सिरिय तिरुमडल् के ही विषय पर बड़ी मडल्: भगवान से प्रेम करने वाली कन्या चुपचाप सहने के बजाय ताड़ के घोड़े पर गलियों में घूमने का निश्चय करती है। इस क्रम में वह बहुत से दिव्यदेशों के नाम लेती है जहाँ वे विराजते हैं। चार हज़ार की गिनती में इसके द्विपदों को 78 पाशुर गिना जाता है।
पाशुर, दस-दस करके
1-10मऩ्ऩिय पल् पॊऱि सेर्…10 पाशुर
11-20मऩ्ऩिय सिंगाशऩत्तिऩ्मेल् वाळ् नॆडुङ्…10 पाशुर
21-30अऩ्ऩदु ओर् तऩ्मै अऱियादार्…10 पाशुर
31-40तऩ्ऩुडैय पावै उलगत्तुत् तऩ्…10 पाशुर
41-50इऩ् निलाविऩ् कदिरुम् ऎऩ्…10 पाशुर
51-60तऩ्ऩुडैय ताळ्मेल् किडात्ति अवऩुडैय…10 पाशुर
61-70मुऩ् इव् उलगु उंड…10 पाशुर
71-78मुऩ् इरुंदु मुऱ्ऱ ताऩ्…8 पाशुर