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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरिय तिरुमडल्

तिरुमङ्गै आळ्वार् की रचना · 78 पाशुर

सिरिय तिरुमडल् के ही विषय पर बड़ी मडल्: भगवान से प्रेम करने वाली कन्या चुपचाप सहने के बजाय ताड़ के घोड़े पर गलियों में घूमने का निश्चय करती है। इस क्रम में वह बहुत से दिव्यदेशों के नाम लेती है जहाँ वे विराजते हैं। चार हज़ार की गिनती में इसके द्विपदों को 78 पाशुर गिना जाता है।

पाशुर, दस-दस करके