तिरुप्पल्लाण्डु 11 · चार हज़ार में 11वाँ पाशुर
अल्वऴक्कु ऒऩ्ऱुम् इल्ला अणि कोट्टियर्कोऩ् अबिमाऩदुंगऩ्सॆल्वऩैप् पोल तिरुमाले नाऩुम्उऩक्कुप् पऴ अडियेऩ्नल् वगैयाल् नमो नारायणा ऎऩ्ऱुनामम् पल परविपल् वगैयालुम् पवित्तिरऩे उऩ्ऩैप्पल्लांडु कूऱुवऩे
अर्थ
तिरुक्कोष्टियूर् के उत्तम लोगों के स्वामी, हर गलत राह से मुक्त सेल्वन् अभिमानतुङ्गन् की तरह, हे तिरुमाल्, मैं भी तुम्हारा पुराना सेवक हूँ। उत्तम रीति से "नमो नारायण" कहकर तुम्हारे अनेक नामों की स्तुति करते हुए, और जितनी भी रीतियों से मैं कर सकूँ, हे पवित्र प्रभु, मैं तुम्हारे लिए पल्लाण्डु गाता हूँ।
शब्दशः
- अल्वऴक्कु ऒऩ्ऱुम् इल्ला
- जिनमें कोई भी गलत राह नहीं
- कोट्टियर् कोऩ्
- तिरुक्कोष्टियूर् के लोगों के स्वामी
- अबिमाऩदुंगऩ् सॆल्वऩैप् पोल
- अभिमानतुङ्गन् कहलाने वाले सेल्वन् की तरह
- तिरुमाले
- हे तिरुमाल्, श्री के स्वामी
- पऴ अडियेऩ्
- तुम्हारा पुराना सेवक
- नामम् पल परवि
- तुम्हारे अनेक नामों की स्तुति करते हुए
- पवित्तिरऩे
- हे पवित्र प्रभु
पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।