नाच्चियार् तिरुमोळि 14.1 · चार हज़ार में 637वाँ पाशुर
अर्थ
(आण्डाळ् पूछती हैं, और भक्त उत्तर देते हैं।) “क्या तुमने यहाँ से एक साँवले युवा साँड को जाते देखा, बलदेव के छोटे भाई को, जो जहाँ चाहें चरते हैं और जैसा मन हो वैसा खेलते हैं?” “हमने उन्हें वृन्दावन में देखा, अपनी प्यारी गायों को धीरे से लौटाते, उन्हें पानी पिलाते, उन्हें खुला छोड़ते और खेलते हुए।”
शब्दशः
- पट्टि मेय्ंदु
- जहाँ चाहें खुलकर चरते हुए
- कारेऱु
- एक साँवला युवा साँड
- पलदेवऱ्कु ओर् कीऴ्क्-कऩ्ऱाय्
- बलदेव के छोटे बछड़े के रूप में, उनके छोटे भाई
- इट्टीऱु इट्टु
- जैसा मन हो वैसा करते हुए
- इऩिदु मऱित्तु
- धीरे से उन्हें लौटाते हुए
- विरुंदावऩत्ते कंडोमे
- हमने उन्हें वृन्दावन में देखा
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.2 · चार हज़ार में 638वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने गोवर्धन को देखा, मक्खन की गंध वाले उस युवा साँड को, जो आयर्पाडि में धावा बोलकर खाते हैं, और जिन्होंने मुझे विरह में तड़पने को छोड़ दिया?” “हमने उन्हें वृन्दावन में खड़े होकर खेलते देखा, उनकी वनमाला जगमगा रही थी, जैसे बिजली और सफ़ेद पक्षियों के झुंडों वाला काला मेघ।”
शब्दशः
- अऩुंग ऎऩ्ऩैप् पिरिवु सॆय्दु
- मुझे विरह में तड़पने को छोड़कर
- कुणुंगु नाऱि
- मक्खन की गंध वाले
- कुट्टेऱ्ऱै
- युवा साँड
- मिऩ् मेगम्
- बिजली वाला मेघ
- वऩमालै
- वनमाला
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.3 · चार हज़ार में 639वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन्हें यहाँ से जाते देखा, माल् के रूप में जन्मे उन पूर्ण पुरुष को, उस दूल्हे को जो स्त्रियों को प्रेम में पागल कर देते हैं, जो ऐसे झूठ बोलते हैं जिन पर कोई विश्वास न कर सके?” “हमने उन्हें वृन्दावन में एक छत्र के नीचे आते देखा; विनता के पुत्र गरुड के पंख उन्हें धूप से छाया देने के लिए उनके ऊपर फैले थे।”
शब्दशः
- मालाय्प् पिऱंद नंबियै
- माल्, प्रभु के रूप में जन्मे पूर्ण पुरुष
- माले सॆय्युम् मणाळऩै
- प्रेम में पागल कर देने वाले दूल्हे
- एलाप् पॊय्गळ्
- ऐसे झूठ जिन पर कोई विश्वास न करे
- वॆयिल्गाप्पाऩ्
- धूप से छाया देने के लिए
- विऩदै-सिऱुवऩ्
- विनता के पुत्र, गरुड
- मेलाप्पिऩ् कीऴ्
- एक छत्र के नीचे
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.4 · चार हज़ार में 640वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन प्रभु को देखा, जो काले कमलों जैसी अपनी शीतल आँखों की लंबी डोर से मुझे खींचते हुए मेरे साथ खेलते हैं?” “हमने उन्हें वृन्दावन में खड़े होकर खेलते देखा, पसीने की बूँदों से सजे, जैसे मोतियों का आवरण ओढ़े एक युवा चित्तीदार हाथी।”
शब्दशः
- कार्त् तण् कमलक् कण्
- काले कमलों जैसी शीतल आँखें
- नॆडुंगयिऱु
- एक लंबी डोर
- ईर्त्तुक् कॊंडु
- मुझे खींचते हुए
- मुत्तिऩ् कुप्पाय
- मोतियों का आवरण, उनकी पसीने की बूँदें
- पुगर् माल् याऩैक् कऩ्ऱे
- एक युवा, विशाल, चित्तीदार हाथी
- वेर्त्तु निऩ्ऱु
- पसीने की बूँदों से सजे खड़े
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.5 · चार हज़ार में 641वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने माधव प्रभु को, मेरे रत्न को, देखा, जो जाल से फिसल निकले शूकर की तरह किसी को पकड़ने के लिए कुछ भी नहीं देते?” “हमने उन्हें वृन्दावन में ऐसे आते देखा कि पूरी गली भर जाए, उनका पीला रेशम नीचे तक लटकता हुआ, जैसे एक विशाल युवा काला मेघ।”
शब्दशः
- ऎऩ् मणियिऩै
- मेरा रत्न
- वलैयिऱ् पिऴैत्त पऩ्ऱि
- जाल से फिसल निकला शूकर
- कॊळत् तारा
- पकड़ने को कुछ भी नहीं देते
- पीदग-आडै
- पीला रेशमी वस्त्र
- पॆरुङ् कार्मेगक् कऩ्ऱे
- एक विशाल युवा काला मेघ
