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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7

पत्तु 3 · दशक 3.7 · 11 पाशुर

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.1 · चार हज़ार में 286वाँ पाशुर

ऐय पुऴुदि उडंबु अळैंदु इवळ्पेच्चुम् अलंदलैयाय्च्सॆय्य नूलिऩ् सिऱ्ऱाडै सॆप्पऩ्उडुक्कवुम् वल्लळ् अल्लळ्कैयिऩिल् सिऱुदूदै योडु इवळ्मुऱ्ऱिल् पिरिंदुम् इलळ्पै अरवणैप् पळ्ळियाऩॊडुकैवैत्तु इवळ्वरुमे

अर्थ

(एक माँ अपनी नन्ही बेटी के बारे में कहती है।) हे सज्जनो, उसका सारा शरीर धूल से सना है, और उसकी बोली अब भी बच्चों जैसी तोतली है। वह अपना लाल धागे का छोटा वस्त्र भी ठीक से नहीं पहन पाती। उसके हाथ में खिलौने वाली छोटी हँडिया है, और उसने अभी अपनी खेल की टोकरी तक नहीं छोड़ी। और फिर भी वह फन वाले नाग की शय्या पर विश्राम करने वाले का हाथ थामे चली आती है!

शब्दशः

पुऴुदि उडंबु अळैंदु
उसका शरीर धूल से सना
पेच्चुम् अलंदलैयाय्च्
उसकी बोली अब भी उलझी हुई
सॆय्य नूलिऩ् सिऱ्ऱाडै
लाल धागे का छोटा वस्त्र
सिऱुदूदै
खिलौने वाली छोटी हँडिया
मुऱ्ऱिल् पिरिंदुम् इलळ्
अभी खेल की टोकरी नहीं छोड़ी
पै अरवणैप् पळ्ळियाऩॊडु
फन वाले नाग पर विश्राम करने वाले के साथ
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.2 · चार हज़ार में 287वाँ पाशुर

वायिऱ् पल्लुम् ऎऴुंदिल मयिरुम् मुडि कूडिऱ्ऱिलसाय्वु इलाद कुऱुंदलैच् चिलपिळ्ळैगळोडु इणंगिती इणक्कु इणंगु आडि वंदु इवळ्तऩ् अऩ्ऩ सॆम्मै सॊल्लिमायऩ् मा मणिवण्णऩ्मेल् इवळ्माल् उऱुगिऩ्ऱाळे

अर्थ

उसके सारे दाँत अभी निकले भी नहीं, और उसके बाल इतने लंबे भी नहीं हुए कि जूड़ा बँध सके। वह कुछ छोटे, डगमगाते बच्चों के साथ घुल-मिल जाती है, उनके नटखट खेलों में पड़ जाती है, और अपनी ही भलाई की बातें करती घर लौटती है। और वह बड़े नीलम जैसे रंग वाले अद्भुत प्रभु के प्रेम में पड़ती जा रही है!

शब्दशः

वायिऱ् पल्लुम् ऎऴुंदिल
उसके दाँत अभी नहीं निकले
मयि रुम् मुडि कूडिऱ्ऱिल
उसके बाल बाँधने लायक लंबे नहीं
सिल पिळ्ळैगळोडु इणंगि
कुछ बच्चों का साथ करना
ती इणक्कु
नटखट संगत, शरारत
मायऩ् मा मणिवण्णऩ्मेल्
बड़े नीलम जैसे रंग वाले अद्भुत प्रभु पर
माल् उऱुगिऩ्ऱाळे
वह प्रेम में पड़ रही है
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.3 · चार हज़ार में 288वाँ पाशुर

पॊंगु वॆण्मणल् कॊंडु सिऱ्ऱिलुम्मुऱ्ऱत्तु इऴैक्कलुऱिल्संगु सक्करम् तंडु वाळ् विल्लुम्अल्लदु इऴैक्कलुऱाळ्कॊंगै इऩ्ऩम् कुविंदु ऎऴुंदिलकोविंदऩोडु इवळैच्संगै यागि ऎऩ् उळ्ळम् नाळ्दॊऱुम्तट्टुळुप्पु आगिऩ्ऱदे

अर्थ

अगर वह आँगन में सफ़ेद रेत के ढेरों से नन्हे घरौंदे बनाने बैठती है, तो शंख, चक्र, गदा, खड्ग और धनुष के सिवा कुछ नहीं बनाती। वह अभी बड़ी भी नहीं हुई, फिर भी उसके और गोविन्द के बीच न जाने क्या हो, इस डर से मेरा हृदय हर दिन काँपता है।

