तिरुमळिशै आळ्वार् के 96 पाशुरों का नाम चतुर्मुख ब्रह्मा (नान्मुगन्) से है, जिन्हें पहला पाशुर नारायण से उत्पन्न बताता है। पूरी रचना यह स्थापित करती है कि नारायण ही परम हैं और हर अन्य देवता का स्थान उन्हीं के कारण है, और आळ्वार् घोषणा करते हैं कि वे किसी और की उपासना नहीं करेंगे।
पाशुर, दस-दस करके
1-10नाऩ्मुगऩै नारायणऩ् पडैत्ताऩ् नाऩ्मुगऩुम्…10 पाशुर
11-20वाऴ्त्तुग वाय् काण्ग कण्…10 पाशुर
21-30इवैया पिल वाय् तिऱंदु…10 पाशुर
31-40मेल् नाऩ्मुगऩ् अरऩै इट्ट…10 पाशुर
41-50काणल् उऱुगिऩ्ऱेऩ् कल् अरुवि…10 पाशुर
51-60ऎऩक्कु आवार् आर् ऒरुवरे?…10 पाशुर
61-70मऩक् केदम् सारा मदुशूदऩ्…10 पाशुर
71-80सेयऩ् अणियऩ् सिऱियऩ् मिगप्…10 पाशुर
81-90कदवु मऩम् ऎऩ्ऱुम् काणलाम्…10 पाशुर
91-96तमर् आवार् यावर्क्कुम् तामरैमेलाऱ्कुम्…6 पाशुर