तिरुप्पावै 22 · चार हज़ार में 495वाँ पाशुर
अर्थ
इस विशाल और सुन्दर धरती के उन राजाओं की तरह, जो अपना अभिमान टूट जाने पर आकर तुम्हारे राजसी पलंग के नीचे भीड़ लगाते हैं, हम भी आकर यहाँ इकट्ठी हुई हैं। छोटी घण्टी के मुख की तरह आधे खिले कमल जैसी, क्या तुम्हारी लाल आँखें धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके हम पर खुलेंगी? यदि तुम उन दो सुन्दर आँखों से हमें देखो, मानो चन्द्रमा और सूर्य एक साथ उदय हुए हों, तो हम पर पड़ा शाप उतर जाएगा।
शब्दशः
- अंगण् मा ञालत्तु
- इस विशाल और सुन्दर धरती के
- अबिमाऩ पंगमाय्
- उनका अभिमान टूटकर
- पळ्ळिक्कट्टिऱ् कीऴे
- तुम्हारे राजसी पलंग के नीचे
- किंगिणिवाय्च् चॆय्द
- छोटी घण्टी के मुख की तरह आधा खुला
- सॆंगण् सिऱुच् चिऱिदे
- तुम्हारी लाल आँखें, थोड़ा-थोड़ा करके
- तिंगळुम् आदित्तियऩुम्
- चन्द्रमा और सूर्य
- साबम् इऴिंदु
- शाप उतर जाता है
पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।