शब्दशः

पॊंगु वॆण्मणल्
सफ़ेद रेत के ढेर
सिऱ्ऱिलुम्
नन्हे घरौंदे
संगु सक्करम् तंडु वाळ् विल्लुम्
शंख, चक्र, गदा, खड्ग और धनुष, उनके पाँच आयुध
संगै यागि
डरती हुई, संदेह करती हुई
तट्टुळुप्पु आगिऩ्ऱदे
घबराकर काँपता है
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.4 · चार हज़ार में 289वाँ पाशुर

एऴै पेदै ओर् पालगऩ् वंदु ऎऩ्पॆण्मगळै ऎळ्गितोऴिमार् पलर् कॊंडुबोय्च् चॆय्दसूऴ्च्चियै यार्क्कु उरैक्केऩ्आऴियाऩ् ऎऩ्ऩुम् आऴ मोऴैयिल्पाय्च्चि अगप्पडुत्तिमूऴै उप्पु अऱियादु ऎऩ्ऩुम्मूदुरैयुम् इलळे

अर्थ

एक सीधा-सादा, भोला-सा दिखने वाला लड़का आया और मेरी बेटी को छेड़ा, और उसकी कई सहेलियों की मदद से उसे ले गया। उन्होंने जो षड्यंत्र रचा, उसे मैं किससे कहूँ? उन्होंने उसे 'चक्रधारी प्रभु' नाम के गहरे कुंड में डुबो दिया और कसकर पकड़ लिया। अब तो वह पुरानी कहावत वाली उस कलछी जैसी भी नहीं रही, जो नमक तो चलाती है पर उसका स्वाद कभी नहीं जानती।

शब्दशः

एऴै पेदै ओर् पालगऩ्
एक सीधा-सादा, भोला-सा दिखने वाला लड़का
पॆण्मगळै ऎळ्गि
मेरी बेटी को छेड़ते हुए
सूऴ्च्चियै यार्क्कु उरैक्केऩ्
उनका षड्यंत्र मैं किससे कहूँ?
आऴियाऩ् ऎऩ्ऩुम् आऴ मोऴैयिल्
चक्रधारी प्रभु नाम के गहरे कुंड में
अगप्पडुत्ति
उसे कसकर पकड़ते हुए
मूऴै उप्पु अऱियादु
कलछी नमक का स्वाद नहीं जानती
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.5 · चार हज़ार में 290वाँ पाशुर

नाडुम् ऊरुम् अऱियवे पोय्नल्ल तुऴाय् अलंगल्सूडि नारणऩ् पोम् इडम् ऎल्लाम्सोदित्तु उऴिदर्गिऩ्ऱाळ्केडु वेंडुगिऩ्ऱार् पलर् उळर्केशवऩोडु इवळैप्पाडिगावल् इडुमिऩ् ऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱुपार् तडुमाऱिऩदे

अर्थ

सारे देश और नगर के देखते, वह तुलसी की सुंदर माला पहने, जहाँ-जहाँ नारायण जाते हैं, हर उस जगह उन्हें खोजती फिरती है। उसका बुरा चाहने वाले बहुत हैं। सारा संसार हड़बड़ी में है, बार-बार पुकार रहा है, 'उसके और केशव के बीच पहरा बिठाओ!'

शब्दशः

नाडुम् ऊरुम् अऱियवे
सारे देश और नगर को पता चले, ऐसे
नल्ल तुऴाय् अलंगल्
तुलसी की सुंदर माला
नारणऩ् पोम् इडम् ऎल्लाम्
हर वह जगह जहाँ नारायण जाते हैं
सोदित्तु उऴिदर्गिऩ्ऱाळ्
वह खोजती फिरती है
केडु वेंडुगिऩ्ऱार्
उसका बुरा चाहने वाले
पाडिगावल् इडुमिऩ्
पहरा बिठाओ
पार् तडुमाऱिऩदे
संसार हड़बड़ी में है
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.6 · चार हज़ार में 291वाँ पाशुर

पट्टम् कट्टिप् पॊऱ्ऱोडु पॆय्दु इवळ्पाडगमुम् सिलंबुम्इट्ट माग वळर्त्तु ऎडुत्तेऩुक्कुऎऩ्ऩोडु इरुक्कलुऱाळ्पॊट्टप् पोय्प् पुऱप्पट्टु निऩ्ऱु इवळ्पूवैप् पूवण्णा ऎऩ्ऩुम्वट्ट वार् कुऴल् मंगैमीर् इवळ्माल् उऱुगिऩ्ऱाळे

