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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुवाय्मोळि 8.1

पत्तु 8 · दशक 8.1 · 11 पाशुर

तिरुवाय्मोळि 8.1.1 · चार हज़ार में 3563वाँ पाशुर

तेविमार् आवार् तिरुमगळ् पूमिएव मऱ्ऱु अमरर् आट्चॆय्वार्मेविय उलगम् मूऩ्ऱु अवै आट्चिवेंडु वेंडु उरुवम् निऩ् उरुवम्पावियेऩ् तऩ्ऩै अडुगिऩ्ऱ कमलक्कण्णदु ओर् पवळ वाय् मणियेआविये अमुदे अलै कडल् कडैंदअप्पऩे काणुमाऱु अरुळाय्

अर्थ

श्री (लक्ष्मी) और भूमि तुम्हारी पत्नियाँ हैं; अमर तुम्हारे वचन पर सेवा करते हैं; तीनों लोक तुम्हारे शासन में हैं; तुम जो भी रूप लेना चाहो, वही तुम्हारा रूप बन जाता है। हे अनुपम रत्न, मूँगे जैसे अधरों और कमल-नेत्रों वाले, जो मुझ पापी को सताते हैं! मेरे प्राण, मेरे अमृत, लहरों से उछलते सागर को मथने वाले मेरे पिता, मुझ पर कृपा करो कि मैं तुम्हें देख सकूँ।

शब्दशः

तेविमार् आवार्
जो तुम्हारी पत्नियाँ हैं
तिरुमगळ् पूमि
श्री (लक्ष्मी) और भूमि, पृथ्वी
अमरर् आट्चॆय्वार्
अमर तुम्हारी सेवा करते हैं
वेंडु वेंडु उरुवम् निऩ् उरुवम्
तुम जो भी रूप चाहो, वह तुम्हारा रूप बन जाता है
पावियेऩ् तऩ्ऩै अडुगिऩ्ऱ
जो मुझ पापी को सताते हैं
पवळ वाय् मणिये
मूँगे जैसे अधरों वाले रत्न
काणुमाऱु अरुळाय्
मुझ पर कृपा करो कि मैं तुम्हें देखूँ
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तिरुवाय्मोळि 8.1.2 · चार हज़ार में 3564वाँ पाशुर

काणुमाऱु अरुळाय् ऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱे कलंगिकण्ण नीर् अलमर विऩैयेऩ्पेणुमाऱु ऎल्लाम् पेणि निऩ् पॆयरेपिदऱ्ऱुमाऱु अरुळ् ऎऩक्कु अंदोकाणुमाऱु अरुळाय् कागुत्ता कण्णातॊंडऩेऩ् कऱ्पगक् कऩियेपेणुवार् अमुदे पॆरिय तण् पुऩल् सूऴ्पॆरु निलम् ऎडुत्त पेराळा

अर्थ

"मुझे तुम्हें देखने दो," मैं पापी बार-बार पुकारता हूँ, काँपता हुआ, आँखों में आँसू तैरते हुए। हाय, मुझे यह कृपा दो: कि मैं हर सम्भव ढंग से तुम्हें सँजोऊँ, और केवल तुम्हारे ही नाम बड़बड़ाता रहूँ। मुझे तुम्हें देखने दो, हे काकुत्स्थ (राम), हे कण्णा, मुझ दास के कल्पवृक्ष के फल, तुम्हें सँजोने वालों के अमृत, महान शीतल जल से घिरी विशाल पृथ्वी को ऊपर उठाने वाले महान प्रभु!

शब्दशः

कण्ण नीर् अलमर
आँसू उमड़कर आँखों में तैरते हुए
निऩ् पॆयरे
केवल तुम्हारे नाम
पिदऱ्ऱुमाऱु अरुळ्
कृपा करो कि मैं उन्हें बड़बड़ाता रहूँ
कागुत्ता
काकुत्स्थ, काकुत्स्थ वंश के राम
कऱ्पगक् कऩिये
कल्पवृक्ष का फल
पेणुवार् अमुदे
तुम्हें सँजोने वालों के लिए अमृत
पॆरु निलम् ऎडुत्त पेराळा
पृथ्वी को उठाने वाले महान प्रभु (वराह के रूप में)
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तिरुवाय्मोळि 8.1.3 · चार हज़ार में 3565वाँ पाशुर

ऎडुत्त पेराळऩ् नंदगोबऩ् तऩ्इऩ् उयिर्च् चिऱुवऩे अशोदैक्कुअडुत्त पेरिऩ्बक् कुल इळम् कळिऱेअडियऩेऩ् पॆरिय अम्माऩेकडुत्त पोर् अवुणऩ् उडल् इरु पिळवाक्कैउगिर् आंड ऎम् कडलेअडुत्तदु ओर् उरुवाय् इऩ्ऱु नी वाराय्ऎङ्ङऩम् तेऱुवर् उमरे?

