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श्रीमते रामानुजाय नमः
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तिरुवाय्मोळि 6.10

पत्तु 6 · दशक 6.10 · 11 पाशुर

तिरुवाय्मोळि 6.10.1 · चार हज़ार में 3442वाँ पाशुर

उलगम् उंड पॆरुवायाउलप्पु इल् कीर्त्ति अम्माऩेनिलवुम् सुडर् सूऴ् ऒळि मूर्त्तिनॆडियाय् अडियेऩ् आर् उयिरेतिलदम् उलगुक्कु आय् निऩ्ऱतिरुवेंगडत्तु ऎम् पॆरुमाऩेकुल तॊल् अडियेऩ् उऩ पादम्कूडुम् आऱु कूऱाये

अर्थ

हे लोकों को निगलने वाले महान मुख! हे अनन्त महिमा वाले प्रभु! हे स्थिर तेज से घिरे प्रकाश के रूप! हे विराट प्रभु, मुझ अपने सेवक के प्यारे प्राण! हे तिरुवेङ्कटम् के मेरे प्रभु, जो वहाँ संसार के ललाट के तिलक, उसके आभूषण बनकर खड़े हो! मुझे बताओ, मैं, सेवकों के प्राचीन वंश का तुम्हारा सेवक, तुम्हारे चरणों तक कैसे पहुँचूँ।

शब्दशः

उलगम् उंड पॆरुवाया
हे लोकों को निगलने वाले महान मुख
उलप्पु इल् कीर्त्ति
कभी न समाप्त होने वाली महिमा
अडियेऩ् आर् उयिरे
हे मुझ अपने सेवक के प्यारे प्राण
तिलदम् उलगुक्कु आय्
तिलक बनकर, संसार के आभूषण
तिरुवेंगडत्तु ऎम् पॆरुमाऩे
हे तिरुवेङ्कटम्, तिरुमल के हमारे प्रभु
कुल तॊल् अडियेऩ्
मैं, प्राचीन वंश का सेवक
कूडुम् आऱु कूऱाये
मुझे बताओ मैं उन तक कैसे पहुँचूँ
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तिरुवाय्मोळि 6.10.2 · चार हज़ार में 3443वाँ पाशुर

कूऱु आय् नीऱु आय् निलऩ् आगिकॊडु वल् अशुरर् कुलम् ऎल्लाम्सीऱा ऎरियुम् तिरु नेमिवलवा तॆय्वक् कोमाऩेसेऱु आर् सुऩैत् तामरै सॆंदीमलरुम् तिरुवेंगडत्ताऩेआऱा अऩ्बिल् अडियेऩ् उऩ्अडिशेर् वण्णम् अरुळाये

अर्थ

हे उस पवित्र चक्र के स्वामी, जो क्रोध में तब तक धधकता है जब तक क्रूर, प्रबल असुरों की पूरी जाति टुकड़े-टुकड़े होकर, राख होकर धरती पर बिछ न जाए! हे देवों के राजा! हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जहाँ कीचड़ भरे तालाबों में कमल लाल आग की तरह खिलते हैं! कृपा करके ऐसा करो कि मैं, तुम्हारा सेवक, जिसका प्रेम कभी ठण्डा नहीं पड़ता, तुम्हारे चरणों तक पहुँच सकूँ।

शब्दशः

कूऱु आय् नीऱु आय् निलऩ् आगि
टुकड़े-टुकड़े, राख होकर, धरती पर बिछे
कॊडु वल् अशुरर् कुलम्
क्रूर, प्रबल असुरों की जाति
सीऱा ऎरियुम् तिरु नेमि
क्रोध में धधकता पवित्र चक्र
तॆय्वक् कोमाऩे
हे देवों के राजा
सेऱु आर् सुऩैत् तामरै
कीचड़ भरे तालाबों में कमल
आऱा अऩ्बिल् अडियेऩ्
मैं, कभी न बुझने वाले प्रेम वाला तुम्हारा सेवक
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तिरुवाय्मोळि 6.10.3 · चार हज़ार में 3444वाँ पाशुर

