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श्रीमते रामानुजाय नमः
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4

पत्तु 5 · दशक 5.4 · 11 पाशुर

पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.1 · चार हज़ार में 463वाँ पाशुर

सॆऩ्ऩि ओंगु तण् तिरुवेङ्कडम् उडैयाय् उलगुतऩ्ऩै वाऴ निऩ्ऱ नंबीतामोदरा सदिराऎऩ्ऩैयुम् ऎऩ् उडैमैयैयुम् उऩ्सक्करप् पॊऱि ऒऱ्ऱिक्कॊंडुनिऩ् अरुळे पुरिंदिरुंदेऩ्इऩि ऎऩ् तिरुक्कुऱिप्पे?

अर्थ

हे ऊँची चोटियों वाले शीतल तिरुवेङ्कटम् के स्वामी! हे नम्बि, जो वहाँ इसलिए खड़े हो कि संसार जी सके! हे दामोदर, कृपालु और चतुर प्रभु! मैंने स्वयं पर और जो कुछ मेरा है उस पर तुम्हारे चक्र की मुहर लगवा ली है, और केवल तुम्हारी कृपा की चाह में जीता हूँ। अब तुम्हारी पवित्र इच्छा क्या है?

शब्दशः

सॆऩ्ऩि ओंगु
ऊँची चोटियों वाले
उलगु तऩ्ऩै वाऴ निऩ्ऱ नंबी
नम्बि, जो इसलिए खड़े हैं कि संसार जी सके
तामोदरा सदिरा
दामोदर, चतुर प्रभु
ऎऩ् उडैमैयैयुम्
जो कुछ मेरा है
सक्करप् पॊऱि ऒऱ्ऱिक्कॊंडु
चक्र की मुहर लगवाकर
इऩि ऎऩ् तिरुक्कुऱिप्पे?
अब तुम्हारी पवित्र इच्छा क्या है?
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.2 · चार हज़ार में 464वाँ पाशुर

पऱवै एऱु परमबुरुडानी ऎऩ्ऩैक् कैक्कॊंडबिऩ्पिऱवि ऎऩ्ऩुम् कडलुम् वऱ्ऱिप्पॆरुंबदम् आगिऩ्ऱदाल्इऱवु सॆय्युम् पावक् काडुतीक्कॊळीइ वेगिऩ्ऱदाल्अऱिवै ऎऩ्ऩुम् अमुद-आऱुतलैप्पऱ्ऱि वाय्क्कॊंडदे

अर्थ

हे पक्षी पर सवार परम पुरुष! जब से तुमने मुझे अपना बनाया है, जन्म नाम का सागर सूखकर ठोस भूमि बनता जा रहा है; मृत्यु लाने वाले पाप का जंगल आग पकड़कर जल रहा है; और ज्ञान नाम की अमृत-नदी अपने स्रोत से उठकर लबालब बह रही है।

शब्दशः

पऱवै एऱु परमबुरुडा
पक्षी, गरुड़, पर सवार परम पुरुष
कैक्कॊंडबिऩ्
जब से तुमने मुझे अपना बनाया
पिऱवि ऎऩ्ऩुम् कडलुम् वऱ्ऱिप्
जन्म नाम का सागर सूखता हुआ
इऱवु सॆय्युम् पावक् काडु
मृत्यु लाने वाला पाप का जंगल
अऱिवै ऎऩ्ऩुम् अमुद-आऱु
ज्ञान नाम की अमृत-नदी
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.3 · चार हज़ार में 465वाँ पाशुर

ऎम्मऩा ऎऩ् कुलदॆय्वमेऎऩ्ऩुडैय नायगऩेनिऩ्ऩुळेऩाय्प् पॆऱ्ऱ नऩ्मै इव्उलगिऩिल् आर् पॆऱुवार्?नम्मऩ् पोले वीऴ्त्तु अमुक्कुम्नाट्टिल् उळ्ळ पावम् ऎल्लाम्सुम्मॆऩादे कैविट्टु ओडित्तूऱुगळ् पाय्ंदऩवे

अर्थ

मेरे स्वामी, मेरे कुलदेवता, मेरे प्रभु! तुम्हारा होकर जो भलाई मैंने पाई है, वह इस संसार में और कौन पा सकता है? देश के सारे पाप, जो यम की तरह मनुष्य को गिराकर कुचल देते हैं, बिना आवाज़ किए मुझे छोड़कर भाग गए हैं, और झाड़ियों में कूदकर छिप गए हैं।