अर्थ

पृथ्वी को उठाने वाले महान प्रभु! नन्दगोप के प्राणों जैसे प्यारे नन्हे पुत्र! यशोदा को महान आनन्द देने वाले, श्रेष्ठ कुल के बाल-गज! मुझ दास के महान प्रभु! मेरे सागर, जिनके हाथों के नखों ने उग्र, युद्धरत असुर के शरीर को दो टुकड़ों में चीर दिया! यदि तुम आज किसी ऐसे रूप में नहीं आते जिस तक हम पहुँच सकें, तो तुम्हारे अपने जन कैसे धीरज धरेंगे?

शब्दशः

इऩ् उयिर्च् चिऱुवऩे
प्राणों जैसा प्यारा नन्हा पुत्र
कुल इळम् कळिऱे
श्रेष्ठ कुल का बाल-गज
अवुणऩ् उडल् इरु पिळवाक्
असुर (हिरण्य) के शरीर को दो टुकड़ों में चीरते हुए
कैउगिर्
नरसिंह के रूप में तुम्हारे हाथों के नख
ऎम् कडले
मेरा सागर, श्यामल और असीम
अडुत्तदु ओर् उरुवाय्
ऐसे रूप में जिस तक हम पहुँच सकें
ऎङ्ङऩम् तेऱुवर् उमरे
तुम्हारे जन कैसे धीरज धरेंगे?
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तिरुवाय्मोळि 8.1.4 · चार हज़ार में 3566वाँ पाशुर

उमर् उगंदु उगंद उरुवम् निऩ् उरुवम्आगि उऩ् तऩक्कु अऩ्बर् आऩार्अवर् उगंदु अमर्ंद सॆय्गै उऩ् मायैअऱिवु ऒऩ्ऱुम् संगिप्पऩ् विऩैयेऩ्अमर् अदु पण्णि अगल् इडम् पुडैशूऴ्अडु पडै अवित्त अम्माऩेअमरर् तम् अमुदे अशुरर्गळ् नंजेऎऩ्ऩुडै आर् उयिरेयो

अर्थ

तुम्हारे जन जिस रूप से बार-बार प्रेम करते हैं, वही तुम्हारा रूप बन जाता है, और इस तरह वे तुम्हारे प्रेमी बन जाते हैं; और जिस प्रकार वे वहाँ आनन्द में विश्राम करते हैं, क्या वह तुम्हारी अद्भुत लीला है? मैं पापी, जो कुछ भी जानूँ, सन्देह में ही रह जाता हूँ। हे प्रभु, जिन्होंने युद्ध करके विशाल पृथ्वी को ढकने वाली संहारक सेनाओं का नाश किया! अमरों के अमृत, असुरों के विष, हे मेरे अपने प्यारे प्राण!

शब्दशः

उमर् उगंदु उगंद उरुवम्
वह रूप जिसमें तुम्हारे जन बार-बार आनन्द पाते हैं
अऩ्बर् आऩार्
तुम्हारे प्रेमी बन गए
उऩ् मायै
तुम्हारी अद्भुत लीला
संगिप्पऩ्
मुझे सन्देह है
अडु पडै अवित्त
संहारक सेनाओं का नाश किया
अशुरर्गळ् नंजे
असुरों के लिए विष
ऎऩ्ऩुडै आर् उयिरेयो
हे मेरे अपने प्यारे प्राण
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तिरुवाय्मोळि 8.1.5 · चार हज़ार में 3567वाँ पाशुर

आर् उयिरेयो अगल् इडम् मुऴुदुम्पडैत्तु इडंदु उंडु उमिऴ्ंदु अळंदपेर् उयिरेयो पॆरिय नीर् पडैत्तु अंगुउऱैंदु अदु कडैंदु अडैत्तु उडैत्तसीर् उयिरेयो मऩिशर्क्कुत् तेवर्पोलत् तेवर्क्कुम् तेवावोओर् उयिरेयो उलगंगट्कु ऎल्लाम्!उऩ्ऩै नाऩ् ऎंगु वंदु उऱुगो?

