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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9

पत्तु 3 · दशक 3.9 · 11 पाशुर

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.1 · चार हज़ार में 307वाँ पाशुर

ऎऩ् नादऩ् तेविक्कु अऩ्ऱु इऩ्बप्पू ईयादाळ्तऩ् नादऩ् काणवे तण्बू मरत्तिऩैवऩ् नादप् पुळ्ळाल् वलियप् पऱित्तिट्टऎऩ् नादऩ् वऩ्मैयैप् पाडिप् पऱऎंबिराऩ् वऩ्मैयैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

(खेलती हुई कन्याएँ बारी-बारी से प्रभु का गुणगान करती हैं, एक कृष्ण का और एक राम का, गाते हुए उछलती हैं।) बहुत पहले, जब इन्द्र की रानी ने मेरे प्रभु की रानी को आनंद का फूल नहीं दिया, तब मेरे प्रभु ने अपने प्रबल स्वर वाले पक्षी गरुड के साथ उस शीतल फूलों वाले वृक्ष को उसके अपने पति के देखते-देखते बलपूर्वक उखाड़ लिया। मेरे प्रभु का पराक्रम गाओ और उछलो! मेरे स्वामी का पराक्रम गाओ और उछलो!

शब्दशः

ऎऩ् नादऩ् तेविक्कु
मेरे प्रभु की रानी को
इऩ्बप्पू ईयादाळ्
वह जिसने आनंद का फूल नहीं दिया
तऩ् नादऩ् काणवे
उसके अपने पति के देखते-देखते
तण्बू मरत्तिऩै
शीतल फूलों वाला वृक्ष, पारिजात
वऩ् नादप् पुळ्ळाल्
प्रबल स्वर वाले पक्षी, गरुड के साथ
पाडिप् पऱ
गाओ और उछलो, कन्याओं का खेल
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.2 · चार हज़ार में 308वाँ पाशुर

ऎऩ् विल् वलि कंडु पो ऎऩ्ऱु ऎदिर्वंदाऩ्तऩ् विल्लिऩोडुम् तवत्तै ऎदिर्वांगिमुऩ् विल् वलित्तु मुदुबॆण् उयिरुंडाऩ्तऩ् विल्लिऩ् वऩ्मैयैप् पाडिप् पऱताशरदि तऩ्मैयैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

एक व्यक्ति यह कहते हुए उनके सामने आया, 'मेरे धनुष का बल देखो, फिर जाना!' उन्होंने उस व्यक्ति का धनुष ले लिया और उसके साथ उसकी तपस्या का सारा बल भी; और इससे पहले उन्होंने अपना धनुष तानकर उस बूढ़ी राक्षसी के प्राण लिए थे। उनके धनुष का पराक्रम गाओ और उछलो! दशरथ के पुत्र, दाशरथि की महिमा गाओ और उछलो!

शब्दशः

ऎऩ् विल् वलि कंडु पो
मेरे धनुष का बल देखो, फिर जाना
तऩ् विल्लिऩोडुम् तवत्तै ऎदिर्वांगि
उसकी तपस्या समेत उसका धनुष ले लेना
मुऩ् विल् वलित्तु
इससे पहले, अपना धनुष तानकर
मुदुबॆण् उयिरुंडाऩ्
बूढ़ी राक्षसी, ताटका के प्राण लिए
ताशरदि तऩ्मैयैप्
दाशरथि, राम की महिमा
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.3 · चार हज़ार में 309वाँ पाशुर

उरुप्पिणि नंगैयैत् तेर् एऱ्ऱिक् कॊंडुविरुप्पुऱ्ऱु अंगु एग विरैंदु ऎदिर् वंदुसॆरुक्कु उऱ्ऱाऩ् वीरम् सिदैयत् तलैयैच्सिरैत्तिट्टाऩ् वऩ्मैयैप् पाडिप् पऱतेवगि सिंगत्तैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

जब उन्होंने कुलीन रुक्मिणी को, जिसकी उन्हें चाह थी, अपने रथ पर बिठाया और ले चले, तब घमंड से फूला एक व्यक्ति उनसे भिड़ने दौड़ा; उसका पराक्रम तोड़ने के लिए उन्होंने उसका सिर मूँड़ दिया। उनका पराक्रम गाओ और उछलो! देवकी के सिंह का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

