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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1

पत्तु 5 · दशक 5.1 · 10 पाशुर

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.1 · चार हज़ार में 433वाँ पाशुर

वाक्कुत् तूय्मै इलामैयिऩालेमादवा उऩ्ऩै वाय्क्कॊळ्ळ माट्टेऩ्नाक्कु निऩ्ऩै अल्लाल् अऱियादुनाऩ् अदु अंजुवऩ् ऎऩ्वशम् अऩ्ऱुमूर्क्कुप् पेशुगिऩ्ऱाऩ् इवऩ् ऎऩ्ऱुमुऩिवायेलुम् ऎऩ् नाविऩुक्कु आऱ्ऱेऩ्काक्कै वायिलुम् कट्टुरै कॊळ्वर्कारणा करुळक् कॊडियाऩे

अर्थ

हे माधव, क्योंकि मेरी वाणी पवित्र नहीं है, मुझे तुम्हें अपने मुख में नहीं लेना चाहिए। फिर भी मेरी जिह्वा तुम्हारे सिवा कुछ नहीं जानती; मुझे इसकी चिन्ता है, पर यह मेरे वश में नहीं है। यदि तुम क्रोधित होकर कहो कि यह तो मूर्ख की तरह बोलता है, तब भी मैं अपनी जीभ रोक नहीं सकता। लोग कौए की काँव-काँव से भी अर्थ निकाल लेते हैं, हे सबके कारण, तुम जिनकी ध्वजा पर गरुड़ है!

शब्दशः

वाक्कुत् तूय्मै इलामैयिऩाले
क्योंकि मेरी वाणी पवित्र नहीं
वाय्क्कॊळ्ळ माट्टेऩ्
मुझे तुम्हें मुख में नहीं लेना चाहिए
नाक्कु निऩ्ऩै अल्लाल् अऱियादु
मेरी जिह्वा तुम्हारे सिवा कुछ नहीं जानती
ऎऩ्वशम् अऩ्ऱु
यह मेरे वश में नहीं
काक्कै वायिलुम् कट्टुरै कॊळ्वर्
लोग कौए की काँव-काँव से भी अर्थ निकालते हैं
करुळक् कॊडियाऩे
तुम जिनकी ध्वजा पर गरुड़ है
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.2 · चार हज़ार में 434वाँ पाशुर

सऴक्कु नाक्कॊडु पुऩ्गवि सॊऩ्ऩेऩ्संगु सक्करम् एंदु कैयाऩेपिऴैप्पर् आगिलुम् तम् अडियार् सॊल्पॊऱुप्पदु पॆरियोर् कडऩ् अऩ्ऱेविऴिक्कुम् कण्णिलेऩ् निऩ् कण् मऱ्ऱल्लाल्वेऱु ऒरुवरोडु ऎऩ् मऩम् पऱ्ऱादुउऴैक्कु ओर् पुळ्ळि मिगै अऩ्ऱु कंडाय्ऊऴि एऴ् उलगु उंडु उमिऴ्ंदाऩे

अर्थ

टेढ़ी जीभ से मैंने तुच्छ पद कहे हैं, हे शंख और चक्र धारण करने वाले हाथों वाले! यदि उनके अपने सेवक भी भूल करें, तो क्या उनकी कही बात को सह लेना बड़ों का कर्तव्य नहीं है? तुम्हारी आँखों के सिवा मेरे पास देखने को आँखें नहीं; मेरा मन किसी और से नहीं लगेगा। चित्तीदार हिरण पर एक और चित्ती कोई अधिक बात नहीं, हे प्रलय में सातों लोकों को निगलकर फिर बाहर निकालने वाले!