अर्थ

हे प्यारे प्राण! हे महान प्राण, जिन्होंने सारी विशाल पृथ्वी को रचा, उसे गहराई से खोदकर निकाला, निगल लिया, फिर बाहर निकाला और नाप लिया! हे गौरवशाली प्राण, जिन्होंने महान जल बनाए, उनमें शयन किया, उन्हें मथा, उन पर सेतु बाँधा और सेतु तोड़ भी दिया! देवों के भी देव, जैसे मनुष्यों के लिए देव होते हैं! सारे लोकों के एक प्राण! मैं कहाँ आकर तुम तक पहुँचूँ?

शब्दशः

पडैत्तु इडंदु उंडु उमिऴ्ंदु अळंद
रचा, खोदकर निकाला, निगला, बाहर निकाला और नापा
पॆरिय नीर् पडैत्तु
महान जल बनाए
कडैंदु अडैत्तु उडैत्त
मथा, सेतु बाँधा और सेतु तोड़ा
तेवर्क्कुम् तेवावो
हे देवों के भी देव
ओर् उयिरेयो
हे एक प्राण
ऎंगु वंदु उऱुगो
मैं कहाँ आकर तुम तक पहुँचूँ?
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तिरुवाय्मोळि 8.1.6 · चार हज़ार में 3568वाँ पाशुर

ऎंगु वंदु उऱुगो ऎऩ्ऩै आळ्वाऩे?एऴ् उलगंगळुम् नीयेअंगु अवर्क्कु अमैत्त तॆय्वमुम् नीयेअवऱ्ऱु अवै करुममुम् नीयेपॊंगिय पुऱंबाल् पॊरुळ् उळवेलुम्अवैयुमो नी इऩ्ऩे आऩाल्मंगिय अऱिवाम् नेर्प्पमुम् नीयेवाऩ् पुलऩ् इऱंददुम् नीये

अर्थ

मैं कहाँ आकर तुम तक पहुँचूँ, तुम जो मुझ पर शासन करते हो? सातों लोक तुम हो; वहाँ रहने वालों के लिए नियुक्त देवता तुम हो; जिन कर्मों से वे उपासना करते हैं, वे तुम हो। इन सबसे बाहर उमड़ती हुई यदि कुछ परे की वस्तुएँ भी हों, तो वे भी तुम हो। वे सूक्ष्म वस्तुएँ जिनमें चेतना धुँधली पड़ी है, तुम हो; और जो इन्द्रियों की पहुँच से बहुत परे है, वह भी तुम हो।

शब्दशः

ऎऩ्ऩै आळ्वाऩे
तुम जो मुझ पर शासन करते हो
एऴ् उलगंगळुम् नीये
सातों लोक तुम हो
अमैत्त तॆय्वमुम्
तुम्हारे नियुक्त देवता
करुममुम् नीये
उनके कर्म भी तुम हो
पुऱंबाल् पॊरुळ्
परे की, बाहर की वस्तुएँ
मंगिय अऱिवाम् नेर्प्पमुम्
वे सूक्ष्म वस्तुएँ जिनमें चेतना धुँधली पड़ी है
पुलऩ् इऱंददुम्
जो इन्द्रियों से परे है
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तिरुवाय्मोळि 8.1.7 · चार हज़ार में 3569वाँ पाशुर

इऱंददुम् नीये ऎदिर्ंददुम् नीयेनिगऴ्वदो नी इऩ्ऩे आऩाल्सिऱंद निऩ् तऩ्मै अदु इदु उदु ऎऩ्ऱुअऱिवु ऒऩ्ऱुम् संगिप्पऩ् विऩैयेऩ्कऱंद पाल् नॆय्ये नॆय्यिऩ् इऩ् सुवैयेकडलिऩुळ् अमुदमे अमुदिल्पिऱंद इऩ् सुवैये सुवैयदु पयऩेपिऩ्ऩै तोळ् मणंद पेर् आया

अर्थ

जो बीत गया वह तुम हो, जो आने वाला है वह तुम हो, और जो अभी हो रहा है वह तुम हो। ऐसा होते हुए, मैं पापी, जो कुछ भी जानूँ, सन्देह में ही रह जाता हूँ कि तुम्हारा उत्तम स्वभाव यह है, या वह, या कुछ और। ताज़े दुहे दूध के घी, उस घी के मधुर स्वाद! सागर के भीतर के अमृत, उस अमृत से जन्मे मधुर स्वाद, और उस स्वाद से मिलने वाले आनन्द! पिन्नै के कन्धों का आलिंगन करने वाले महान ग्वाले!