अर्थ

मैंने उसके माथे पर पट्टी बाँधी, कानों में सोने के बुंदे पहनाए, पायल और छनकते घुँघरू दिए, और पूरे प्यार से उसे पाला; फिर भी अब उसे मेरे साथ रहने की परवाह नहीं। अचानक वह बाहर निकल जाती है, वहाँ खड़ी होकर पुकारती है, 'हे काया फूल जैसे रंग वाले!' हे लंबी, घुँघराली चोटियों वाली स्त्रियो, वह उनके प्रेम में पड़ती जा रही है।

शब्दशः

पट्टम् कट्टिप्
माथे पर पट्टी बाँधकर
पॊऱ्ऱोडु
सोने के बुंदे
पाडगमुम् सिलंबुम्
पायल और छनकते घुँघरू
इट्ट माग वळर्त्तु
उसे प्यार से पालकर
पूवैप् पूवण्णा
हे काया फूल जैसे रंग वाले
माल् उऱुगिऩ्ऱाळे
वह प्रेम में पड़ रही है
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.7 · चार हज़ार में 292वाँ पाशुर

पेशवुम् तरियाद पॆण्मैयिऩ्पेदैयेऩ् पेदै इवळ्कूशमिऩ्ऱि निऩ्ऱार्गळ् तम् ऎदिर्कोल् कऴिंदाऩ् मूऴैयाय्केशवा ऎऩ्ऱुम् केडिली ऎऩ्ऱुम्किंजुग वाय् मॊऴियाळ्वाश वार्गुऴल् मंगैमीर् इवळ्माल् उऱुगिऩ्ऱाळे

अर्थ

मैं स्त्री की लाज से इतनी बँधी हूँ कि ऐसी बातें कहना भी सह नहीं पाती; फिर भी मेरी भोली बेटी, बिना किसी झिझक के, सबके सामने उस कलछी की तरह खड़ी है जिसका हत्था टूट गया हो, किसी के वश में नहीं, और किंशुक फूल जैसे लाल अधरों से पुकारती है, 'केशव!' और 'हे निर्दोष!' हे लंबी सुगंधित चोटियों वाली स्त्रियो, वह उनके प्रेम में पड़ती जा रही है।

शब्दशः

पेशवुम् तरियाद पॆण्मैयिऩ्
स्त्री की लाज जो कहना भी सह न सके
कूशमिऩ्ऱि
बिना झिझक
कोल् कऴिंदाऩ् मूऴैयाय्
हत्था टूटी कलछी की तरह
केडिली
हे निर्दोष
किंजुग वाय् मॊऴियाळ्
वह जिसके अधर किंशुक फूल जैसे लाल हैं
वाश वार्गुऴल् मंगैमीर्
हे लंबी सुगंधित चोटियों वाली स्त्रियो
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.8 · चार हज़ार में 293वाँ पाशुर

काऱै पूणुम् कण्णाडि काणुम् तऩ्कैयिल् वळै कुलुक्कुम्कूऱै उडुक्कुम् अयर्क्कुम् तऩ्कॊव्वैच् चॆव्वाय् तिरुत्तुम्तेऱित् तेऱि निऩ्ऱु आयिरम् पेर्त्तेवऩ् तिऱम् पिदऱ्ऱुम्माऱिल् मा मणिवण्णऩ्मेल् इवळ्माल् उऱुगिऩ्ऱाळे

अर्थ

वह अपना हार पहनती है, दर्पण में देखती है, कलाई की चूड़ियाँ खनकाती है, साड़ी पहनती है, मूर्छित-सी हो जाती है, फिर कोव्वै फल जैसे लाल अपने अधर सँवारती है। बार-बार खुद को सँभालकर वह खड़ी होती है और हज़ार नामों वाले भगवान की महिमा बड़बड़ाती है। वह बड़े नीलम जैसे रंग वाले अनुपम प्रभु के प्रेम में पड़ती जा रही है।

शब्दशः

काऱै पूणुम्
अपना हार पहनती है
कण्णाडि काणुम्
दर्पण में देखती है
अयर्क्कुम्
मूर्छित-सी हो जाती है
कॊव्वैच् चॆव्वाय् तिरुत्तुम्
कोव्वै फल जैसे लाल अधर सँवारती है
तेऱित् तेऱि निऩ्ऱु
बार-बार खुद को सँभालकर
आयिरम् पेर्त् तेवऩ् तिऱम् पिदऱ्ऱुम्
हज़ार नामों वाले भगवान की महिमा बड़बड़ाती है
माऱिल् मा मणिवण्णऩ्मेल्
अनुपम, बड़े नीलम जैसे रंग वाले प्रभु पर
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.9 · चार हज़ार में 294वाँ पाशुर

