमोळि 7.1

पत्तु 7 · दशक 7.1 · 10 पाशुर

पेरिय तिरुमोळि 7.1.1 · चार हज़ार में 1548वाँ पाशुर

कऱवा मड नागु तऩ् कऩ्ऱु उळ्ळिऩाल्बोल्मऱवादु अडियेऩ् उऩ्ऩैये अऴैक्किऩ्ऱेऩ्-नऱवु आर् पॊऴिल् सूऴ् नऱैयूर् निऩ्ऱ नंबिपिऱवामै ऎऩैप् पणि-ऎंदै पिराऩे

अर्थ

जैसे बिना दुही एक युवा गाय अपने बछड़े को याद करती है, वैसे ही मैं, तुम्हारा दास, केवल तुम्हें ही पुकारता हूँ और तुम्हें कभी नहीं भूलता। हे मधु भरे उपवनों से घिरे नरैयूर् में खड़े नम्बि, मेरे पिता, मेरे प्रभु, यह वर दो कि मैं फिर कभी जन्म न लूँ।

शब्दशः

कऱवा मड नागु
बिना दुही युवा गाय
तऩ् कऩ्ऱु उळ्ळिऩाल्बोल्
जैसे वह अपने बछड़े को याद करती है
मऱवादु
बिना भूले
उऩ्ऩैये अऴैक्किऩ्ऱेऩ्
मैं केवल तुम्हें पुकारता हूँ
नऱवु आर् पॊऴिल्
मधु से भरे उपवन
पिऱवामै ऎऩैप् पणि
मुझे यह वर दो कि मैं फिर जन्म न लूँ
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.2 · चार हज़ार में 1549वाँ पाशुर

वऱ्ऱा मुदुनीरॊडु माल् वरै एऴुम्तुऱ्ऱु आग मुऩ् तुऱ्ऱिय तॊल् पुगऴोऩेअऱ्ऱेऩ् अडियेऩ् उऩ्ऩैये अऴैक्किऩ्ऱेऩ्पॆऱ्ऱेऩ् अरुळ् तंदिडु-ऎऩ् ऎंदै पिराऩे

अर्थ

हे प्राचीन कीर्ति वाले, जिन्होंने बहुत पहले कभी न सूखने वाले प्राचीन सागर और सातों महान पर्वतों को एक ही कौर में निगल लिया! मैं, तुम्हारा दास, जिसके पास थामने को और कुछ नहीं, केवल तुम्हें ही पुकारता हूँ। मुझे अपनी कृपा दो, मेरे पिता, मेरे प्रभु: मैंने तुम्हें पा लिया है।

शब्दशः

वऱ्ऱा मुदुनीरॊडु
कभी न सूखने वाले प्राचीन जल, सागर के साथ
माल् वरै एऴुम्
सातों महान पर्वत
तुऱ्ऱु आग
एक ही कौर बनाकर
तॊल् पुगऴोऩे
हे प्राचीन कीर्ति वाले
अऱ्ऱेऩ्
मैं जिसके पास और कुछ नहीं
अरुळ् तंदिडु
मुझे अपनी कृपा दो
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.3 · चार हज़ार में 1550वाँ पाशुर

तारेऩ् पिऱर्क्कु उऩ् अरुळ् ऎऩ्ऩिडै वैत्ताय्आरेऩ् अदुवे परुगिक् कळिक्किऩ्ऱेऩ्-कार् एय् कडले मलैये तिरुक्कोट्टिऊरे उगंदायै उगंदु अडियेऩे

अर्थ

तुमने जो कृपा मुझमें रखी है, उसे मैं दूसरों को नहीं दूँगा; उससे मेरा कभी जी नहीं भरता, और मैं उसे पीकर आनन्दित होता हूँ। तुम प्रसन्नता से मेघ जैसे काले सागर में, पर्वत पर, और तिरुक्कोष्टियूर् नगर में रहते हो, और मैं, तुम्हारा दास, बदले में तुमसे प्रेम करता हूँ।

शब्दशः

तारेऩ् पिऱर्क्कु
मैं इसे दूसरों को नहीं दूँगा
उऩ् अरुळ् ऎऩ्ऩिडै वैत्ताय्
तुमने अपनी कृपा मुझमें रखी है
आरेऩ्
मेरा कभी जी नहीं भरता
परुगिक् कळिक्किऩ्ऱेऩ्
मैं इसे पीकर आनन्दित होता हूँ
तिरुक्कोट्टि ऊरे
तिरुक्कोष्टियूर् नगर
उगंदायै उगंदु
तुमसे प्रेम करते हुए, जो इन स्थानों से प्रेम करते हो
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.4 · चार हज़ार में 1551वाँ पाशुर

पुळ् वाय् पिळंद पुऩिदा ऎऩ्ऱु अऴैक्कउळ्ळे निऩ्ऱु ऎऩ् उळ्ळम् कुळिरुम् ऒरुवाकळ्वा कडल्मल्लैक् किडंद करुंबेवळ्ळाल् उऩ्ऩै ऎङ्ङऩम् नाऩ् मऱक्केऩे?