वण्णम् मरुळ् कॊळ् अणि मेगवण्णा माय अम्माऩेऎण्णम् पुगुंदु तित्तिक्कुम्अमुदे इमैयोर् अदिबदियेतॆळ् नल् अरुवि मणि पॊऩ् मुत्तुअलैक्कुम् तिरुवेंगडत्ताऩेअण्णले उऩ् अडि सेरअडियेऱ्कु आआ ऎऩ्ऩाये

अर्थ

हे अद्भुत प्रभु, जिनका सुन्दर मेघ-सा साँवला रंग देखने वाले सबको विह्वल कर देता है! हे अमृत, जो मेरे विचारों में प्रवेश करके उन्हें मधुर बना देता है! हे अपलक देवताओं के स्वामी! हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जहाँ निर्मल, उत्तम झरने रत्न, सोना और मोती नीचे उछालते हैं! हे महान प्रभु, मुझ पर करुणा करके "आह, आह!" कहो, ताकि मैं, तुम्हारा सेवक, तुम्हारे चरणों तक पहुँच सकूँ।

शब्दशः

वण्णम् मरुळ् कॊळ्
जिनका रंग विह्वल कर देता है
ऎण्णम् पुगुंदु तित्तिक्कुम् अमुदे
हे अमृत जो मेरे विचारों में प्रवेश करके उन्हें मधुर बनाता है
इमैयोर् अदिबदिये
हे अपलक देवताओं के स्वामी
तॆळ् नल् अरुवि
निर्मल, उत्तम झरने
मणि पॊऩ् मुत्तु अलैक्कुम्
रत्न, सोना और मोती उछालते
आआ ऎऩ्ऩाये
करुणा से 'आह, आह!' कहो
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तिरुवाय्मोळि 6.10.4 · चार हज़ार में 3445वाँ पाशुर

आआ ऎऩ्ऩादु उलगत्तैअलैक्कुम् अशुरर् वाऴ् नाळ्मेल्ती वाय् वाळि मऴै पॊऴिंदसिलैया तिरु मा मगळ् केळ्वातेवा सुरर्गळ् मुऩिक्कणंगळ्विरुंबुम् तिरुवेंगडत्ताऩेपू आर् कऴल्गळ् अरुविऩैयेऩ्पॊरुंदुमाऱु पुणराये

अर्थ

हे धनुषधारी, जिन्होंने दया की एक टीस के बिना संसार को सताने वाले असुरों के प्राणों पर अग्नि-मुख बाणों की वर्षा की! हे महादेवी लक्ष्मी के पति! हे देव, तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जिनके लिए देवता और ऋषियों के समूह तरसते हैं! ऐसा करो कि मैं, कठोर कर्मों के बोझ से दबा, तुम्हारे फूल-से चरणों में विश्राम पा सकूँ।

शब्दशः

आआ ऎऩ्ऩादु
दया की एक टीस के बिना
ती वाय् वाळि मऴै
अग्नि-मुख बाणों की वर्षा
सिलैया
हे धनुषधारी, राम बनकर
तिरु मा मगळ् केळ्वा
हे महादेवी लक्ष्मी के पति
मुऩिक्कणंगळ्
ऋषियों के समूह
पू आर् कऴल्गळ्
फूल-से चरण
पॊरुंदुमाऱु पुणराये
ऐसा करो कि मैं उन तक आऊँ
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तिरुवाय्मोळि 6.10.5 · चार हज़ार में 3446वाँ पाशुर

पुणरा निऩ्ऱ मरम् एऴ् अऩ्ऱुऎय्द ऒरु विल् वलवा ओपुणर् एय् निऩ्ऱ मरम् इरंडिऩ्नडुवे पोऩ मुदल्वा ओतिणर् आर् मेगम् ऎऩक् कळिऱुसेरुम् तिरुवेंगडत्ताऩेतिणर् आर् सार्ंगत्तु उऩ पादम्सेर्वदु अडियेऩ् ऎन्नाळे?

