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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुपरमपदम् (श्रीवैकुण्ठम्)

विण्णुलगम् · क्र. 108

पेरुमाळ्

परमपदनाथन्

तायार्

पेरिय पिराट्टि

यह दिव्य देश इस लोक से परे है। यहाँ मार्ग से नहीं, भगवान की कृपा से पहुँचा जाता है।