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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुप्पळ्ळियेळुच्चि 10

तोण्डरडिप्पोडि आळ्वार् की रचना · चार हज़ार में 926वाँ पाशुर

तिरुप्पळ्ळियेळुच्चि 10 · चार हज़ार में 926वाँ पाशुर

कडि-मलर्क् कमलंगळ् मलर्ंदऩ इवैयोकदिरवऩ् कऩैगडल् मुळैत्तऩऩ् इवऩोतुडियिडैयार् सुरि कुऴल् पिऴिंदु उदऱित्तुगिल् उडुत्तु एऱिऩर् सूऴ् पुऩल् अरंगातॊडै ऒत्त तुळवमुम् कूडैयुम् पॊलिंदुतोऩ्ऱिय तोळ् तॊंडरडिप्पॊडि ऎऩ्ऩुम्अडियऩै अळियऩ् ऎऩ्ऱु अरुळि उऩ् अडियार्क्कुआट्पडुत्ताय् पळ्ळि ऎऴुंदरुळाये

अर्थ

क्या ये खिले हुए सुगन्धित कमल हैं? क्या यह गरजते सागर से उगा सूर्य है? तुडि ढोल जैसी पतली कमर वाली स्त्रियों ने अपने घुँघराले केश निचोड़कर झटक लिए हैं, वस्त्र पहन लिए हैं और स्नान करके निकल आई हैं, हे जल से घिरे अरङ्गन्! मैं तोण्डरडिप्पोडि नाम का एक सेवक हूँ, जिसका कन्धा सुन्दर गुँथी तुलसी और फूलों की टोकरी से चमकता है। तुमने कृपा करके मुझे दया के योग्य मानकर अपनाया और अपने सेवकों का सेवक बना दिया। कृपा करके अपनी नींद से उठो!

शब्दशः

कडि-मलर्क् कमलंगळ्
सुगन्धित कमल के फूल
कऩैगडल् मुळैत्तऩऩ्
गरजते सागर से उगा है
तुडियिडैयार्
तुडि ढोल जैसी पतली कमर वाली स्त्रियाँ
सूऴ् पुऩल् अरंगा
हे जल से घिरे अरङ्गन्
तुळवमुम् कूडैयुम्
तुलसी और फूलों की टोकरी
तॊंडरडिप्पॊडि
तोण्डरडिप्पोडि, “भक्तों के चरणों की धूल”
अळियऩ् ऎऩ्ऱु अरुळि
कृपा करके मुझे दया के योग्य मानकर
उऩ् अडियार्क्कु आट्पडुत्ताय्
तुमने मुझे अपने सेवकों का सेवक बना दिया
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।