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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुवाय्मोळि 7.4

पत्तु 7 · दशक 7.4 · 11 पाशुर

तिरुवाय्मोळि 7.4.1 · चार हज़ार में 3486वाँ पाशुर

आऴि ऎऴ संगुम् विल्लुम् ऎऴ तिशैवाऴि ऎऴ तंडुम् वाळुम् ऎऴ अंडम्मोऴै ऎऴ मुडि पादम् ऎऴ अप्पऩ्ऊऴि ऎऴ उलगम् कॊंडवाऱे

अर्थ

(आळ्वार् प्रभु के महान कर्मों को ऐसे देखते हैं मानो वे उनके सामने हो रहे हों।) चक्र ऊपर उठा; शंख और धनुष ऊपर उठे; हर दिशा से "वे चिरंजीवी हों!" की पुकार उठी; गदा और खड्ग ऊपर उठे; ब्रह्माण्ड का कवच भिद गया; उनका मुकुट और उनका चरण ऊँचे उठे। इस प्रकार मेरे पिता बढ़े और लोकों को ले लिया!

शब्दशः

आऴि ऎऴ
चक्र का ऊपर उठना
तिशै वाऴि ऎऴ
हर ओर 'वे चिरंजीवी हों!' की पुकार उठती
तंडुम् वाळुम्
गदा और खड्ग
अंडम्
ब्रह्माण्ड का कवच
मोऴै ऎऴ
भिदकर खुलता हुआ
मुडि पादम् ऎऴ
मुकुट और चरण ऊँचे उठते
उलगम् कॊंडवाऱे
इस प्रकार उन्होंने लोक लिए
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तिरुवाय्मोळि 7.4.2 · चार हज़ार में 3487वाँ पाशुर

आऱु मलैक्कु ऎदिर्ंदु ओडुम् ऒलि अरवुऊऱु सुलाय् मलै तेय्क्कुम् ऒलि कडल्माऱु सुऴऩ्ऱु अऴैक्किऩ्ऱ ऒलि अप्पऩ्साऱुबड अमुदम् कॊंड नाऩ्ऱे

अर्थ

पर्वत की ओर उलटी बहती नदियों का गर्जन था; उसके चारों ओर लिपटे, घूमते हुए पर्वत को घिसते सर्प का गर्जन था; इधर-उधर घूमते और पुकारते सागर का गर्जन था। ऐसा था वह दिन जब मेरे पिता ने सागर मथा और उसके सार के रूप में अमृत निकाला!

शब्दशः

आऱु मलैक्कु ऎदिर्ंदु ओडुम् ऒलि
पर्वत की ओर उलटी बहती नदियों का गर्जन
अरवु
सर्प (वासुकि)
सुलाय् मलै तेय्क्कुम् ऒलि
लिपटते हुए पर्वत को घिसने का गर्जन
माऱु सुऴऩ्ऱु अऴैक्किऩ्ऱ ऒलि
घूमते और पुकारते सागर का गर्जन
साऱुबड अमुदम् कॊंड
उसके सार के रूप में अमृत निकाला
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तिरुवाय्मोळि 7.4.3 · चार हज़ार में 3488वाँ पाशुर

नाऩ्ऱिल एऴ् मण्णुम् ताऩत्तवे पिऩ्ऩुम्नाऩ्ऱिल एऴ् मलै ताऩत्तवे पिऩ्ऩुम्नाऩ्ऱिल एऴ् कडल् ताऩत्तवे अप्पऩ्ऊऩ्ऱि इडंदु ऎयिऱ्ऱिल् कॊंड नाळे

अर्थ

सातों लोकों में से एक भी नहीं झुका; सब अपने स्थानों पर बने रहे। सातों पर्वतों में से एक भी नहीं झुका; वे अपने स्थानों पर बने रहे। सातों सागरों में से एक भी नहीं छलका; वे अपने स्थानों पर बने रहे। ऐसा था वह दिन जब मेरे पिता ने वराह बनकर अपने पाँव दृढ़ता से जमाए, धरती खोद निकाली और उसे अपने दाँत पर धारण किया!

शब्दशः

नाऩ्ऱिल एऴ् मण्णुम्
सातों लोक नहीं झुके
ताऩत्तवे
अपने स्थानों पर बने रहे
एऴ् मलै
सातों पर्वत
एऴ् कडल्
सातों सागर
ऊऩ्ऱि इडंदु
पाँव दृढ़ता से जमाकर खोदते हुए
ऎयिऱ्ऱिल् कॊंड नाळे
वह दिन जब उन्होंने उसे अपने दाँत पर धारण किया
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तिरुवाय्मोळि 7.4.4 · चार हज़ार में 3489वाँ पाशुर

नाळुम् ऎऴ निलम् नीरुम् ऎऴ विण्णुम्कोळुम् ऎऴ ऎरि कालुम् ऎऴ मलैताळुम् ऎऴ सुडर् ताऩुम् ऎऴ अप्पऩ्ऊळि ऎऴ उलगम् उंड ऊणे

अर्थ

दिन ऊपर उठे; धरती और जल ऊपर उठे; आकाश और ग्रह ऊपर उठे; अग्नि और वायु ऊपर उठे; पर्वत जड़ समेत उठे; चमकता सूर्य स्वयं ऊपर उठा, और सब उनके भीतर चले गए, जब प्रलय के समय मेरे पिता ने लोक निगल लिए। ऐसा था उनका भोजन!