कैत्तलत्तु उळ्ळ माडु अऴियक्कण्णालंगळ् सॆय्दु इवळै-वैत्तु वैत्तुक्कॊंडु ऎऩ्ऩ वाणिबम्?नम्मै वडुप्पडुत्तुम्-सॆय्त्तलै ऎऴु नाऱ्ऱुप् पोल् अवऩ्सॆय्वऩ सॆय्दुगॊळ्ळमैत् तडमुगिल् वण्णऩ् पक्कल्वळर विडुमिऩ्गळे

अर्थ

अपने हाथ का धन विवाहों में क्यों उड़ाएँ, और उसे यहाँ रोक-रोककर क्यों रखें? उसमें क्या लाभ है? वह तो बस हमें लज्जित करेगी। उनके अपने खेत में उगती पौध की तरह, वे उसके साथ जो चाहें करें। उसे बड़े काले बादल जैसे रंग वाले प्रभु के पास पलने-बढ़ने भेज दो।

शब्दशः

कैत्तलत्तु उळ्ळ माडु अऴियक्
अपने हाथ का धन उड़ाना
कण्णालंगळ् सॆय्दु
विवाह रचाना
ऎऩ्ऩ वाणिबम्
क्या लाभ है?
वडुप्पडुत्तुम्
हमें लज्जित करेगी
सॆय्त्तलै ऎऴु नाऱ्ऱुप् पोल्
खेत में उगती पौध की तरह
मैत् तडमुगिल् वण्णऩ्
बड़े काले बादल जैसे रंग वाले प्रभु
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.10 · चार हज़ार में 295वाँ पाशुर

पॆरुप् पॆरुत्त कण्णालंगळ् सॆय्दुपेणि नम् इल्लत्तुळ्ळेइरुत्तुवाऩ् ऎण्णि नाम् इरुक्कइवळुम् ऒऩ्ऱु ऎण्णुगिऩ्ऱाळ्मरुत्तुवप् पदम् नींगिऩाळ् ऎऩ्ऩुम्वार्त्तै पडुवदऩ्मुऩ्ऒरुप्पडुत्तु इडुमिऩ् इवळैउलगळंदाऩ् इडैक्के

अर्थ

हमने सोचा था कि बड़े-बड़े धूमधाम वाले विवाह रचाकर उसे प्यार से यहाँ अपने ही घर में रखेंगे, पर उसका अपना ही कुछ विचार है। इससे पहले कि यह बात फैले कि उस पर अब कोई दवा असर नहीं करती, उसे तैयार करके उनके पास भेज दो जिन्होंने लोकों को नापा।

शब्दशः

पॆरुप् पॆरुत्त कण्णालंगळ्
बड़े-बड़े धूमधाम वाले विवाह
नम् इल्लत्तुळ्ळे इरुत्तुवाऩ्
उसे अपने ही घर में रखना
इवळुम् ऒऩ्ऱु ऎण्णुगिऩ्ऱाळ्
उसका अपना ही विचार है
मरुत्तुवप् पदम् नींगिऩाळ्
उस पर अब कोई दवा असर नहीं करती
ऒरुप्पडुत्तु इडुमिऩ्
उसे तैयार करके भेज दो
उलगळंदाऩ् इडैक्के
उनके पास जिन्होंने लोकों को नापा
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 3.7.11 · चार हज़ार में 296वाँ पाशुर

ञालम् मुऱ्ऱुम् उंडु आलिलैत् तुयिल्नारायणऩुक्कु इवळ्मालदागि मगिऴ्ंदऩळ् ऎऩ्ऱुताय् उरै सॆय्ददऩैकोलम् आर् पॊऴिल् सूऴ् पुदुवैयर्गोऩ्विट्टुशित्तऩ् सॊऩ्ऩमालै पत्तुम् वल्लवर्गट्कुइल्लै वरु तुयरे

अर्थ

नारायण ने सारा संसार निगल लिया और वटपत्र पर सोते हैं। एक माँ ने बताया कि कैसे उसकी बेटी उनके प्रेम में पड़ी और आनंदित हुई, और सुंदर उपवनों से घिरे पुदुवै के लोगों के स्वामी विट्टुचित्तन्, पेरियाळ्वार्, ने उसे शब्दों में ढाला। जो इस दस की माला में पारंगत होंगे, उन्हें कोई दुख नहीं आएगा।

शब्दशः

ञालम् मुऱ्ऱुम् उंडु
सारा संसार निगलकर
आलिलैत् तुयिल्
वटपत्र पर सोते हुए
मालदागि मगिऴ्ंदऩळ्
प्रेम में पड़ी और आनंदित हुई
ताय् उरै सॆय्ददऩै
माँ ने जो कहा
कोलम् आर् पॊऴिल् सूऴ् पुदुवैयर्गोऩ्
सुंदर उपवनों से घिरे पुदुवै के स्वामी
इल्लै वरु तुयरे
कोई दुख नहीं आएगा
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।