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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुप्पावै 5

आण्डाळ् की रचना · चार हज़ार में 478वाँ पाशुर

तिरुप्पावै 5 · चार हज़ार में 478वाँ पाशुर

मायऩै मऩ्ऩु वडमदुरै मैंदऩैत्तूय पॆरुनीर् यमुऩैत् तुऱैवऩैआयर् कुलत्तिऩिल् तोऩ्ऱुम् अणि-विळक्कैत्तायैक् कुडल् विळक्कम् सॆय्द तामोदरऩैतूयोमाय् वंदु नाम् तूमलर् तूवित् तॊऴुदुवायिऩाल् पाडि मऩत्तिऩाल् सिंदिक्कपोय पिऴैयुम् पुगुदरुवाऩ् निऩ्ऱऩवुम्तीयिऩिल् तूशु आगुम् सॆप्पु-एलोर् ऎंबावाय्

अर्थ

वे अद्भुत प्रभु हैं, सदा टिकी रहने वाली उत्तर मथुरा के पुत्र, पवित्र, गहरी यमुना के तट के स्वामी, ग्वाल-कुल में उदित उज्ज्वल दीपक, दामोदर, जिन्होंने अपनी माता के गर्भ को गौरव दिया। यदि हम पवित्र होकर उनके पास आएँ, पवित्र फूल बिखेरकर प्रणाम करें, मुख से उनका गान करें और हृदय में उनका चिन्तन करें, तो पहले किए हुए दोष, और जो अभी आने वाले हैं, आग में फेंकी रुई जैसे हो जाएँगे। कहो!

शब्दशः

मायऩै
रहस्यों के अद्भुत प्रभु
वडमदुरै मैंदऩैत्
उत्तर मथुरा के पुत्र
यमुऩैत् तुऱैवऩै
यमुना के तटों के स्वामी
अणि-विळक्कैत्
सुन्दर दीपक
तायैक् कुडल् विळक्कम् सॆय्द
जिन्होंने अपनी माता के गर्भ को गौरव दिया
तामोदरऩै
दामोदर, जिनकी कमर रस्सी से बँधी
पोय पिऴैयुम् पुगुदरुवाऩ् निऩ्ऱऩवुम्
बीते दोष और जो अभी आने हैं
तीयिऩिल् तूशु
आग में फेंकी रुई
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।