शब्दशः

सऴक्कु नाक्कॊडु
टेढ़ी जीभ से
पुऩ्गवि सॊऩ्ऩेऩ्
मैंने तुच्छ पद कहे
पॊऱुप्पदु पॆरियोर् कडऩ् अऩ्ऱे
क्या इसे सहना बड़ों का कर्तव्य नहीं?
विऴिक्कुम् कण्णिलेऩ्
मेरे पास देखने को आँखें नहीं
उऴैक्कु ओर् पुळ्ळि मिगै अऩ्ऱु
हिरण पर एक और चित्ती कोई अधिक बात नहीं
ऊऴि एऴ् उलगु उंडु उमिऴ्ंदाऩे
जिन्होंने प्रलय में सातों लोक निगले और फिर निकाले
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.3 · चार हज़ार में 435वाँ पाशुर

नऩ्मै तीमैगळ् ऒऩ्ऱुम् अऱियेऩ्नारणा ऎऩ्ऩुम् इत्तऩै अल्लाल्पुऩ्मैयाल् उऩ्ऩैप् पुळ्ळुवम् पेशिप्पुगऴ्वाऩ् अऩ्ऱु कंडाय् तिरुमालेउऩ्ऩुमाऱु उऩ्ऩै ऒऩ्ऱुम् अऱियेऩ्ओवादे नमो नारणा ऎऩ्बऩ्वऩ्मै आवदु उऩ् कोयिलिल् वाऴुम्वैट्टणवऩ् ऎऩ्ऩुम् वऩ्मै कंडाये

अर्थ

नारायण कहने के सिवा मैं भले-बुरे के बारे में कुछ नहीं जानता। हे तिरुमाल्, मैं किसी तुच्छ स्वार्थ से झूठी चापलूसी करके तुम्हारी स्तुति करने वाला नहीं हूँ। मैं तो तुम्हारा ध्यान करना भी नहीं जानता; मैं बस बिना रुके नमो नारायण कहता रहता हूँ। देखो, मेरी एकमात्र शक्ति यही है: कि मैं तुम्हारे मन्दिर में रहने वाला वैष्णव हूँ।

शब्दशः

नऩ्मै तीमैगळ् ऒऩ्ऱुम् अऱियेऩ्
मैं भले-बुरे के बारे में कुछ नहीं जानता
पुळ्ळुवम् पेशिप्
झूठी चापलूसी करते हुए
उऩ्ऩुमाऱु
ध्यान कैसे करें
ओवादे नमो नारणा
बिना रुके नमो नारायण
उऩ् कोयिलिल् वाऴुम्
जो तुम्हारे मन्दिर में रहता है
वैट्टणवऩ् ऎऩ्ऩुम् वऩ्मै
वैष्णव होने की शक्ति
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.4 · चार हज़ार में 436वाँ पाशुर

नॆडुमैयाल् उलगेऴुम् अळंदाय्निऩ्मला नॆडियाय् अडियेऩैक्कुडिमै कॊळ्वदऱ्कु ऐयुऱ वेंडाकूऱै सोऱु इवै वेंडुवदिल्लैअडिमै ऎऩ्ऩुम् अक् कोयिऩ्मैयालेअंगंगे अवै पोदरुम् कंडाय्कॊडुमैक् कंजऩैक् कॊऩ्ऱु निऩ् तादैकोत्त वऩ् तळै कोळ् विडुत्ताऩे

अर्थ

तुमने अपनी विराट ऊँचाई से सातों लोक नाप लिए, हे निर्मल प्रभु, हे विराट प्रभु! मुझे, अपने सेवक को, अपना बना लेने में तुम्हें संकोच नहीं करना चाहिए; मैं न वस्त्र माँगता हूँ, न भोजन। तुम्हारा सेवक होना स्वयं एक राजपद है, और उसी के कारण, मैं जहाँ भी रहूँ, ये चीज़ें मुझ तक आ जाएँगी। हे क्रूर कंस को मारने वाले और उसके द्वारा तुम्हारे पिता पर डाली गई कठोर बेड़ियाँ खोलने वाले!

