तिरुवाय्मोळि 5.6.1 · चार हज़ार में 3288वाँ पाशुर
अर्थ
(माँ अपनी बेटी के बारे में कहती है, जो ऐसे बोलती है मानो वह स्वयं प्रभु हो।) "सागर से घिरी धरती मैंने रची," वह कहती है। "मैं ही सागर से घिरी धरती हूँ। मैंने अपने डगों से धरती ले ली। मैंने धरती को गहराई से खोद निकाला। मैंने धरती निगल ली।" क्या सागर से घिरी धरती के स्वामी आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे सागर से घिरे इस संसार के लोगो, मेरी बेटी जो ये बातें सीख रही है, उनके बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- कडल् ञालम् सॆय्देऩुम् याऩे
- मैं ही हूँ जिसने सागर से घिरी धरती रची
- कडल् ञालम् कॊंडेऩुम्
- मैं जिसने वामन बनकर धरती ली
- कडल् ञालम् कींडेऩुम्
- मैं जिसने वराह बनकर धरती खोद निकाली
- कडल् ञालम् उंडेऩुम्
- मैं जिसने धरती निगल ली
- ईशऩ् वंदु एऱक्कॊलो?
- क्या प्रभु आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं?
- ऎऩ् मगळ् कऱ्किऩ्ऱवे
- जो मेरी बेटी सीख रही है
तिरुवाय्मोळि 5.6.2 · चार हज़ार में 3289वाँ पाशुर
अर्थ
"मेरी विद्या की कोई सीमा नहीं," वह कहती है। "जो भी विद्या सीखी जाती है, वह सब मैं हूँ। विद्या को रचने वाली मैं हूँ। विद्या को उसके अन्त तक पहुँचाने वाली मैं हूँ। विद्या का सार ही मैं हूँ।" क्या सारी विद्या के स्वामी आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे विद्वानो, मेरी बेटी अब जो विद्या दिखा रही है, उसके बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- कल्विक्कु ऎल्लै इलऩे
- मेरी विद्या की कोई सीमा नहीं
- कल्वि आवेऩुम् याऩे
- मैं स्वयं विद्या हूँ
- कल्वि तीर्प्पेऩुम्
- मैं जो विद्या को उसके अन्त तक पहुँचाती हूँ
- कल्विच् चारमुम्
- विद्या का सार
- कल्वि नादऩ्
- सारी विद्या के स्वामी
तिरुवाय्मोळि 5.6.3 · चार हज़ार में 3290वाँ पाशुर
अर्थ
"जो सारी धरती तुम देखते हो, वह मैं हूँ," वह कहती है। "जो सारा आकाश तुम देखते हो, वह मैं हूँ। जो सारी तपती अग्नि तुम देखते हो, वह मैं हूँ। जो यह सारी हवा तुम अनुभव करते हो, वह मैं हूँ। जो सारा सागर तुम देखते हो, वह मैं हूँ।" क्या जिन्हें हम देखते हैं वे सागर-वर्ण प्रभु आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे इस दिखते संसार के लोगो, मेरी सुन्दर बेटी जो कर रही है, उसके बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- काण्गिऩ्ऱ निलम् ऎल्लाम्
- जो सारी धरती तुम देखते हो
- विशुंबु
- आकाश
- वॆम् ती
- तपती अग्नि
- काण्गिऩ्ऱ कडल्वण्णऩ्
- जिन्हें हम देखते हैं वे सागर-वर्ण प्रभु
- ऎऩ् कारिगै
- मेरी सुन्दर बेटी
तिरुवाय्मोळि 5.6.4 · चार हज़ार में 3291वाँ पाशुर
अर्थ
"अभी जो भी कर्म किए जा रहे हैं, वे सब मैं हूँ," वह कहती है। "जो कर्म अभी किए जाने हैं, वे मैं हूँ। जो कर्म पहले किए जा चुके और बीत गए, वे मैं हूँ। हर कर्म का फल भोगने वाली मैं हूँ। करने वालों से कर्म कराने वाली मैं हूँ।" क्या लाल कमल-सी आँखों वाले कण्णन् आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे संसार के सज्जनो, फल-से लाल होंठों वाली मेरी नन्ही हिरनी के बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- सॆय्गिऩ्ऱ किदि ऎल्लाम्
