पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.1 · चार हज़ार में 297वाँ पाशुर
अर्थ
(वह माँ बोलती है जिसकी बेटी कृष्ण के पीछे चली गई है।) जैसे एक सुंदर कमल-सरोवर, जिसके ओस टपकते ताज़े फूलों की पंखुड़ियाँ और पराग झड़ गए हों और सारी शोभा चली गई हो, वैसे ही मेरा घर सूना और उजाड़ हो गया है। मेरी बेटी मुझे कहीं नहीं मिलती। क्या वह पहलवानों को मारने वाले के पीछे गई है, और मथुरा के बाहरी छोर तक पहुँच गई है?
शब्दशः
- तामरैप् पॊय्गै
- कमल-सरोवर
- नाण्मलर् मेल् पऩि सोर
- ताज़े फूलों पर टपकती ओस
- अल्लियुम् तादुम् उदिर्ंदिट्टु
- पंखुड़ियाँ और पराग झड़ गए
- इल्लम् वॆऱियोडिऱ्ऱालो
- मेरा घर सूना हो गया है
- मल्लरै अट्टवऩ्
- पहलवानों को मारने वाले
- मदुरैप् पुऱम् पुक्काळ् कॊल्लो
- क्या वह मथुरा के बाहरी छोर तक पहुँच गई?
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.2 · चार हज़ार में 298वाँ पाशुर
अर्थ
जितनी आसानी से वे भोले ग्वाले, जो कुछ भी नहीं जानते, एक बछड़े को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं, उतनी ही आसानी से वे हमारे साथ यहाँ रहने वाली कन्या को, हमसे बढ़िया चाल चलकर, ले गए। नारायण का किया यह अन्याय क्या हमारे कुल पर स्थायी कलंक बन जाएगा?
शब्दशः
- ऒऩ्ऱुम् अऱिवु ऒऩ्ऱु इल्लाद
- कुछ भी न जानते हुए
- कोबालर्
- ग्वाले
- कऩ्ऱु काल् माऱुमा पोले
- जैसे बछड़े को जगह-जगह ले जाया जाता है
- कऩ्ऩि इरुंदाळैक् कॊंडु
- यहाँ रहने वाली कन्या को ले जाकर
- नऩ्ऱुम् किऱि सॆय्दु
- बढ़िया चाल चलकर
- एच्चुक्कॊल्
- कलंक, दोष
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.3 · चार हज़ार में 299वाँ पाशुर
अर्थ
क्या वे कन्या का विधिपूर्वक विवाह करेंगे, उसे सजाकर घर में रखेंगे? क्या वे घोषणा करेंगे, कि अपने-पराए सब जान लें, कि वह दामोदर को सौंपी गई है? क्या वे अमरों के स्वामी की रानी की पूजा करेंगे, ढोल इतने बजाएँगे कि ध्वनि ऊँची उठे, और तोरण सजाएँगे?
शब्दशः
- कुमरि मणम् सॆय्दु कॊंडु
- कन्या का विवाह करना
- कोलम् सॆय्दु
- उसे सजाना
- तमरुम् पिऱरुम् अऱियत्
- अपने और पराए जान लें, ऐसे
- तामोदरऱ्कु ऎऩ्ऱु साऱ्ऱि
- घोषणा करना कि वह दामोदर को सौंपी गई है
- अमरर् पदियुडैत् तेवि
- अमरों के स्वामी की रानी
- तोरणम् नाट्टिडुङ् कॊल्लो
- क्या वे तोरण सजाएँगे?
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.4 · चार हज़ार में 300वाँ पाशुर
अर्थ
मेरी एक ही बेटी थी, और संसार भर में फैली कीर्ति के साथ मैंने उसे स्वयं लक्ष्मी की तरह पाला। लाल आँखों वाले प्रभु उसे ले गए हैं। क्या यशोदा, जो अपने घर की बड़ी स्वामिनी बनकर रहीं और उस महान पुत्र को जना, अपनी बहू को देखकर आनंदित होंगी और वधू के स्वागत की रस्में करेंगी?