शब्दशः

इऱंददुम् नीये
जो बीत गया वह तुम हो
ऎदिर्ंददुम् नीये
जो आने वाला है वह तुम हो
अदु इदु उदु
यह, वह, या कुछ और
कऱंद पाल् नॆय्ये
ताज़े दुहे दूध का घी
सुवैयदु पयऩे
उस स्वाद से मिलने वाला आनन्द
पिऩ्ऩै तोळ् मणंद
जिन्होंने नप्पिन्नै के कन्धों का आलिंगन किया
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तिरुवाय्मोळि 8.1.8 · चार हज़ार में 3570वाँ पाशुर

मणंद पेर् आया मायत्ताल् मुऴुदुम्वल्विऩैयेऩै ईर्गिऩ्ऱकुणंगळै उडैयाय् अशुरर् वऩ् कैयर्कूऱ्ऱमे कॊडिय पुळ् उयर्त्ताय्पणंगळ् आयिरमुम् उडैय पैन् नागप्पळ्ळियाय् पाऱ्कडल् सेर्प्पावणंगुमाऱु अऱियेऩ् मऩमुम् वाशगमुम्सॆय्गैयुम् याऩुम् नी ताऩे

अर्थ

पिन्नै का आलिंगन करने वाले महान ग्वाले! तुम्हारे गुण अपने आश्चर्य से मुझ महापापी को पूरी तरह चीर डालते हैं। बलवान हाथों वाले असुरों की मृत्यु! उग्र पक्षी गरुड को अपनी ध्वजा पर फहराने वाले! सहस्र फणों वाले नवीन सर्प पर शयन करने वाले, क्षीरसागर के वासी! मैं नहीं जानता कि तुम्हारी उपासना कैसे करूँ, क्योंकि मेरा मन, मेरी वाणी, मेरे कर्म और स्वयं मैं, सब तुम ही हो।

शब्दशः

ईर्गिऩ्ऱ कुणंगळै
मुझे चीर डालने वाले गुण
अशुरर् वऩ् कैयर् कूऱ्ऱमे
बलवान हाथों वाले असुरों की मृत्यु
कॊडिय पुळ् उयर्त्ताय्
जिन्होंने उग्र पक्षी (गरुड) को ध्वजा पर फहराया
पणंगळ् आयिरमुम्
सहस्रों फण
पाऱ्कडल् सेर्प्पा
क्षीरसागर के तट पर रहने वाले
वणंगुमाऱु अऱियेऩ्
मैं नहीं जानता कि उपासना कैसे करूँ
याऩुम् नी ताऩे
मैं भी तुम हूँ
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तिरुवाय्मोळि 8.1.9 · चार हज़ार में 3571वाँ पाशुर

याऩुम् नी ताऩे आवदो मॆय्येअरु नरगु अवैयुम् नी आऩाल्वाऩ् उयर् इऩ्बम् ऎय्दिल् ऎऩ्? मऱ्ऱैनरगमे ऎय्दिल् ऎऩ्? ऎऩिऩुम्याऩुम् नी ताऩाय्त् तॆळिदॊऱुम् नऩ्ऱुम्अंजुवऩ् नरगम् नाऩ् अडैदल्वाऩ् उयर् इऩ्बम् मऩ्ऩि वीऱ्ऱिरुंदाय्!अरुळु निऩ् ताळ्गळै ऎऩक्के

अर्थ

यदि यह सच है कि मैं भी तुम हूँ, और क्रूर नरक भी तुम हो, तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि मैं स्वर्ग के ऊँचे आनन्द तक पहुँचूँ या नरक तक? फिर भी, हर बार जब मैं स्पष्ट देखता हूँ कि मैं भी तुम हूँ, मुझे नरक जाने से गहरा भय होता है। स्वर्ग के ऊँचे परमानन्द में स्थित होकर सिंहासन पर विराजने वाले, अपने चरण मुझे दो, केवल मुझे।