उरुप्पिणि नंगैयैत् तेर् एऱ्ऱिक् कॊंडु
कुलीन रुक्मिणी को अपने रथ पर बिठाकर
विरैंदु ऎदिर् वंदु
उनसे भिड़ने दौड़ना
सॆरुक्कु उऱ्ऱाऩ्
घमंड से फूला एक व्यक्ति, उसका भाई रुक्मी
तलैयैच् चिरैत्तिट्टाऩ्
उन्होंने उसका सिर मूँड़ दिया
तेवगि सिंगत्तैप्
देवकी के सिंह
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.4 · चार हज़ार में 310वाँ पाशुर

माऱ्ऱुत्ताय् सॆऩ्ऱु वऩंबोगे ऎऩ्ऱिडईऱ्ऱुत्ताय् पिऩ्दॊडर्ंदु ऎंबिराऩ् ऎऩ्ऱु अऴकूऱ्ऱुत् ताय् सॊल्लक् कॊडिय वऩम् पोऩसीऱ्ऱम् इलादाऩैप् पाडिप् पऱसीदै मणाळऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

एक सौतेली माँ ने कहा, 'वन चले जाओ'; उन्हें जन्म देने वाली माँ 'मेरे प्रभु!' कहकर रोती हुई पीछे चली; फिर भी मृत्यु जैसी क्रूर माँ के कहने पर वे कठोर वन में चले गए, क्रोध का लेश भी नहीं था। जिन्हें क्रोध छूता तक नहीं, उनका गुणगान करो और उछलो! सीता के वर का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

माऱ्ऱुत्ताय्
एक सौतेली माँ
ईऱ्ऱुत्ताय्
उन्हें जन्म देने वाली माँ, कौसल्या
कूऱ्ऱुत् ताय्
मृत्यु जैसी क्रूर माँ
कॊडिय वऩम् पोऩ
जो कठोर वन में गए
सीऱ्ऱम् इलादाऩैप्
जिन्हें क्रोध नहीं छूता
सीदै मणाळऩैप्
सीता के वर
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.5 · चार हज़ार में 311वाँ पाशुर

पंजवर् तूदऩाय्प् पारदम् कैशॆय्दुनंजु उमिऴ् नागम् किडंद नऱ् पॊय्गै पुक्कुअंजप् पणत्तिऩ्मेल् पाय्ंदिट्टु अरुळ्शॆय्दअंजऩ वण्णऩैप् पाडिप् पऱअशोदैदऩ् सिंगत्तैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

वे पाँचों पाण्डवों के दूत बनकर गए और भारत युद्ध लड़ा; वे उस सुंदर सरोवर में उतरे जहाँ विष उगलने वाला नाग पड़ा था, उसके फनों पर तब तक उछले जब तक वह भयभीत न हो गया, और फिर उस पर कृपा की। अंजन जैसे रंग वाले प्रभु का गुणगान करो और उछलो! यशोदा के सिंह का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

पंजवर् तूदऩाय्प्
पाँचों पाण्डवों के दूत बनकर
पारदम् कैशॆय्दु
भारत युद्ध लड़ते हुए
नंजु उमिऴ् नागम्
विष उगलने वाला नाग, कालिय
पणत्तिऩ्मेल् पाय्ंदिट्टु
उसके फनों पर उछलते हुए
अंजऩ वण्णऩैप्
अंजन जैसे रंग वाले प्रभु
अशोदैदऩ् सिंगत्तैप्
यशोदा के सिंह
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.6 · चार हज़ार में 312वाँ पाशुर

मुडि ऒऩ्ऱि मूवुलगंगळुम् आंडु उऩ्अडियेऱ्कु अरुळ् ऎऩ्ऱु अवऩ्बिऩ् तॊडर्ंदपडियिल् कुणत्तुप् परद नंबिक्कु अऩ्ऱुअडिनिलै ईंदाऩैप् पाडिप् पऱअयोत्तियर् कोमाऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