शब्दशः

ऎम्मऩा
मेरे स्वामी
ऎऩ् कुलदॆय्वमे
मेरे कुलदेवता
निऩ्ऩुळेऩाय्प् पॆऱ्ऱ नऩ्मै
तुम्हारा होकर पाई भलाई
नम्मऩ् पोले
यम की तरह
सुम्मॆऩादे
बिना आवाज़ किए
तूऱुगळ् पाय्ंदऩवे
झाड़ियों में कूद गए
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.4 · चार हज़ार में 466वाँ पाशुर

कडल् कडैंदु अमुदम् कॊंडुकलशत्तै निऱैत्ताऱ्पोल्उडल् उरुगि वाय् तिऱंदुमडुत्तु उऩ्ऩै निऱैत्तुक्कॊंडेऩ्कॊडुमै सॆय्युम् कूऱ्ऱमुम् ऎऩ्कोल्-आडि कुऱुगप् पॆऱातड वरैत् तोळ् सक्करबाणीसार्ंग विऱ् सेवगऩे

अर्थ

जैसे उन्होंने सागर मथकर अमृत निकाला और उससे घड़ा भरा, वैसे ही, मेरा शरीर पिघलते हुए, मुँह खुला रखकर, मैंने तुम्हें पी लिया है और स्वयं को तुमसे भर लिया है। अब क्रूर मृत्यु भी मेरी लाठी की पहुँच के भीतर नहीं आ सकती। हे विशाल पर्वतों जैसे कंधों वाले, चक्र धारण करने वाले, शार्ङ्ग धनुष के वीर धारक!

शब्दशः

कडल् कडैंदु अमुदम् कॊंडु
सागर मथकर अमृत निकालकर
उडल् उरुगि
मेरा शरीर पिघलते हुए
उऩ्ऩै निऱैत्तुक्कॊंडेऩ्
मैंने स्वयं को तुमसे भर लिया
कॊडुमै सॆय्युम् कूऱ्ऱमुम्
क्रूर मृत्यु भी
कुऱुगप् पॆऱा
पास नहीं आ सकती
सक्करबाणी
तुम जो चक्र धारण करते हो
सार्ंग विऱ् सेवगऩे
शार्ङ्ग धनुष के वीर धारक
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.5 · चार हज़ार में 467वाँ पाशुर

पॊऩ्ऩैक् कॊंडु उरैगल् मीदेनिऱम् ऎऴ उरैत्ताऱ् पोल्उऩ्ऩैक् कॊंडु ऎऩ् नावगंबाल्माऱ्ऱिऩ्ऱि उरैत्तुक्कॊंडेऩ्उऩ्ऩैक् कॊंडु ऎऩ्ऩुळ् वैत्तेऩ्ऎऩ्ऩैयुम् उऩ्ऩिल् इट्टेऩ्ऎऩ् अप्पा ऎऩ् इरुडीगेशाऎऩ् उयिर्क् कावलऩे

अर्थ

जैसे सोने को कसौटी पर तब तक घिसा जाता है जब तक उसका सच्चा रंग न दिखे, वैसे ही मैंने तुम्हें अपनी जिह्वा पर घिसा है, बिना किसी मिलावट के। मैंने तुम्हें लेकर अपने भीतर रख लिया है, और स्वयं को भी तुममें रख दिया है। मेरे पिता, मेरे हृषीकेश, मेरे प्राणों के रक्षक!

शब्दशः

उरैगल् मीदे
कसौटी पर
निऱम् ऎऴ उरैत्ताऱ् पोल्
जैसे रंग दिखने तक घिसते हैं
माऱ्ऱिऩ्ऱि
बिना किसी मिलावट के
उऩ्ऩैक् कॊंडु ऎऩ्ऩुळ् वैत्तेऩ्
मैंने तुम्हें लेकर अपने भीतर रखा
ऎऩ्ऩैयुम् उऩ्ऩिल् इट्टेऩ्
मैंने स्वयं को भी तुममें रखा
ऎऩ् उयिर्क् कावलऩे
मेरे प्राणों के रक्षक
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.6 · चार हज़ार में 468वाँ पाशुर

उऩ्ऩुडैय विक्किरमम्ऒऩ्ऱु ऒऴियामल् ऎल्लाम्ऎऩ्ऩुडैय नॆंजगंबाल्सुवर्वऴि ऎऴुदिक्कॊंडेऩ्मऩ् अडंग मऴु वलंगैक्कॊंड इराम नंबीऎऩ्ऩिडै वंदु ऎंबॆरुमाऩ्इऩि ऎंगुप् पोगिऩ्ऱदे?