अर्थ

हे एकमात्र धनुष के स्वामी, जिन्होंने बहुत पहले पास-पास खड़े सात वृक्षों को बेध दिया! हे आदिकारण, जो साथ-साथ खड़े दो वृक्षों के बीच से गए! हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जहाँ हाथी घने बादलों की तरह इकट्ठे होते हैं! हे प्रबल शार्ङ्ग धनुष वाले, मैं, तुम्हारा सेवक, तुम्हारे चरणों तक कब पहुँचूँगा?

शब्दशः

मरम् एऴ् अऩ्ऱु ऎय्द
जिन्होंने कभी सात साल वृक्षों को बेधा
ऒरु विल् वलवा
हे एकमात्र धनुष के स्वामी
मरम् इरंडिऩ् नडुवे पोऩ
जो दो मरुदु वृक्षों के बीच से गए
मुदल्वा
हे आदिकारण
तिणर् आर् मेगम् ऎऩक् कळिऱु
घने बादलों जैसे हाथी
सार्ंगत्तु
शार्ङ्ग धनुष वाले
ऎन्नाळे?
किस दिन?
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तिरुवाय्मोळि 6.10.6 · चार हज़ार में 3447वाँ पाशुर

ऎन्नाळे नाम् मण् अळंदइणैत् तामरैगळ् काण्बदऱ्कु ऎऩ्ऱुऎन्नाळुम् निऩ्ऱु इमैयोर्गळ्एत्ति इऱैंजि इऩम् इऩमाय्मॆय्न् ना मऩत्ताल् वऴिबाडुसॆय्युम् तिरुवेंगडत्ताऩेमॆय्न् नाऩ् ऎय्दि ऎन् नाळ् उऩ्अडिक्कण् अडियेऩ् मेवुवदे?

अर्थ

"हम धरती नापने वाले कमल-चरणों की जोड़ी कब देखेंगे?" यही कहते हुए देवता वहाँ सदा खड़े रहते हैं, टोली के बाद टोली, स्तुति करते और प्रणाम करते हुए, तिरुवेङ्कटम् में शरीर, जिह्वा और मन से पूजा करते हुए। हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, किस दिन मैं, तुम्हारा सेवक, सचमुच तुम्हारे चरणों तक पहुँचकर वहाँ ठहरूँगा?

शब्दशः

मण् अळंद इणैत् तामरैगळ्
धरती नापने वाले कमल-चरणों की जोड़ी
इमैयोर्गळ्
अपलक देवता
इऩम् इऩमाय्
टोली के बाद टोली
मॆय्न् ना मऩत्ताल्
शरीर, जिह्वा और मन से
वऴिबाडु सॆय्युम्
पूजा
अडियेऩ् मेवुवदे
मैं, तुम्हारा सेवक, पहुँचकर ठहरूँ
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तिरुवाय्मोळि 6.10.7 · चार हज़ार में 3448वाँ पाशुर

अडियेऩ् मेवि अमर्गिऩ्ऱअमुदे इमैयोर् अदिबदियेकॊडिया अडु पुळ् उडैयाऩेकोलक् कऩिवाय्प् पॆरुमाऩेसॆडि आर् विऩैगळ् तीर् मरुंदेतिरुवेंगडत्तु ऎम् पॆरुमाऩेनॊडि आर् पॊऴुदुम् उऩ पादम्काण नोलादु आऱ्ऱेऩे

अर्थ

हे अमृत, जिसमें मैं, तुम्हारा सेवक, विश्राम और आनन्द पाता हूँ! हे देवताओं के स्वामी! हे शत्रुओं को मार गिराने वाले पक्षी की ध्वजा वाले! हे सुन्दर फल-से लाल होंठों वाले प्रभु! हे झाड़ी-से घने हो चुके कर्मों को दूर करने वाली औषधि! हे तिरुवेङ्कटम् के मेरे प्रभु! मैंने कोई तप नहीं किया, फिर भी तुम्हारे चरणों को देखे बिना एक क्षण भी सह नहीं सकता।