शब्दशः

नाळुम् ऎऴ
दिनों का ऊपर उठना
विण्णुम् कोळुम्
आकाश और ग्रह
ऎरि कालुम्
अग्नि और वायु
मलै ताळुम् ऎऴ
जड़ समेत उठते पर्वत
ऊळि ऎऴ
जब प्रलय उठा
उलगम् उंड ऊणे
वह भोजन जिसमें उन्होंने लोक निगले
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तिरुवाय्मोळि 7.4.5 · चार हज़ार में 3490वाँ पाशुर

ऊणुडै मल्लर् तदर्ंद ऒलि मऩ्ऩर्आण् उडैच् चेऩै नडुंगुम् ऒलि विण्णुळ्एण् उडैत् तेवर् वॆळिप्पट्ट ऒलि अप्पऩ्काणुडैप् पारदम् कै अऱै पोऴ्दे

अर्थ

बलवान, हृष्ट-पुष्ट योद्धाओं के कुचले जाने की ध्वनि थी; राजाओं की वीरों से भरी सेनाओं के काँपने की ध्वनि थी; महान देवताओं के देखने के लिए आकाश में निकल आने की ध्वनि थी। ऐसा था वह समय जब मेरे पिता ने महान भारत युद्ध में, उस देखने योग्य दृश्य में, अपने हाथों से संकेत दिया!

शब्दशः

ऊणुडै मल्लर्
बलवान, हृष्ट-पुष्ट योद्धा
तदर्ंद ऒलि
उनके कुचले जाने की ध्वनि
आण् उडैच् चेऩै
वीरों की सेनाएँ
एण् उडैत् तेवर्
महान देवता
काणुडैप् पारदम्
भारत युद्ध, देखने योग्य दृश्य
कै अऱै पोऴ्दे
जब उन्होंने हाथों से संकेत दिया
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तिरुवाय्मोळि 7.4.6 · चार हज़ार में 3491वाँ पाशुर

पोऴ्दु मॆलिंद पुऩ् सॆक्करिल् वाऩ् तिशैसूऴुम् ऎऴुंदु उदिरप् पुऩला मलैकीऴ्दु पिळंद सिंगम् ऒत्तदाल् अप्पऩ्आऴ् तुयर् सॆय्दु अशुररैक् कॊल्लुमाऱे

अर्थ

जब दिन साँझ की धुँधली लालिमा में ढल रहा था, आकाश और चारों ओर की सारी दिशाएँ मानो उठकर रक्त की धाराएँ बन गईं। यह ऐसा था जैसे कोई सिंह नीचे से पर्वत को चीर रहा हो। इस प्रकार मेरे पिता ने नरसिंह बनकर असुर पर गहरी व्यथा लाई और उसे मार डाला!

शब्दशः

पोऴ्दु मॆलिंद
जब दिन ढल रहा था
पुऩ् सॆक्करिल्
साँझ की धुँधली लालिमा में
उदिरप् पुऩला
रक्त की धाराएँ बनते हुए
कीऴ्दु पिळंद सिंगम्
नीचे से पर्वत चीरने वाला सिंह
आऴ् तुयर् सॆय्दु
गहरी व्यथा लाते हुए
अशुररैक् कॊल्लुमाऱे
इस प्रकार उन्होंने असुर को मारा
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तिरुवाय्मोळि 7.4.7 · चार हज़ार में 3492वाँ पाशुर

माऱु निरैत्तु इरैक्कुम् सरंगळ् इऩनूऱु पिणम् मलैबोल् पुरळ कडल्आऱु मडुत्तु उदिरप् पुऩला अप्पऩ्नीऱु पड इलंगै सॆऱ्ऱ नेरे

अर्थ

शत्रु के विरुद्ध पंक्तियों में सजे बाण झुण्ड के झुण्ड उड़ते हुए गरजे; सैकड़ों शव पर्वतों की तरह लुढ़के; सागर ने रक्त की नदियों को अपनी धाराओं के रूप में पी लिया। इस प्रकार मेरे पिता ने राम बनकर लंका को राख कर दिया!

शब्दशः

माऱु निरैत्तु
शत्रु के विरुद्ध पंक्तियों में सजे
इरैक्कुम् सरंगळ्
गरजते बाण
पिणम् मलैबोल् पुरळ
पर्वतों की तरह लुढ़कते शव
कडल् आऱु मडुत्तु
नदियों को पीता सागर
नीऱु पड
राख कर दिया
इलंगै सॆऱ्ऱ
लंका को नष्ट किया
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तिरुवाय्मोळि 7.4.8 · चार हज़ार में 3493वाँ पाशुर

नेर्शरिंदाऩ् कॊडिक् कोऴि कॊंडाऩ् पिऩ्ऩुम्नेर्शरिंदाऩ् ऎरियुम् अऩलोऩ् पिऩ्ऩुम्नेर्शरिंदाऩ् मुक्कण् मूर्त्ति कंडीर् अप्पऩ्नेर्शरि वाणऩ् तिण्दोळ् कॊंड अऩ्ऱे

अर्थ

जिसकी ध्वजा पर मुर्गा है, वह हटकर भाग गया; फिर धधकते अग्निदेव अग्नि हट गए; फिर स्वयं त्रिनेत्र देव हट गए, देखो! ऐसा था वह दिन जब मेरे पिता ने अपने विरुद्ध खड़े बाणासुर की बलवान भुजाएँ ले लीं!