शब्दशः

नॆडुमैयाल् उलगेऴुम् अळंदाय्
तुमने अपनी ऊँचाई से सातों लोक नापे
निऩ्मला
हे निर्मल प्रभु
कुडिमै कॊळ्वदऱ्कु
मुझे अपना सेवक बना लेने के लिए
कूऱै सोऱु
वस्त्र और भोजन
अडिमै ऎऩ्ऩुम् अक् कोयिऩ्मैयाले
दास्य नाम के उस राजपद के कारण
वऩ् तळै कोळ् विडुत्ताऩे
जिन्होंने कठोर बेड़ियाँ खोलीं
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.5 · चार हज़ार में 437वाँ पाशुर

तोट्टम् इल्लवळ् आत् तॊऴु ओडैतुडवैयुम् किणऱुम् इवै ऎल्लाम्वाट्टम् इऩ्ऱि उऩ् पॊऩ्ऩडिक् कीऴेवळैप्पु-अगम् वगुत्तुक्कॊंडु इरुंदेऩ्नाट्टु माऩिडत्तोडु ऎऩक्कु अरिदुनच्चुवार् पलर् केऴल् ऒऩ्ऱु आगिक्कोट्टु मण् कॊंड कॊळ्गैयिऩाऩेकुंजरम् विऴक् कॊंबु ऒशित्ताऩे

अर्थ

बगीचा, पत्नी, गायें, गोशाला, तालाब, खेत और कुआँ: ये सब मैंने कुछ भी बचाए बिना तुम्हारे स्वर्णिम चरणों के नीचे के घेरे में चिह्नित करके बाड़ लगा दिए हैं। इस संसार के लोगों से निपटना मेरे लिए कठिन है, और बहुत लोग इन चीज़ों का लालच करते हैं। हे वराह बनकर धरती को अपने दाँत पर उठाने वाले! हे दाँत तोड़कर हाथी को गिराने वाले!

शब्दशः

तोट्टम् इल्लवळ्
बगीचा और पत्नी
आत् तॊऴु ओडै
गायें, गोशाला और तालाब
उऩ् पॊऩ्ऩडिक् कीऴे
तुम्हारे स्वर्णिम चरणों के नीचे
वळैप्पु-अगम् वगुत्तुक्कॊंडु
एक घेरा चिह्नित करके
नच्चुवार् पलर्
बहुत लोग उनका लालच करते हैं
केऴल् ऒऩ्ऱु आगिक्
वराह बनकर
कुंजरम् विऴक् कॊंबु ऒशित्ताऩे
जिन्होंने दाँत तोड़कर हाथी को गिराया
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.6 · चार हज़ार में 438वाँ पाशुर

कण्णा नाऩ्मुगऩैप् पडैत्ताऩेकारणा करियाय् अडियेऩ् नाऩ्उण्णा नाळ् पशि आवदु ऒऩ्ऱु इल्लैओवादे नमो नारणा ऎऩ्ऱुऎण्णा नाळुम् इरुक्कु ऎशुच् चामवेद नाळ्मलर् कॊंडु उऩ पादम्नण्णा नाळ् अवै तत्तुऱुमागिल्अऩ्ऱु ऎऩक्कु अवै पट्टिऩि नाळे

अर्थ

हे कण्णा, चतुर्मुख ब्रह्मा को रचने वाले, सबके कारण, श्यामल प्रभु! मुझ, तुम्हारे सेवक, के लिए बिना भोजन का दिन कोई भूख नहीं है। पर जिन दिनों मैं बिना रुके नमो नारायण न कहता रहूँ, और जिन दिनों मैं ऋग्, यजुर् और साम वेदों के ताज़े फूल लेकर तुम्हारे चरणों में न आऊँ: यदि ऐसे दिन निकल जाएँ, वही मेरे उपवास के दिन हैं।