शब्दशः
- ऒरु मगळ् तऩ्ऩै उडैयेऩ्
- मेरी एक ही बेटी थी
- तिरुमगळ् पोल वळर्त्तेऩ्
- मैंने उसे लक्ष्मी की तरह पाला
- सॆंगण् माल्
- लाल आँखों वाले प्रभु
- पॆरुंबिळ्ळै पॆऱ्ऱ अशोदै
- यशोदा, जिन्होंने उस महान पुत्र को जना
- मरुमगळैक् कंडु उगंदु
- अपनी बहू को देखकर आनंदित होना
- मणाट्टुप् पुऱम्जॆय्युङ् कॊल्लो
- क्या वे वधू का स्वागत करेंगी?
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.5 · चार हज़ार में 301वाँ पाशुर
अर्थ
क्या उसके ससुर नन्दगोप मेरी बेटी को गोद में लेकर प्यार से बात करेंगे? उसकी सुंदर मछली जैसी आँखें, लाल अधर, युवा रूप, पतली कमर और चिकने, गोल कंधे देखकर क्या वे कहेंगे, 'इस कन्या को जनने वाली माँ अब इसके बिना रह नहीं पाएगी'?
शब्दशः
- तम् मामऩ् नंदगोबालऩ्
- उसके ससुर नन्दगोप
- तऴीइक् कॊंडु
- गले लगाना
- सॆऴुङ् कयऱ् कण्णुम्
- सुंदर मछली जैसी आँखें
- कॊऴुंबणैत् तोळ्गळुम्
- युवा बाँस जैसे चिकने कंधे
- इऩित् तरियार्
- अब सह नहीं पाएगी
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.6 · चार हज़ार में 302वाँ पाशुर
अर्थ
क्या वे भयानक शिकारी जातियों की तरह, जैसा मन आए वैसा करेंगे और मेरी बेटी के साथ ऐसे रहेंगे मानो उनका मिलन ही उनका विवाह हो? या छकड़े को लात मारकर तोड़ने वाले प्रभु सुंदर विवाह रचाएँगे, कि देश और नगर जान लें, और विधिपूर्वक उसका हाथ थामेंगे?
शब्दशः
- वेडर् मऱक्कुलम् पोले
- भयानक शिकारी जातियों की तरह
- कूडिय कूट्टमे यागक्
- केवल उनका मिलन ही विवाह माना जाए
- नाडुम् नगरुम् अऱिय
- देश और नगर जान लें, ऐसे
- साडु इऱप् पाय्ंद पॆरुमाऩ्
- छकड़े को लात मारकर तोड़ने वाले प्रभु
- तक्कवा कैप्पऱ्ऱुङ् कॊल्लो
- क्या वे विधिपूर्वक उसका हाथ थामेंगे?
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.7 · चार हज़ार में 303वाँ पाशुर
अर्थ
क्या ब्रह्माण्ड के अमरों के स्वामी, चक्रधारी प्रभु, अब मेरी बेटी के बारे में अपमान भरी बातें कहेंगे और बिना आदर के उस पर शासन करेंगे? या वे उसे अपनाएँगे, उसके साथ गृहस्थ जीवन बिताएँगे, उसे ग्वालों की रानी की उपाधि से सजाएँगे, और अपनी पहले की वधुओं के सामने उसे सुरक्षित और सम्मानित रखेंगे?
शब्दशः
- अंडत्तु अमरर् पॆरुमाऩ्
- ब्रह्माण्ड के अमरों के स्वामी
- आऴियाऩ्
- चक्रधारी प्रभु
- पंडप् पऴिप्पुक्कळ् सॊल्लिप्
- उसके बारे में अपमान भरी बातें कहना
- परिशु अऱ आंडिडुङ् कॊल्लो
- क्या वे बिना आदर के उस पर शासन करेंगे?