अर्थ

जब मैं पुकारता हूँ, "हे पक्षी की चोंच चीरने वाले निर्मल प्रभु," तब तुम, अनुपम प्रभु, मेरे भीतर खड़े हो जाते हो और मेरा हृदय शीतल हो जाता है। हे चोर, हे कडल्मल्लै में लेटे गन्ने, हे दानी प्रभु, मैं तुम्हें कभी कैसे भूल सकता हूँ?

शब्दशः

पुळ् वाय् पिळंद
जिन्होंने पक्षी-राक्षस बकासुर की चोंच चीरी
पुऩिदा
हे निर्मल प्रभु
उळ्ळम् कुळिरुम्
मेरा हृदय शीतल हो जाता है
कळ्वा
हे चोर, जिन्होंने मेरा हृदय चुरा लिया
कडल्मल्लैक् किडंद करुंबे
हे कडल्मल्लै (मामल्लपुरम्) में लेटे गन्ने
वळ्ळाल्
हे दानी प्रभु
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.5 · चार हज़ार में 1552वाँ पाशुर

विल् एर् नुदल् नॆडुङ् कण्णियुम् नीयुम्कल् आर् कडुङ् काऩम् तिरिंद कळिऱेनल्लाय् नर नारणऩे ऎंगळ् नंबिसॊल्लाय्-उऩ्ऩै याऩ् वणंगित् तॊऴुम् आऱे

अर्थ

तुम और धनुष जैसी मुड़ी भौंहों और लम्बी आँखों वाली सीता कठोर, पथरीले वन में भटके, हे पुरुषों में बलशाली गजराज। हे भले प्रभु, नर और नारायण, हमारे नम्बि, मुझे वह मार्ग बताओ जिससे मैं तुम्हें प्रणाम करूँ और तुम्हारी उपासना करूँ।

शब्दशः

विल् एर् नुदल्
धनुष जैसी मुड़ी भौंह
नॆडुङ् कण्णियुम्
और लम्बी आँखों वाली, सीता
कल् आर् कडुङ् काऩम्
कठोर, पथरीला वन
कळिऱे
हे बलशाली गजराज
नर नारणऩे
हे नर और नारायण
वणंगित् तॊऴुम् आऱे
प्रणाम और उपासना करने का मार्ग
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.6 · चार हज़ार में 1553वाँ पाशुर

पऩि एय् परङ् कुऩ्ऱिऩ् पवळत् तिरळेमुऩिये तिरुमूऴिक्कळत्तु विळक्केइऩियाय् तॊंडरोम् परुगुम् इऩ् अमुदु आयकऩिये उऩ्ऩैक् कंडुगॊंडु उय्ंदॊऴिंदेऩे

अर्थ

हे ओस से ढके महान पर्वत पर मूँगे के ढेर! हे मुनि, हे तिरुमूळिक्कळम् के दीप! हे मधुर प्रभु, हे वह फल जो वह मीठा अमृत है जिसे हम तुम्हारे दास पीते हैं! मैंने तुम्हें देखा है, और मैं उबर गया हूँ।

शब्दशः

पऩि एय् परङ् कुऩ्ऱिऩ्
ओस से ढके महान पर्वत का
पवळत् तिरळे
हे मूँगे के ढेर
मुऩिये
हे मुनि
तिरुमूऴिक्कळत्तु विळक्के
हे तिरुमूळिक्कळम् के दीप
तॊंडरोम् परुगुम् इऩ् अमुदु
वह मीठा अमृत जिसे हम दास पीते हैं
उय्ंदॊऴिंदेऩे
मैं उबर गया हूँ
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.7 · चार हज़ार में 1554वाँ पाशुर

कदियेल् इल्लै निऩ् अरुळ् अल्लदु ऎऩक्कुनिदिये तिरुनीर्मलै नित्तिलत् तॊत्तेपदिये परवित् तॊऴुम् तॊंडर्-तमक्कुक्कदिये उऩ्ऩैक् कंडुगॊंडु उय्ंदॊऴिंदेऩे

