पेरुमाळ्परमपदनाथन् तायार्पेरिय पिराट्टि यह दिव्य देश इस लोक से परे है। यहाँ मार्ग से नहीं, भगवान की कृपा से पहुँचा जाता है। तिरुपरमपदम् (श्रीवैकुण्ठम्) के बारे में श्री पादुका से पूछिए ← 107. तिरुप्पार्कडल् (क्षीराब्धि)