शब्दशः

नेर्शरिंदाऩ्
हटकर भाग गया
कॊडिक् कोऴि कॊंडाऩ्
मुर्गे की ध्वजा वाला, स्कन्द
ऎरियुम् अऩलोऩ्
अग्नि, धधकते अग्निदेव
मुक्कण् मूर्त्ति
त्रिनेत्र देव, शिव
वाणऩ् तिण्दोळ् कॊंड
बाणासुर की बलवान भुजाएँ ले लीं
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तिरुवाय्मोळि 7.4.9 · चार हज़ार में 3494वाँ पाशुर

अऩ्ऱु मण् नीर् ऎरि काल् विण् मलै मुदल्अऩ्ऱु सुडर् इरंडु पिऱवुम् पिऩ्ऩुम्अऩ्ऱु मऴै उयिर् तेवुम् मऱ्ऱुम् अप्पऩ्अऩ्ऱु मुदल् उलगम् सॆय्ददुमे

अर्थ

फिर, आरम्भ में, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश और पर्वत आए; फिर दो महान ज्योतियाँ और बाकी सब; फिर वर्षा, जीव, देवता और बाकी सब कुछ। इस प्रकार मेरे पिता ने सबसे पहले संसार रचा!

शब्दशः

मण् नीर् ऎरि काल् विण्
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
सुडर् इरंडु
दो ज्योतियाँ, सूर्य और चन्द्र
मऴै उयिर् तेवुम्
वर्षा, जीव और देवता
अऩ्ऱु मुदल्
सबसे पहले
उलगम् सॆय्ददुमे
इस प्रकार उन्होंने संसार रचा
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तिरुवाय्मोळि 7.4.10 · चार हज़ार में 3495वाँ पाशुर

मेय् निरै कीऴ् पुग मा पुरळ सुऩैवाय् निऱै नीर् पिळिऱिच् चॊरिय इऩआ निरैबाडि अंगे ऒडुंग अप्पऩ्ती मऴै कात्तु कुऩ्ऱम् ऎडुत्ताऩे

अर्थ

चरते झुण्ड उसके नीचे भीड़ लगाकर आ गए; जंगली पशु लुढ़कते-पुढ़कते आ गए; मुँह तक भरे झरने गर्जन के साथ अपना जल उँडेलने लगे; और गायों के झुण्डों सहित सारा ग्वाल गाँव वहाँ सिमट आया। ऐसा था वह समय जब मेरे पिता ने उन्हें क्रूर वर्षा से बचाया और पर्वत उठा लिया!

शब्दशः

मेय् निरै कीऴ् पुग
नीचे भीड़ लगाते चरते झुण्ड
मा पुरळ
लुढ़कते-पुढ़कते जंगली पशु
सुऩै
पहाड़ी झरने
पिळिऱिच् चॊरिय
गर्जन के साथ उँडेलते हुए
आ निरैबाडि
झुण्डों सहित ग्वाल गाँव
ती मऴै कात्तु
उन्हें क्रूर वर्षा से बचाते हुए
कुऩ्ऱम् ऎडुत्ताऩे
उन्होंने पर्वत (गोवर्धन) उठाया
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तिरुवाय्मोळि 7.4.11 · चार हज़ार में 3496वाँ पाशुर

कुऩ्ऱम् ऎडुत्त पिराऩ् अडियारॊडुम्ऒऩ्ऱि निऩ्ऱ सडगोबऩ् उरैशॆयल्नऩ्ऱि पुऩैंद ओर् आयिरत्तुळ् इवैवॆऩ्ऱि तरुम् पत्तुम् मेविक् कऱ्पार्क्के

अर्थ

शठकोपन् पर्वत उठाने वाले प्रभु के भक्तों के साथ एक होकर खड़े हैं। भलाई से बुने उनके कहे एक हज़ार पदों में से ये दस, इन्हें प्रेम से सीखने वालों को विजय दिलाएँगे।

शब्दशः

कुऩ्ऱम् ऎडुत्त पिराऩ्
पर्वत उठाने वाले प्रभु
अडियारॊडुम् ऒऩ्ऱि निऩ्ऱ
उनके भक्तों के साथ एक होकर खड़े
नऩ्ऱि पुऩैंद
भलाई से बुने
वॆऩ्ऱि तरुम्
विजय दिलाएँगे
मेविक् कऱ्पार्क्के
जो उन्हें प्रेम से सीखते हैं उन्हें
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।