शब्दशः

मेवि अमर्गिऩ्ऱ अमुदे
हे अमृत जिसमें मैं विश्राम पाता हूँ
कॊडिया अडु पुळ् उडैयाऩे
जिनकी ध्वजा पर प्रहार करने वाला पक्षी गरुड़ है
कोलक् कऩिवाय्प् पॆरुमाऩे
हे सुन्दर फल-से लाल होंठों वाले प्रभु
सॆडि आर् विऩैगळ् तीर् मरुंदे
हे झाड़ी-से घने कर्मों की औषधि
नॊडि आर् पॊऴुदुम्
चुटकी भर समय के लिए भी
नोलादु आऱ्ऱेऩे
बिना तप किए, मैं सह नहीं सकता
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तिरुवाय्मोळि 6.10.8 · चार हज़ार में 3449वाँ पाशुर

नोलादु आऱ्ऱेऩ् उऩ पादम्काण ऎऩ्ऱु नुण् उणर्विऩ्नील् आर् कंडत्तु अम्माऩुम्निऱै नाऩ्मुगऩुम् इंदिरऩुम्सेल् एय् कण्णार् पलर् सूऴविरुंबुम् तिरुवेंगडत्ताऩेमालाय् मयक्कि अडियेऩ्बाल्वंदाय् पोले वाराये

अर्थ

"हम सह नहीं सकते, हमने तुम्हारे चरण देखने के लिए कोई तप नहीं किया!" ऐसा कहते हैं सूक्ष्म ज्ञान वाले नीलकण्ठ शिव, पूर्ण चतुर्मुख ब्रह्मा, और इन्द्र, जब वे मछली-सी आँखों वाली अनेक स्त्रियों से घिरे तिरुवेङ्कटम् में तुम्हारे लिए तरसते हैं। हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, मेरे पास वैसे ही आओ जैसे पहले आए थे, अपने प्रेम से मुझे मोहित करते हुए।

शब्दशः

नुण् उणर्विऩ्
सूक्ष्म ज्ञान वाले
नील् आर् कंडत्तु अम्माऩुम्
नीलकण्ठ देव, शिव
निऱै नाऩ्मुगऩुम्
पूर्ण चतुर्मुख ब्रह्मा
सेल् एय् कण्णार्
मछली-सी आँखों वाली स्त्रियाँ
मालाय् मयक्कि
प्रेम से मुझे मोहित करते हुए
वंदाय् पोले वाराये
जैसे पहले आए वैसे आओ
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तिरुवाय्मोळि 6.10.9 · चार हज़ार में 3450वाँ पाशुर

वंदाय् पोले वारादाय्वारादाय् पोल् वरुवाऩेसॆंदामरैक् कण् सॆंगऩि वाय्नाल् तोळ् अमुदे ऎऩदु उयिरेसिंदामणिगळ् पगर् अल्लैप्पगल् सॆय् तिरुवेंगडत्ताऩेअंदो अडियेऩ् उऩ पादम्अगलगिल्लेऩ् इऱैयुमे

अर्थ

तुम आते-से लगते हो, और नहीं आते; तुम न आते-से लगते हो, और फिर आ जाते हो! हे लाल कमल-सी आँखों, लाल फल-से होंठों और चार भुजाओं वाले अमृत, मेरे प्राण! हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जहाँ चिन्तामणि रत्न रात को दिन बना देते हैं! हाय, मैं, तुम्हारा सेवक, एक क्षण के लिए भी तुम्हारे चरण नहीं छोड़ सकता।

शब्दशः

वंदाय् पोले वारादाय्
तुम जो आते-से लगते हो पर आते नहीं
वारादाय् पोल् वरुवाऩे
तुम जो न आते-से लगते हो, फिर भी आते हो
नाल् तोळ् अमुदे
हे चार भुजाओं वाले अमृत
सिंदामणिगळ्
इच्छा पूरी करने वाले रत्न
अल्लैप् पगल् सॆय्
जो रात को दिन बना देते हैं
अगलगिल्लेऩ् इऱैयुमे
मैं एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ सकता
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तिरुवाय्मोळि 6.10.10 · चार हज़ार में 3451वाँ पाशुर