शब्दशः

नाऩ्मुगऩैप् पडैत्ताऩे
जिन्होंने चतुर्मुख ब्रह्मा को रचा
उण्णा नाळ्
बिना भोजन का दिन
इरुक्कु ऎशुच् चाम
ऋग्, यजुर् और साम वेद
नाळ्मलर् कॊंडु
ताज़े फूल लेकर
पट्टिऩि नाळे
भूखे रहने के दिन
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.7 · चार हज़ार में 439वाँ पाशुर

वॆळ्ळै वॆळ्ळत्तिऩ् मेल् ऒरु पांबैमॆत्तैयाग विरित्तु अदऩ् मेलेकळ्ळ नित्तिरै कॊळ्गिऩ्ऱ मार्क्कम्काणलांगॊल् ऎऩ्ऱु आशैयिऩालेउळ्ळम् सोर उगंदु ऎदिर् विम्मिउरोम कूबंगळाय्क् कण्ण नीर्गळ्तुळ्ळम् सोरत् तुयिल् अणै कॊळ्ळेऩ्सॊल्लाय् याऩ् उऩ्ऩैत् तत्तुऱुमाऱे

अर्थ

क्षीरसागर की श्वेत बाढ़ पर तुम एक सर्प को अपना बिछौना बनाकर फैलाते हो और उस पर अपनी बनावटी निद्रा में लेटते हो। उसे किसी तरह देखने की लालसा में मेरा हृदय पिघल जाता है, मैं आनन्दित होता हूँ और सिसकता हूँ, शरीर पर रोमांच हो आता है, आँसू बहने लगते हैं, और मैं अपनी शय्या पर सोने के लिए लेट नहीं पाता। बताओ, मैं तुम तक कैसे पहुँचूँ?

शब्दशः

वॆळ्ळै वॆळ्ळत्तिऩ् मेल्
श्वेत बाढ़ पर, क्षीरसागर पर
मॆत्तैयाग विरित्तु
बिछौने की तरह फैलाकर
कळ्ळ नित्तिरै
बनावटी निद्रा, योगनिद्रा
उळ्ळम् सोर
मेरा हृदय पिघलते हुए
उरोम कूबंगळाय्क्
शरीर पर रोमांच होते हुए
तुयिल् अणै कॊळ्ळेऩ्
मैं सोने के लिए लेट नहीं पाता
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.8 · चार हज़ार में 440वाँ पाशुर

वण्ण माल् वरैये कुडैयागमारि कात्तवऩे मदुशूदाकण्णऩे करि कोळ् विडुत्ताऩेकारणा कळिऱु अट्ट पिराऩेऎण्णुवार् इडरैक् कळैवाऩेएत्तरुम् पॆरुङ् कीर्त्तियिऩाऩेनण्णि नाऩ् उऩ्ऩै नाळ्दॊऱुम् एत्तुम्नऩ्मैये अरुळ्शॆय् ऎंबिराऩे

अर्थ

तुम जिन्होंने सुन्दर विशाल पर्वत को छाते की तरह उठाकर उन्हें वर्षा से बचाया, मधुसूदन, कण्णा, तुम जिन्होंने हाथी को मगर की पकड़ से छुड़ाया, सबके कारण, हाथी को मारने वाले प्रभु, तुम जो अपना स्मरण करने वालों के कष्ट दूर करते हो, जिनका महान यश स्तुति से परे है: मेरे प्रभु, मुझे बस यही भलाई दो कि मैं हर दिन तुम्हारे पास आकर तुम्हारी स्तुति कर सकूँ।

शब्दशः

वण्ण माल् वरैये कुडैयाग
सुन्दर विशाल पर्वत को छाता बनाकर
मारि कात्तवऩे
जिन्होंने उन्हें वर्षा से बचाया
करि कोळ् विडुत्ताऩे
जिन्होंने हाथी को पकड़ से छुड़ाया
कळिऱु अट्ट पिराऩे
हाथी को मारने वाले प्रभु
ऎण्णुवार् इडरैक् कळैवाऩे
जो स्मरण करने वालों के कष्ट दूर करते हैं
नऩ्मैये अरुळ्शॆय्
बस यही भलाई दो
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.9 · चार हज़ार में 441वाँ पाशुर