शब्दशः

आवदो मॆय्ये
क्या यह सच हो सकता है?
अरु नरगु
क्रूर, कठोर नरक
वाऩ् उयर् इऩ्बम्
स्वर्ग का ऊँचा आनन्द
तॆळिदॊऱुम्
हर बार जब मैं इसे स्पष्ट देखता हूँ
अंजुवऩ्
मुझे भय होता है
मऩ्ऩि वीऱ्ऱिरुंदाय्
तुम जो सदा सिंहासन पर विराजते हो
अरुळु निऩ् ताळ्गळै ऎऩक्के
अपने चरण केवल मुझे दो
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तिरुवाय्मोळि 8.1.10 · चार हज़ार में 3572वाँ पाशुर

ताळ्गळै ऎऩक्के तलैत्तलैच् चिऱप्पत्तंद पेर् उदविक् कैम्माऱात्तोळ्गळै आरत् तऴुवि ऎऩ् उयिरैअऱ विलै सॆय्दऩऩ् सोदीतोळ्गळ् आयिरत्ताय् मुडिगळ् आयिरत्ताय्तुणैमलर्क् कण्गळ् आयिरत्ताय्ताळ्गळ् आयिरत्ताय् पेर्गळ् आयिरत्ताय्तमियऩेऩ् पॆरिय अप्पऩे

अर्थ

हर बार और अधिक अद्भुत ढंग से अपने चरण मुझे देने के उस महान उपकार के लिए, मैंने तुम्हारे कन्धों को पूरे आलिंगन में थाम लिया और बदले में अपनी आत्मा ही पूरी की पूरी दे डाली, हे दीप्तिमान! सहस्र कन्धों, सहस्र मुकुटों, सहस्र जोड़ी पुष्प-नेत्रों, सहस्र चरणों और सहस्र नामों वाले, मेरे महान पिता, मेरे जिसका और कोई नहीं!

शब्दशः

तलैत्तलैच् चिऱप्प
हर बार और अधिक अद्भुत ढंग से
पेर् उदविक् कैम्माऱा
महान उपकार के बदले में
अऱ विलै सॆय्दऩऩ्
मैंने मूल्य के रूप में पूरी की पूरी दे डाली
सोदी
हे दीप्तिमान
तुणैमलर्क् कण्गळ्
जोड़ी पुष्प-जैसे नेत्र
तमियऩेऩ्
मैं जो अकेला हूँ, जिसका और कोई नहीं
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तिरुवाय्मोळि 8.1.11 · चार हज़ार में 3573वाँ पाशुर

पॆरिय अप्पऩै पिरमऩ् अप्पऩैउरुत्तिरऩ् अप्पऩै मुऩिवर्क्कुउरिय अप्पऩै अमरर् अप्पऩैउलगुक्कु ओर् तऩि अप्पऩ् तऩ्ऩैपॆरिय वण् कुरुगूर् वण् सडगोबऩ्पेणिऩ आयिरत्तुळ्ळुम्उरिय सॊल् मालै इवैयुम् पत्तु इवऱ्ऱाल्उय्यलाम् तॊंडीर्! नंगट्के

अर्थ

उन महान पिता पर, जो ब्रह्मा के पिता, रुद्र के पिता, मुनियों के अपने पिता, अमरों के पिता और सारे जगत के एक अनुपम पिता हैं, महान और समृद्ध कुरुगूर् के शठकोपन् (नम्माळ्वार्) ने प्रेम से सहस्र पाशुर गाए। इनमें से ये दस उचित शब्दों की माला हैं। हे प्रभु के दासो, इनके द्वारा हम उद्धार पा सकते हैं।

शब्दशः

पिरमऩ् अप्पऩै
ब्रह्मा के पिता
उरुत्तिरऩ् अप्पऩै
रुद्र (शिव) के पिता
उलगुक्कु ओर् तऩि अप्पऩ्
जगत के एक अनुपम पिता
वण् कुरुगूर्
समृद्ध तिरुक्कुरुगूर्
उरिय सॊल् मालै
उचित शब्दों की माला
उय्यलाम् तॊंडीर्
हे दासो, हम उद्धार पा सकते हैं
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।