- कोवलप् पट्टम् कवित्तुप्
- उसे ग्वालों की रानी की उपाधि से सजाना
- पंडै मणाट्टिमार् मुऩ्ऩे
- अपनी पहले की वधुओं के सामने
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.8 · चार हज़ार में 304वाँ पाशुर
अर्थ
नन्दगोप के पुत्र कण्णन् ने कुलीनों के अच्छे कामों में से कोई भी नहीं किया; हाय सखी, उन्होंने कोई भी उचित रीति नहीं निभाई। क्या मेरी बेटी को, कभी इधर कभी उधर कमर झुकाते, दुबली-दुबली होते, आहें भरते, मथानी की रस्सी इतनी खींचनी पड़ेगी कि उसके हाथों में छाले पड़ जाएँ?
शब्दशः
- कुडियिऱ् पिऱंदवर् सॆय्युम् कुणम्
- कुलीनों के अच्छे ढंग
- नडै ऒऩ्ऱुम् सॆय्दिलऩ्
- उन्होंने कोई उचित रीति नहीं निभाई
- नंदगोबऩ् मगऩ् कण्णऩ्
- कण्णन्, नन्दगोप के पुत्र
- इळैत्तु इळैत्तु
- दुबली-दुबली होती हुई
- कडैगयिऱे पऱ्ऱि वांगिक्
- मथानी की रस्सी खींचते हुए
- कै तऴुंबु एऱिडुङ् कॊल्लो
- क्या उसके हाथों में छाले पड़ेंगे?
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.9 · चार हज़ार में 305वाँ पाशुर
अर्थ
क्या वह सफ़ेद भोर से पहले उठकर, बिना सोए, सफ़ेद जमा दही मथने बैठ पाएगी? क्या चमकती लाल कमल जैसी आँखों वाले, जिन्होंने संसार को नापा, मेरी बेटी से बिना सम्मान के काम कराएँगे और बिना आदर के उस पर शासन करेंगे?
शब्दशः
- वॆण्णिऱत् तोय् तयिर्
- सफ़ेद जमा दही
- वॆळ्वरैप्पिऩ् मुऩ् ऎऴुंदु
- सफ़ेद भोर से पहले उठकर
- कण् उऱंगादे
- बिना सोए
- ऒण्णिऱत् तामरैच् चॆंगण्
- चमकती लाल कमल जैसी आँखें
- उलगळंदाऩ्
- जिन्होंने संसार को नापा
- पणिगॊंडु
- उससे काम कराना
पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.8.10 · चार हज़ार में 306वाँ पाशुर
अर्थ
माँ उस राह चली जिस पर अद्भुत प्रभु गए थे, रास्ते की बातें सुनीं, ग्वालों की बस्ती में पहुँचकर वहाँ कही गई सब बातें सुनीं। शीतल पुदुवै के भट्टन्, पेरियाळ्वार्, ने उनके वचन शुद्ध तमिळ के इन दस पदों में कहे हैं। जो इनमें पारंगत होंगे, वे निर्मल नीलम जैसे रंग वाले प्रभु के सेवक बनेंगे।
शब्दशः
- मायवऩ् पिऩ्वऴि सॆऩ्ऱु
- अद्भुत प्रभु की राह पर चलकर
- वऴियिडै माऱ्ऱंगळ् केट्टु
- रास्ते की बातें सुनकर
- आयर्गळ् सेरियिलुम् पुक्कु
- ग्वालों की बस्ती में पहुँचकर
- तण् पुदुवैप् पट्टऩ्
- शीतल पुदुवै के भट्टन्, पेरियाळ्वार्
- तू मणिवण्णऩुक्कु आळरे
- निर्मल नीलम जैसे रंग वाले प्रभु के सेवक बनेंगे
पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।