- जो भी कर्म किए जा रहे हैं
- सॆय्दु मुऩ् इऱंदवुम्
- किए जा चुके, बीते कर्म
- सॆय्गैप् पयऩ् उण्बेऩुम्
- मैं जो कर्मों का फल भोगती हूँ
- सॆय्वार्गळैच् चॆय्वेऩुम्
- मैं जो करने वालों से कर्म कराती हूँ
- सॆय्य कमलक्कण्णऩ्
- लाल कमल-सी आँखों वाले प्रभु
- इळ माऩ्
- नन्ही हिरनी, बेटी
तिरुवाय्मोळि 5.6.5 · चार हज़ार में 3292वाँ पाशुर
अर्थ
"बिना चूके मैं धरती की रक्षा करती हूँ," वह कहती है। "बिना चूके मैंने पर्वत उठाया। बिना चूके मैंने असुरों को मारा। अपनी शक्ति दिखाकर, उस दिन मैंने पाँचों भाइयों की रक्षा की। बिना चूके मैंने सागर मथा।" क्या कभी न चूकने वाले सागर-वर्ण प्रभु आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे इस अटल संसार के लोगो, मेरी बेटी, मेरी नन्ही लक्ष्मी, पर निश्चय ही जो आ गया है, उसके बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- तिऱंबामल् मण् काक्किऩ्ऱेऩ्
- बिना चूके मैं धरती की रक्षा करती हूँ
- मलै ऎडुत्तेऩे
- मैंने पर्वत उठाया
- अऩ्ऱु ऐवरैक् कात्तेऩे
- उस दिन मैंने पाँचों पाण्डवों की रक्षा की
- कडल् कडैंदेऩे
- मैंने सागर मथा
- तिऱंबाद कडल्वण्णऩ्
- कभी न चूकने वाले सागर-वर्ण प्रभु
- ऎऩ् तिरुमगळ्
- मेरी बेटी, मेरी नन्ही लक्ष्मी
तिरुवाय्मोळि 5.6.6 · चार हज़ार में 3293वाँ पाशुर
अर्थ
"मैंने घने बाँसों वाला पर्वत उठाया," वह कहती है। "मैंने बैलों को एक साथ मारा। मैंने झुण्डों के बछड़े चराए। मैंने गायों के झुण्डों की रक्षा की। मैं ग्वाल कुलों का मुखिया हूँ।" क्या देवताओं के सारे समूहों के मुखिया आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे भालों-सी आँखों वाली सुन्दर स्त्रियो, भालों की जोड़ी-सी आँखों वाली मेरी बेटी पर जो आ गया है, उसके बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- इऩ वेय् मलै एंदिऩेऩ्
- मैंने घने बाँसों वाला पर्वत उठाया
- इऩ एऱुगळ् सॆऱ्ऱेऩुम्
- मैं जिसने बैलों को एक साथ मारा
- इऩ आ निरै कात्तेऩुम्
- मैं जिसने झुण्डों की रक्षा की
- इऩ आयर् तलैवऩुम्
- ग्वाल कुलों का मुखिया
- इऩत् तेवर् तलैवऩ्
- देवताओं के समूहों के मुखिया
- इऩ वेल् कण्णि
- वह जिसकी आँखें भालों की जोड़ी जैसी हैं
तिरुवाय्मोळि 5.6.7 · चार हज़ार में 3294वाँ पाशुर
अर्थ
"मेरा कोई सम्बन्धी है ही नहीं," वह कहती है। "यहाँ हर कोई मेरा सम्बन्धी है। सम्बन्ध बनाने वाली मैं हूँ। उन्हें समाप्त करने वाली मैं हूँ। जो मुझे पकड़े रहते हैं, उनकी सच्ची सम्बन्धी मैं हूँ।" क्या वे अद्भुत प्रभु, जिनसे ऊपर कोई सम्बन्धी नहीं, आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे मेरे स्वजनो, मेरी भोली बेटी जो कह रही है, उसे मैं शब्दों में कैसे कहूँ?
