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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुप्पावै 12

आण्डाळ् की रचना · चार हज़ार में 485वाँ पाशुर

तिरुप्पावै 12 · चार हज़ार में 485वाँ पाशुर

कऩैत्तु इळङ् कऱ्ऱु- ऎरुमै कऩ्ऱुक्कु इरंगिनिऩैत्तु मुलै वऴिये निऩ्ऱु पाल् सोरनऩैत्तु इल्लम् सेऱु आक्कुम् नऱ् सॆल्वऩ् तंगाय्पऩित् तलै वीऴ निऩ् वाशऱ् कडै पऱ्ऱिसिऩत्तिऩाल् तॆऩ् इलंगैक् कोमाऩैच् चॆऱ्ऱमऩत्तुक्कु इऩियाऩैप् पाडवुम् नी वाय् तिऱवाय्इऩित् ताऩ् ऎऴुंदिराय् ईदु ऎऩ्ऩ पेर् उऱक्कम्अऩैत्तु इल्लत्तारुम् अऱिंदु-एलोर् ऎंबावाय्

अर्थ

छोटे बछड़ों वाली भैंस रँभाती है, और अपने बछड़े को ममता से याद करके अपने थनों से इतना दूध बहाती है कि घर कीचड़ बन जाता है: तुम ऐसे सम्पन्न ग्वाले की बहन हो! सिर पर ओस गिरते हुए, हम तुम्हारे द्वार की देहरी थामे उन हृदय-प्रिय प्रभु को गा रही हैं, जिन्होंने क्रोध में दक्षिण लंका के राजा का नाश किया। फिर भी तुम मुँह नहीं खोलती। कम से कम अब तो उठो! यह कैसी गहरी नींद है? हर घर को इसका पता चल गया है।

शब्दशः

इळङ् कऱ्ऱु- ऎरुमै
छोटे बछड़ों वाली भैंस
कऩ्ऱुक्कु इरंगि
अपने बछड़े के प्रेम में पिघलकर
नऱ् सॆल्वऩ् तंगाय्
हे भरपूर सम्पन्न ग्वाले की बहन
पऩित् तलै वीऴ
सिर पर ओस गिरते हुए
तॆऩ् इलंगैक् कोमाऩैच्
दक्षिण लंका का राजा, रावण
मऩत्तुक्कु इऩियाऩैप्
हृदय को मधुर लगने वाले प्रभु, राम
ईदु ऎऩ्ऩ पेर् उऱक्कम्
यह कैसी गहरी नींद है?
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।