नंबऩे नविऩ्ऱु एत्त वल्लार्गळ्नादऩे नरशिंगमदु आऩाय्उंबर्गोऩ् उलगु एऴुम् अळंदाय्ऊऴि आयिऩाय् आऴि मुऩ् एंदिक्कंब मा करि कोळ् विडुत्ताऩेकारणा कडलैक् कडैंदाऩेऎंबिराऩ् ऎऩ्ऩै आळ् उडैत् तेऩेएऴैयेऩ् इडरैक् कळैयाये

अर्थ

हे विश्वसनीय प्रभु, बार-बार तुम्हारी स्तुति कर सकने वालों के स्वामी, तुम जो नरसिंह बने! देवों के राजा, तुम जिन्होंने सातों लोक नापे, तुम जो स्वयं काल हो! तुम जिन्होंने बहुत पहले चक्र उठाकर काँपते हुए विशाल हाथी को मगर की पकड़ से छुड़ाया, सबके कारण, तुम जिन्होंने सागर मथा! मेरे प्रभु, मुझे अपना बना लेने वाले मधु, मुझ दीन के कष्ट दूर करो।

शब्दशः

नंबऩे
हे विश्वसनीय प्रभु
नरशिंगमदु आऩाय्
तुम जो नरसिंह बने
उंबर्गोऩ्
देवों के राजा
ऊऴि आयिऩाय्
तुम जो स्वयं काल हो
कंब मा करि
काँपता हुआ विशाल हाथी
ऎऩ्ऩै आळ् उडैत् तेऩे
मुझे अपना बना लेने वाले मधु
एऴैयेऩ् इडरैक् कळैयाये
मुझ दीन के कष्ट दूर करो
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.1.10 · चार हज़ार में 442वाँ पाशुर

कामर् तादै करुदलर् सिंगम्काण इऩिय करुंगुऴऱ् कुट्टऩ्वामऩऩ् ऎऩ् मरगद वण्णऩ्मादवऩ् मदुशूदऩऩ् तऩ्ऩैच्सेम नऩ्गु अमरुम् पुदुवैयर् कोऩ्विट्टुशित्तऩ् वियऩ् तमिऴ् पत्तुम्नामम् ऎऩ्ऱु नविऩ्ऱु उरैप्पार्गळ्नण्णुवार् ऒल्लै नारणऩ् उलगे

अर्थ

वे काम के पिता हैं, अपने शत्रुओं के लिए सिंह, देखने में इतने मधुर काले घुँघराले बालों वाले नन्हे, वामन, मेरे मरकत-वर्ण प्रभु, माधव, मधुसूदन। उन पर, जहाँ कल्याण बसता है उस पुदुवै के लोगों के स्वामी विष्णुचित्त, पेरियाळ्वार्, ने समृद्ध तमिऴ् में ये दस पाशुर रचे। जो इन्हें उनके अपने नाम मानकर पढ़ें, वे शीघ्र नारायण के लोक को पहुँचेंगे।

शब्दशः

कामर् तादै
काम के पिता
करुदलर् सिंगम्
शत्रुओं के लिए सिंह
करुंगुऴऱ् कुट्टऩ्
काले घुँघराले बालों वाला नन्हा
मरगद वण्णऩ्
मरकत-वर्ण प्रभु
पुदुवैयर् कोऩ्
पुदुवै के लोगों के स्वामी
नामम् ऎऩ्ऱु नविऩ्ऱु उरैप्पार्गळ्
जो इन्हें उनके नाम मानकर पढ़ें
ऒल्लै नारणऩ् उलगे
शीघ्र, नारायण का लोक
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।