अगलगिल्लेऩ् इऱैयुम् ऎऩ्ऱुअलर्मेल् मंगै उऱै मार्बानिगर् इल् पुगऴाय् उलगम् मूऩ्ऱुउडैयाय् ऎऩ्ऩै आळ्वाऩेनिगर् इल् अमरर् मुऩिक्कणंगळ्विरुंबुम् तिरुवेंगडत्ताऩेपुगल् ऒऩ्ऱु इल्ला अडियेऩ् उऩ्अडिक्कीऴ् अमर्ंदु पुगुंदेऩे

अर्थ

"मैं उन्हें एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ सकती," ऐसा कहती हैं कमल की वे देवी, जो तुम्हारे वक्षःस्थल पर निवास करती हैं। हे अनुपम कीर्ति वाले, तीनों लोकों के स्वामी, तुम जो मुझ पर शासन करते हो! हे तिरुवेङ्कटम् के प्रभु, जिनके लिए अनुपम अमर और ऋषियों के समूह तरसते हैं! मैं, तुम्हारा सेवक, जिसकी और कोई शरण नहीं, आकर तुम्हारे चरणों के नीचे बस गया हूँ। बड़े जन इसे श्री के द्वारा की गई आळ्वार् की शरणागति, उनका आत्मसमर्पण, मानकर सँजोते हैं।

शब्दशः

अगलगिल्लेऩ् इऱैयुम्
मैं एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ सकती
अलर्मेल् मंगै उऱै मार्बा
हे तुम जिनके वक्ष पर कमल की देवी रहती हैं
निगर् इल् पुगऴाय्
हे अनुपम कीर्ति वाले
उलगम् मूऩ्ऱु उडैयाय्
हे तीनों लोकों के स्वामी
पुगल् ऒऩ्ऱु इल्ला अडियेऩ्
मैं, तुम्हारा सेवक, जिसकी और कोई शरण नहीं
अडिक्कीऴ् अमर्ंदु पुगुंदेऩे
तुम्हारे चरणों के नीचे आकर बस गया हूँ
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तिरुवाय्मोळि 6.10.11 · चार हज़ार में 3452वाँ पाशुर

अडिक्कीऴ् अमर्ंदु पुगुंदु अडियीर्वाऴ्मिऩ् ऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱु अरुळ्गॊडुक्कुम्पडिक् केऴ् इल्लाप् पॆरुमाऩैप्पऴऩक् कुरुगूर्च् चडगोबऩ्मुडिप्पाऩ् सॊऩ्ऩ आयिरत्तुत्तिरुवेंगडत्तुक्कु इवै पत्तुम्पिडित्तार् पिडित्तार् वीऱ्ऱिरुंदुपॆरिय वाऩुळ् निलावुवरे

अर्थ

बार-बार वे अद्वितीय प्रभु यह कहते हुए अपनी कृपा देते हैं, "मेरे सेवको, भीतर आओ, मेरे चरणों के नीचे बस जाओ, और जियो!" खेतों से समृद्ध कुरुगूर् के शठकोपन् ने यह सब पूर्ण करने के लिए उन पर एक हज़ार पद कहे। जो तिरुवेङ्कटम् पर इन दस को दृढ़ता से पकड़े रहते हैं, वे महान स्वर्ग में सिंहासन पर विराजकर दीप्त होंगे।

शब्दशः

अडियीर् वाऴ्मिऩ्
मेरे सेवको, जियो!
अरुळ्गॊडुक्कुम्
जो अपनी कृपा देते हैं
पडिक् केऴ् इल्लाप् पॆरुमाऩैप्
वे प्रभु जिनके समान कोई नहीं
पऴऩक् कुरुगूर्च् चडगोबऩ्
खेतों वाले कुरुगूर् के शठकोपन्
पिडित्तार् पिडित्तार्
जो सब उन्हें दृढ़ता से पकड़े रहते हैं
वीऱ्ऱिरुंदु
सिंहासन पर विराजकर
पॆरिय वाऩुळ् निलावुवरे
महान स्वर्ग में दीप्त होंगे
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।