अर्थ

तुम्हारे सारे पराक्रम, एक भी छोड़े बिना, मैंने अपने हृदय की दीवारों पर चित्रित कर लिए हैं। हे राम नम्बि, जिन्होंने अपने दाहिने हाथ में फरसा उठाया कि राजा नीचे गिराए गए! मेरे प्रभु, अब जब तुम मेरे पास आ गए हो, तुम कहाँ जा सकते हो?

शब्दशः

उऩ्ऩुडैय विक्किरमम्
तुम्हारे पराक्रम
ऒऩ्ऱु ऒऴियामल्
एक भी छोड़े बिना
सुवर्वऴि ऎऴुदिक्कॊंडेऩ्
मैंने दीवारों पर चित्रित कर लिए
मऩ् अडंग
कि राजा नीचे गिराए गए
मऴु वलंगैक्
दाहिने हाथ में फरसा, परशुराम के रूप में
इऩि ऎंगुप् पोगिऩ्ऱदे?
अब तुम कहाँ जा सकते हो?
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.7 · चार हज़ार में 469वाँ पाशुर

परुप्पदत्तुक् कयल् पॊऱित्तपांडियर् कुलबदि पोल्तिरुप् पॊलिंद सेवडि ऎऩ्सॆऩ्ऩियिऩ् मेल् पॊऱित्ताय्मरुप्पु ऒशित्ताय् मल् अडर्त्ताय्ऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱु उऩ् वाशगमेउरुप् पॊलिंद नाविऩेऩैउऩक्कु उरित्तु आक्किऩैये

अर्थ

अपने कुल के उस पाण्ड्य स्वामी की तरह, जिसने पर्वत पर मत्स्य-चिह्न उकेरा, तुमने सौन्दर्य से भरे अपने लाल चरण मेरे सिर पर उकेर दिए हैं। तुम्हारे ही वचन, तुमने दाँत तोड़ा! तुमने पहलवानों को कुचला!, सदा कहते-कहते मेरी जिह्वा सुन्दर हो गई है, और तुमने मुझे पूरी तरह अपना बना लिया है।

शब्दशः

परुप्पदत्तुक् कयल् पॊऱित्त
जिसने पर्वत पर मत्स्य-चिह्न उकेरा
पांडियर् कुलबदि पोल्
कुल के पाण्ड्य स्वामी की तरह
तिरुप् पॊलिंद सेवडि
सौन्दर्य से भरे लाल चरण
सॆऩ्ऩियिऩ् मेल् पॊऱित्ताय्
तुमने मेरे सिर पर उकेरे
मरुप्पु ऒशित्ताय् मल् अडर्त्ताय्
तुमने दाँत तोड़ा, तुमने पहलवानों को कुचला
उऩक्कु उरित्तु आक्किऩैये
तुमने मुझे पूरी तरह अपना बना लिया
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.8 · चार हज़ार में 470वाँ पाशुर

अऩंदऩ्बालुम् करुडऩ्बालुम्ऐदु नॊय्दाग वैत्तु ऎऩ्मऩंदऩुळ्ळे वंदु वैगिवाऴच् चॆय्दाय् ऎंबिराऩ्निऩैंदु ऎऩ्ऩुळ्ळे निऩ्ऱु नॆक्कुक्कण्गळ् अशुंबु ऒऴुगनिऩैंदिरुंदे सिरमम् तीर्ंदेऩ्नेमि नॆडियवऩे

अर्थ

अनन्त और गरुड़ को हल्के से एक ओर रखकर, तुम मेरे मन में आए, वहाँ बस गए, और मुझे जीवित किया, मेरे प्रभु। मेरे भीतर खड़े रहकर, तुम्हारा स्मरण करते हुए, पिघलते हुए, आँखों से आँसू छलकते हुए, बस तुम्हारा स्मरण करके ही मेरी सारी थकान मिट गई है, हे चक्र धारण करने वाले विराट प्रभु!

शब्दशः

अऩंदऩ्बालुम् करुडऩ्बालुम्
अनन्त के साथ और गरुड़ के साथ
ऐदु नॊय्दाग वैत्तु
उन्हें हल्के से एक ओर रखकर
मऩंदऩुळ्ळे वंदु वैगि
मेरे मन में आकर बसते हुए
कण्गळ् अशुंबु ऒऴुग
आँखों से आँसू छलकते हुए
सिरमम् तीर्ंदेऩ्
मेरी थकान मिट गई
नेमि नॆडियवऩे
चक्र धारण करने वाले विराट प्रभु
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.9 · चार हज़ार में 471वाँ पाशुर

