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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुप्पावै 24

आण्डाळ् की रचना · चार हज़ार में 497वाँ पाशुर

तिरुप्पावै 24 · चार हज़ार में 497वाँ पाशुर

अऩ्ऱु इव् उलगम् अळंदाय् अडि पोऱ्ऱिसॆऩ्ऱु अंगुत् तॆऩ्ऩिलंगै सॆऱ्ऱाय् तिऱल् पोऱ्ऱिपॊऩ्ऱच् चगडम् उदैत्ताय् पुगऴ् पोऱ्ऱिकऩ्ऱु कुणिला ऎऱिंदाय् कऴल् पोऱ्ऱिकुऩ्ऱु कुडैया ऎडुत्ताय् कुणम् पोऱ्ऱिवॆऩ्ऱु पगै कॆडुक्कुम् निऩ्गैयिल् वेल् पोऱ्ऱिऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱु उऩ् सेवगमे एत्तिप् पऱै कॊळ्वाऩ्इऩ्ऱु याम् वंदोम् इरंगु-एलोर् ऎंबावाय्

अर्थ

जय हो तुम्हारे उन चरणों की, जिन्होंने उस दिन यह संसार नापा! जय हो तुम्हारे उस बल की, जिसने वहाँ जाकर दक्षिण लंका का नाश किया! जय हो तुम्हारे उस यश की, जिसने गाड़ी को लात मारकर टुकड़े-टुकड़े किया! जय हो तुम्हारे नूपुर की, जब तुमने बछड़े को डण्डे की तरह फेंका! जय हो तुम्हारी उस भलाई की, जिसने पर्वत को छाते की तरह उठाया! जय हो तुम्हारे हाथ के उस भाले की, जो शत्रु को जीतकर नष्ट करता है! तुम्हारे वीर कर्मों की बार-बार स्तुति करती हुई, हम आज ढोल पाने आई हैं। हम पर दया करो।

शब्दशः

अऩ्ऱु इव् उलगम् अळंदाय्
तुम जिन्होंने उस दिन यह संसार नापा
अडि पोऱ्ऱि
जय हो तुम्हारे चरणों की
पॊऩ्ऱच् चगडम् उदैत्ताय्
तुम जिन्होंने गाड़ी को लात मारकर उसका अन्त किया
कऩ्ऱु कुणिला ऎऱिंदाय्
तुम जिन्होंने बछड़ा-असुर को फेंकने के डण्डे की तरह फेंका
कुऩ्ऱु कुडैया ऎडुत्ताय्
तुम जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को छाते की तरह उठाया
सेवगमे
तुम्हारे वीर कर्म
इरंगु
दया करो
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।