अनुपम गुणों वाले कुलीन भरत यह विनती करते हुए उनके पीछे गए, 'मुकुट धारण करो, तीनों लोकों पर राज करो, और मुझ अपने सेवक पर कृपा करो।' उस दिन उन्होंने बदले में भरत को अपनी पादुकाएँ दे दीं। उनका गुणगान करो और उछलो! अयोध्या के लोगों के राजा का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

मुडि ऒऩ्ऱि
मुकुट धारण करना
उऩ् अडियेऱ्कु अरुळ्
मुझ अपने सेवक पर कृपा करो
पडियिल् कुणत्तुप्
अनुपम गुणों वाले
परद नंबिक्कु
कुलीन भरत को
अडिनिलै ईंदाऩैप्
जिन्होंने अपनी पादुकाएँ दीं
अयोत्तियर् कोमाऩैप्
अयोध्या के लोगों के राजा
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.7 · चार हज़ार में 313वाँ पाशुर

काळियऩ् पॊय्गै कलंगप् पाय्ंदिट्टु अवऩ्नीळ्मुडि ऐंदिलुम् निऩ्ऱु नडम्जॆय्दुमीळ अवऩुक्कु अरुळ्शॆय्द वित्तगऩ्तोळ्-वलि वीरमे पाडिप् पऱतू मणिवण्णऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

वे कालिय के सरोवर में कूदे और उसे मथ डाला, नाग के पाँचों ऊँचे सिरों पर खड़े होकर नाचे, और फिर उस पर दोबारा कृपा की: ऐसे हैं वे ज्ञानी और अद्भुत प्रभु। उनके कंधों के बल और पराक्रम का गुणगान करो और उछलो! निर्मल नीलम जैसे रंग वाले प्रभु का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

काळियऩ् पॊय्गै कलंगप् पाय्ंदिट्टु
कालिय के सरोवर में कूदकर उसे मथना
नीळ्मुडि ऐंदिलुम्
पाँचों ऊँचे सिरों पर
नडम्जॆय्दु
नाचते हुए
मीळ अवऩुक्कु अरुळ्शॆय्द
जिन्होंने उस पर फिर कृपा की
वित्तगऩ्
ज्ञानी और अद्भुत प्रभु
तू मणिवण्णऩैप्
निर्मल नीलम जैसे रंग वाले प्रभु
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.8 · चार हज़ार में 314वाँ पाशुर

तार्क्कु इळंदंबिक्कु अरशु ईंदु तंडगम्नूऱ्ऱवळ् सॊऱ्कॊंडु पोगि नुडंगु- इडैच्सूर्प्पणगावैच् चॆवियॊडु मूक्कु अवळ्आर्क्क अरिंदाऩैप् पाडिप् पऱअयोत्तिक्कु अरशऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

उन्होंने राज्य अपने छोटे भाई को दे दिया, षड्यंत्र रचने वाली के कहने पर दण्डक वन गए, और लचकती कमर वाली शूर्पणखा के चीखते-चीखते उसके कान और नाक काट दिए। उनका गुणगान करो और उछलो! अयोध्या के राजा का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

इळंदंबिक्कु अरशु ईंदु
अपने छोटे भाई भरत को राज्य देकर
तंडगम्
दण्डक वन
नूऱ्ऱवळ् सॊऱ्कॊंडु
षड्यंत्र रचने वाली, कैकेयी के कहने पर
नुडंगु- इडैच् चूर्प्पणगावैच्
लचकती कमर वाली शूर्पणखा
सॆवियॊडु मूक्कु
कान और नाक
अयोत्तिक्कु अरशऩैप्
अयोध्या के राजा
इस पाशुर के बारे में श्री पादुका से पूछिए →

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.9 · चार हज़ार में 315वाँ पाशुर

मायच् चगडम् उदैत्तु मरुदु इऱुत्तुआयर्गळोडु पोय् आनिरै कात्तु अणिवेयिऩ् कुऴल् ऊदि वित्तगऩाय् निऩ्ऱआयर्गळ् एऱ्ऱिऩैप् पाडिप् पऱआनिरै मेय्त्ताऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