पऩिक् कडलिल् पळ्ळि- कोळैप्पऴगविट्टु ओडिवंदु ऎऩ्मऩक् कडलिल् वाऴ वल्लमाय मणाळ नंबीतऩिक् कडले तऩिच् चुडरेतऩि उलगे ऎऩ्ऱु ऎऩ्ऱुउऩक्कु इडमाय् इरुक्क ऎऩ्ऩैउऩक्कु उरित्तु आक्किऩैये

अर्थ

हे अद्भुत दूल्हे, नम्बि! तुमने शीतल सागर पर लेटने की अपनी पुरानी आदत छोड़ दी और मेरे मन के सागर में रहने के लिए दौड़े चले आए। हे अनुपम सागर, अनुपम ज्योति, अनुपम लोक, यूँ तुम्हें बार-बार पुकारते हुए, मुझे तुम्हारा निवास बनना है: इसीलिए तुमने मुझे पूरी तरह अपना बना लिया है।

शब्दशः

पऩिक् कडलिल् पळ्ळि- कोळैप्
शीतल सागर पर लेटना
पऴगविट्टु ओडिवंदु
वह आदत छोड़कर यहाँ दौड़े आए
मऩक् कडलिल्
मेरे मन के सागर में
माय मणाळ नंबी
अद्भुत दूल्हे, नम्बि
तऩिक् कडले तऩिच् चुडरे
अनुपम सागर, अनुपम ज्योति
उऩक्कु इडमाय् इरुक्क
तुम्हारा निवास बनने के लिए
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.10 · चार हज़ार में 472वाँ पाशुर

तड वरैवाय् मिळिर्ंदु मिऩ्ऩुम्तवळ नॆडुंगॊडि पोल्सुडर्- ऒळियाय् नॆंजिऩ् उळ्ळेतोऩ्ऱुम् ऎऩ् सोदि नंबीवड तडमुम् वैगुंदमुम्मदिऱ् तुवराबदियुम्इड वगैगळ् इगऴ्ंदिट्टु ऎऩ्बाल्इडवगै कॊंडऩैये

अर्थ

जैसे किसी विशाल पर्वत पर लम्बी श्वेत पताका फहराती और चमकती है, वैसे ही तुम मेरे हृदय में ज्योति की लपट बनकर प्रकट होते हो, मेरे दीप्तिमान नम्बि! उत्तर में तुम्हारा महान आसन, वैकुण्ठ, और परकोटों से घिरी द्वारका: इन सब निवासों को तुमने तुच्छ मान लिया है, और मुझमें अपना निवास बना लिया है।

शब्दशः

तड वरैवाय्
एक विशाल पर्वत पर
तवळ नॆडुंगॊडि पोल्
लम्बी श्वेत पताका की तरह
ऎऩ् सोदि नंबी
मेरे दीप्तिमान नम्बि
मदिऱ् तुवराबदियुम्
और परकोटों से घिरी द्वारका
इड वगैगळ् इगऴ्ंदिट्टु
उन निवासों को तुच्छ मानकर
ऎऩ्बाल् इडवगै कॊंडऩैये
तुमने मुझमें अपना निवास बना लिया
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पेरियाळ्वार् तिरुमोळि 5.4.11 · चार हज़ार में 473वाँ पाशुर

वेयर् तंगळ् कुलत्तु उदित्तविट्टुशित्तऩ् मऩत्तेकोयिल्गॊंड कोवलऩैक्कॊऴुंगुळिर् मुगिल्वण्णऩैआयर्-एऱ्ऱै अमरर् कोवैअंदणर्दम् अमुदत्तिऩैच्सायै पोलप् पाड वल्लार्तामुम् अणुक्कर्गळे

अर्थ

वेयर् के कुल में जन्मे विष्णुचित्त, पेरियाळ्वार्, ने उन ग्वाले के गीत गाए जिन्होंने उनके मन में अपना मन्दिर बना लिया है: घने, शीतल मेघ के वर्ण वाले प्रभु, ग्वालों के वृषभ, देवों के राजा, वैदिक ऋषियों के अमृत। जो उनकी छाया की तरह उनके निकट रहकर उनके गीत गा सकें, वे स्वयं उनके अन्तरंग सेवकों में होंगे।

शब्दशः

वेयर् तंगळ् कुलत्तु उदित्त
वेयर् के कुल में जन्मे
कोयिल्गॊंड कोवलऩैक्
ग्वाले, जिन्होंने वहाँ अपना मन्दिर बनाया
कॊऴुंगुळिर् मुगिल्वण्णऩै
घने, शीतल मेघ के वर्ण वाले प्रभु
अंदणर्दम् अमुदत्तिऩैच्
वैदिक ऋषियों का अमृत
सायै पोलप्
छाया की तरह
अणुक्कर्गळे
उनके अन्तरंग सेवक
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पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।