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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुप्पार्कडल् (क्षीराब्धि)

विण्णुलगम् · क्र. 107

पेरुमाळ्

क्षीराब्धिनाथन्

तायार्

कडल्मगळ् नाच्चियार्

यह दिव्य देश इस लोक से परे है। यहाँ मार्ग से नहीं, भगवान की कृपा से पहुँचा जाता है।

गान किया