उन्होंने मायावी छकड़े को लात मारकर तोड़ डाला, जुड़वाँ मरुदु वृक्षों को तोड़ा, ग्वालों के साथ जाकर झुंडों की रखवाली की, और वहाँ खड़े होकर, वे अद्भुत प्रभु, अपनी सुंदर बाँस की बाँसुरी बजाते रहे। ग्वालों में उस बैल का गुणगान करो और उछलो! झुंड चराने वाले का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

मायच् चगडम् उदैत्तु
मायावी छकड़े को लात मारकर
मरुदु इऱुत्तु
मरुदु वृक्षों को तोड़कर
आनिरै कात्तु
झुंडों की रखवाली करते हुए
अणि वेयिऩ् कुऴल्
सुंदर बाँस की बाँसुरी
आयर्गळ् एऱ्ऱिऩैप्
ग्वालों में बैल
इस पाशुर के बारे में श्री पादुका से पूछिए →

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.10 · चार हज़ार में 316वाँ पाशुर

कारार् कडलै अडैत्तिट्टु इलंगै पुक्कुओरादाऩ् पॊऩ्मुडि ऒऩ्बदोडु ऒऩ्ऱैयुम्नेरा अवऩ्दंबिक्के नीळ् अरशु ईंदआरावमुदऩैप् पाडिप् पऱअयोत्तियर् वेंदऩैप् पाडिप् पऱ

अर्थ

उन्होंने काले समुद्र पर बाँध बाँधा, लंका में प्रवेश किया, और उस असावधान रावण के दसों स्वर्ण मुकुट काट गिराए; फिर रावण के ही भाई को चिरस्थायी राज्य दे दिया। जिनसे कभी जी नहीं भरता, उस अमृत का गुणगान करो और उछलो! अयोध्या के लोगों के राजा का गुणगान करो और उछलो!

शब्दशः

कारार् कडलै अडैत्तिट्टु
काले समुद्र पर बाँध बाँधकर
इलंगै पुक्कु
लंका में प्रवेश करके
ओरादाऩ्
असावधान रावण
पॊऩ्मुडि ऒऩ्बदोडु ऒऩ्ऱैयुम्
नौ स्वर्ण मुकुट और एक और, पूरे दस
अवऩ्दंबिक्के नीळ् अरशु ईंद
जिन्होंने उसके भाई विभीषण को चिरस्थायी राज्य दिया
आरावमुदऩैप्
वह अमृत जिससे कभी जी नहीं भरता
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.9.11 · चार हज़ार में 317वाँ पाशुर

नंदऩ् मदलैयैक् कागुत्त ऩैनविऩ्ऱुउंदि पऱंद ऒळियिऴै यार्गळ्शॊल्सॆंदमिऴ्त् तॆऩ्बुदु वैविट्टु सित्तऩ्जॊल्ऐंदिऩोडु ऐंदुम्वल् लार्क्कुअल्लल् इल्लैये

अर्थ

चमकते आभूषणों वाली कन्याओं ने उन्दि के खेल में उछलते हुए नन्द के नन्हे पुत्र का और काकुत्स्थ, राम का गुणगान किया। दक्षिणी पुदुवै के विट्टुचित्तन्, पेरियाळ्वार्, ने उनके वचन सुंदर तमिळ में लिख दिए। जो इन पाँच और पाँच पदों में पारंगत होंगे, उन्हें कोई दुख नहीं होगा।

शब्दशः

नंदऩ् मदलैयैक्
नन्द के नन्हे पुत्र, कृष्ण
कागुत्त ऩैनविऩ्ऱु
काकुत्स्थ, राम का गुणगान करते हुए
उंदि पऱंद
उन्दि के खेल में उछलते हुए
ऒळियिऴै यार्गळ्
चमकते आभूषणों वाली कन्याएँ
सॆंदमिऴ्त् तॆऩ्बुदु वैविट्टु सित्तऩ्जॊल्
दक्षिणी पुदुवै के विष्णुचित्त के सुंदर तमिळ वचन
ऐंदिऩोडु ऐंदुम्
ये पाँच और पाँच, दसों पद
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।