अर्थ

तुम्हारी कृपा के सिवा मेरा कोई शरण नहीं। हे मेरे धन, हे तिरुनीर्मलै के मोतियों के गुच्छे, हे प्रभु, उन दासों के शरण जो तुम्हारी स्तुति और उपासना करते हैं! मैंने तुम्हें देखा है, और मैं उबर गया हूँ।

शब्दशः

कदियेल् इल्लै
मेरा कोई शरण नहीं
निऩ् अरुळ् अल्लदु
तुम्हारी कृपा के सिवा
निदिये
हे धन
तिरुनीर्मलै नित्तिलत् तॊत्ते
हे तिरुनीर्मलै के मोतियों के गुच्छे
पदिये
हे प्रभु
तॊंडर्-तमक्कुक् कदिये
हे अपने दासों के शरण
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.8 · चार हज़ार में 1555वाँ पाशुर

अत्ता अरिये ऎऩ्ऱु उऩ्ऩै अऴैक्कपित्ता ऎऩ्ऱु पेशुगिऩ्ऱार् पिऱर् ऎऩ्ऩैमुत्ते मणि माणिक्कमे मुळैक्किऩ्ऱवित्ते उऩ्ऩै ऎङ्ङऩम् नाऩ् विडुगेऩे

अर्थ

जब मैं तुम्हें पुकारता हूँ, "पिता! हरि!", तब दूसरे मेरे बारे में कहते हैं, "यह पागल है।" हे मोती, हे मणि, हे माणिक्य, हे सदा अंकुरित होते बीज, मैं तुम्हें कभी कैसे छोड़ सकता हूँ?

शब्दशः

अत्ता अरिये
हे पिता, हे हरि
पित्ता ऎऩ्ऱु
मुझे पागल कहते हुए
पेशुगिऩ्ऱार् पिऱर्
दूसरे कहते हैं
मणि माणिक्कमे
हे मणि, हे माणिक्य
मुळैक्किऩ्ऱ वित्ते
हे अंकुरित होते बीज, सबके मूल
ऎङ्ङऩम् नाऩ् विडुगेऩे
मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकता हूँ?
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.9 · चार हज़ार में 1556वाँ पाशुर

तूयाय् सुडर् मा मदिबोल् उयिर्क्कु ऎल्लाम्ताय् आय् अळिक्किऩ्ऱ तण् तामरैक् कण्णाआया अलै नीर् उलगु एऴुम् मुऩ् उंडवाया उऩ्ऩै ऎङ्ङऩम् नाऩ् मऱक्केऩे

अर्थ

हे निर्मल प्रभु, हे शीतल कमल-नयन प्रभु, जो उज्ज्वल, महान चन्द्रमा की तरह सारे जीवों की माँ जैसी देखभाल करते हो! हे ग्वाले, जिनके मुख ने बहुत पहले सातों लोकों और उनके उमड़ते जल को निगल लिया! मैं तुम्हें कभी कैसे भूल सकता हूँ?

शब्दशः

तूयाय्
हे निर्मल प्रभु
सुडर् मा मदिबोल्
उज्ज्वल, महान चन्द्रमा की तरह
उयिर्क्कु ऎल्लाम् ताय् आय्
सारे जीवों की माँ बनकर
तण् तामरैक् कण्णा
हे शीतल कमल-नयन प्रभु
आया
हे ग्वाले
उलगु एऴुम् मुऩ् उंड वाया
जिनके मुख ने एक बार सातों लोक निगल लिए
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पेरिय तिरुमोळि 7.1.10 · चार हज़ार में 1557वाँ पाशुर

वंडु आर् पॊऴिल् सूऴ् नऱैयूर् नंबिक्कु ऎऩ्ऱुम्तॊंडु आय् कलियऩ् ऒलिशॆय् तमिऴ्-मालैतॊंडीर् इवै पाडुमिऩ् पाडि निऩ्ऱु आडउंडे विशुंबु उम्-तमक्कु इल्लै तुयरे

अर्थ

भौंरों से भरे उपवनों से घिरे नरैयूर् के नम्बि के सदा के दास कलियन् ने ध्वनि की यह तमिऴ् माला बनाई। हे भक्तो, ये गीत गाओ; गाते हुए खड़े होकर नाचो। स्वर्ग तुम्हारा है, और तुम्हें कोई दुख नहीं होगा।

शब्दशः

वंडु आर् पॊऴिल्
भौंरों से भरे उपवन
ऎऩ्ऱुम् तॊंडु आय्
सदा उनके दास
कलियऩ्
कलियन्, तिरुमङ्गै आळ्वार्
तॊंडीर्
हे भक्तो
पाडि निऩ्ऱु आड
गाते हुए खड़े होकर नाचते हुए
उंडे विशुंबु
स्वर्ग निश्चय ही तुम्हारा है
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।