शब्दशः
- उऱ्ऱार्गळ् ऎऩक्कु इल्लै यारुम्
- मेरा कोई सम्बन्धी है ही नहीं
- उऱ्ऱार्गळ् ऎऩक्कु इंगु ऎल्लारुम्
- यहाँ हर कोई मेरा सम्बन्धी है
- उऱ्ऱार्गळुक्कु उऱ्ऱेऩुम्
- मुझे पकड़े रहने वालों की मैं सम्बन्धी हूँ
- उऱ्ऱार् इलि मायऩ्
- वे अद्भुत प्रभु जिन्हें किसी सम्बन्धी की आवश्यकता नहीं
- ऎऩ्ऩुडैप् पेदै
- मेरी भोली बेटी
तिरुवाय्मोळि 5.6.8 · चार हज़ार में 3295वाँ पाशुर
अर्थ
"मैं वह त्रिनेत्र देव हूँ जिनकी सब चर्चा करते हैं," वह कहती है। "मैं वह चतुर्मुख ब्रह्मा हूँ जिनकी वे चर्चा करते हैं। मैं वे अमर हूँ जिनकी वे चर्चा करते हैं। मैं अमरों का राजा हूँ। मैं वे ऋषि हूँ जिनकी वे चर्चा करते हैं।" क्या मेघ-वर्ण प्रभु, जिनकी सब चर्चा करते हैं, आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे बातें करते इस संसार के लोगो, ऐसे बोलने वाली मेरी कोमल, उज्ज्वल लता-सी बेटी के बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- मुक्कण् पिराऩ्
- त्रिनेत्र देव, शिव
- तिशैमुगऩ्
- चतुर्मुख, ब्रह्मा
- अमरर् कोऩ्
- अमरों के राजा, इन्द्र
- मुऩिवरुम्
- ऋषि
- मुगिल्वण्णऩ्
- मेघ-वर्ण प्रभु
- कोमळ ऒण् कॊडिक्के
- मेरी कोमल, उज्ज्वल लता-सी बेटी
तिरुवाय्मोळि 5.6.9 · चार हज़ार में 3296वाँ पाशुर
अर्थ
"कोई क्रूर कर्म मुझे नहीं छूता," वह कहती है। "मैं स्वयं क्रूर कर्म हूँ। उसका कठोर फल बाँटने वाली मैं हूँ। क्रूर कर्म को समाप्त करने वाली मैं हूँ। मैंने उस क्रूर की लंका नष्ट की।" क्या प्रचण्ड पक्षी गरुड़ पर सवार होने वाले प्रभु आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे इस क्रूर संसार के लोगो, मैं, जो ऐसी क्रूर हूँ, अपनी लता-सी बेटी के ढंग के बारे में तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- कॊडिय विऩै यादुम् इलऩे
- कोई क्रूर कर्म मुझे नहीं छूता
- कॊडिय विऩै आवेऩुम्
- मैं स्वयं क्रूर कर्म हूँ
- कॊडिय विऩै तीर्प्पेऩुम्
- मैं जो क्रूर कर्म को समाप्त करती हूँ
- कॊडियाऩ् इलंगै
- उस क्रूर, रावण की लंका
- कॊडिय पुळ् उडैयवऩ्
- प्रचण्ड पक्षी गरुड़ के स्वामी
- कोलंगळे
- उसका ढंग, उसकी दशा
तिरुवाय्मोळि 5.6.10 · चार हज़ार में 3297वाँ पाशुर
अर्थ
"मैं सुन्दर स्वर्ग हूँ," वह कहती है। "मैं नरक हूँ, जिसमें कोई सुन्दरता नहीं। मैं दीप्त मोक्ष हूँ। मैं सारी सुन्दर आत्माएँ हूँ। मैं सुन्दर, एकमात्र आदिकारण हूँ।" क्या सुन्दर, मेघ-वर्ण प्रभु आकर उसमें प्रवेश कर गए हैं? हे इस सुन्दर संसार के लोगो, केशों में उज्ज्वल माला सजाए मेरी बेटी के बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊँ?
शब्दशः
- कोलम् कॊळ् सुवर्क्कमुम्
- सुन्दर स्वर्ग
- कोलम् इल् नरगमुम्
- नरक, जिसमें कोई सुन्दरता नहीं
- कोलम् तिगऴ् मोक्कमुम्
- दीप्त मुक्ति, मोक्ष
- कोलम् कॊळ् उयिर्गळुम्
- सारी सुन्दर आत्माएँ
- तऩिमुदल्
- एकमात्र आदिकारण
- कोलम् तिगऴ् कोदै
- उज्ज्वल, चमकती माला
तिरुवाय्मोळि 5.6.11 · चार हज़ार में 3298वाँ पाशुर
अर्थ
समृद्ध पाण्ड्य देश के स्वामी, सनातन कुरुगूर् के शठकोपन्, नम्माळ्वार्, ने केशों में फूल सजाए लक्ष्मी के, भूदेवी के, और ग्वाल कुल की कोमल कोंपल के पति प्रभु की निकट और प्रेमभरी सेवा की, और परिष्कृत तमिऴ् के एक हज़ार पदों की माला बनाई। संसार में जो इन दस में पारंगत होंगे, उन्हें महान और स्थायी सम्पदा मिलेगी, और वे ही तिरुमाल् के भक्तों की पूजा करने के सौभाग्य से धन्य हैं।
शब्दशः
- कूंदल् मलर् मंगैक्कुम्
- सुन्दर केशों वाली पुष्प-देवी लक्ष्मी के
- मण् मडंदैक्कुम्
- भूदेवी के
- कुल आयर् कॊऴुंदुक्कुम्
- ग्वाल कुल की कोमल कोंपल, नप्पिन्नै के
- वऴुदि वळ नाडऩ्
- समृद्ध पाण्ड्य देश के स्वामी
- कुऱ्ऱेवल् सॆय्दु
- निकट, प्रेमभरी सेवा करते हुए
- अडियार्गळैप् पूशिक्क नोऱ्ऱार्गळे
- उनके भक्तों की पूजा के सौभाग्य से धन्य हैं
पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।