- वीदि आर
- पूरी गली को भरते हुए
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.6 · चार हज़ार में 642वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन छलिया को देखा, जो उचित क्या है, कुछ नहीं जानते, उन विश्वासघाती को, जिनकी टेढ़ी भौहें उनके अपने शार्ङ्ग धनुष जितनी सुंदर हैं?” “हमने उन्हें वृन्दावन में देखा, रूप से साँवले और मुख से लाल, जैसे उदयाचल पर सूर्य से फैलती किरणें।”
शब्दशः
- तरुमम् अऱियाक् कुऱुंबऩै
- जो उचित क्या है कुछ नहीं जानते, वे छलिया
- सार्ंगम्
- शार्ङ्ग, उनका धनुष
- पुरुव वट्टम्
- उनकी टेढ़ी भौहें
- पॊरुत्तम् इलियै
- वे विश्वासघाती
- उदयप् परुप्पदत्तिऩ्मेल्
- उदयाचल पर
- विरियुम् कदिरे
- सूर्य की फैलती किरणें
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.7 · चार हज़ार में 643वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन वचन के पक्के, उन निष्ठावान को देखा, जो जितने बाहर से साँवले हैं उतने ही भीतर से, उस विशाल काले मेघ को, जिन्होंने मेरी सारी आशाएँ तोड़ दीं?” “हमने उन्हें वृन्दावन में चारों ओर बड़ी भीड़ के साथ आते देखा, जैसे सुंदर तारागणों से भरा आकाश।”
शब्दशः
- पॊरुत्तम् उडैय नंबियै
- वे निष्ठावान, कड़वे व्यंग्य में कहा गया
- पुऱंबोल् उळ्ळुम् करियाऩै
- जितने बाहर से उतने ही भीतर से साँवले
- करुत्तैप् पिऴैत्तु निऩ्ऱ
- जिन्होंने मेरी सारी आशाएँ तोड़ दीं
- तारा-कणंगळाल्
- तारागणों के साथ
- विरुत्तम् पॆरिदाय्
- बड़ी भीड़ के साथ
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.8 · चार हज़ार में 644वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन्हें देखा, जो एक श्वेत शंख धारण करते हैं, जो पीला रेशम पहनते हैं, कृपा से इतने भरपूर तिरुमाल्, चक्रधारी प्रभु को?” “हमने उन्हें वृन्दावन में खड़े होकर खेलते देखा, उनकी फूलों से सजी सुगंधित अलकें उनके चौड़े कंधों पर चमक रही थीं, जैसे हर ओर मँडराते आनंदित भौंरे।”
शब्दशः
- वॆळिय संगु
- श्वेत शंख
- अळि नऩ्गु उडैय
- कृपा से इतने भरपूर
- आऴियाऩै
- चक्रधारी प्रभु
- कळि वंडु
- आनंदित भौंरे
- कमऴ् पूंगुऴल्गळ्
- फूलों से सजी सुगंधित अलकें
- तडंदोळ् मेल्
- उनके चौड़े कंधों पर
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.9 · चार हज़ार में 645वाँ पाशुर
अर्थ
“क्या तुमने उन खेलते हुए पवित्र प्रभु को देखा, जिन्होंने अपनी नाभि के शीतल, विशाल कमल को एक घर बनाया, और उससे सबसे पहले ब्रह्मा को प्रकट किया, यह कहकर, ‘जगत की रचना करो’?” “हमने उन्हें वृन्दावन में वन के शिकार से लौटते देखा, जहाँ धेनुक, हाथी और पक्षी, सब मारे गए।”
शब्दशः
- नाट्टैप् पडै
- जगत की रचना करो
- अयऩ्
- ब्रह्मा
- मलर् उंदि
- उनकी नाभि का कमल
- विमलऩ्दऩ्ऩै
- पवित्र प्रभु
- तेऩुगऩुम्
- धेनुक, गधे के रूप में असुर
- कळिऱुम् पुळ्ळुम्
- हाथी और पक्षी-असुर
नाच्चियार् तिरुमोळि 14.10 · चार हज़ार में 646वाँ पाशुर
अर्थ
ये विष्णुचित्त की पुत्री गोदा के वचन हैं, जो बताते हैं कि बलवान पैरों वाले हाथी पर कृपा करने वाले परम प्रभु यहाँ पृथ्वी पर वृन्दावन में कैसे दिखे। जो इन वचनों को अपनी औषधि की तरह हृदय में रखकर उनके अनुसार जीते हैं, वे उन प्रभु के चरणों में सदा रहेंगे जिनके चरणों ने लोकों को नापा, और उनसे कभी अलग न होंगे।
शब्दशः
- परुंदाळ्-कळिऱ्ऱुक्कु
- बलवान पैरों वाले हाथी, गजेन्द्र पर
- पारिऩ् मेल्
- यहाँ पृथ्वी पर
- मरुंदाम् ऎऩ्ऱु
- अपनी औषधि की तरह
- पॆरुंदाळ् उडैय पिराऩ्
- वे प्रभु जिनके विशाल चरणों ने लोकों को नापा
- पिरियादु ऎऩ्ऱुम् इरुप्पारे
- सदा रहेंगे, कभी अलग न होंगे
पाशुर पाठ: प्रोजेक्ट मदुरै का नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का पद-विभक्त ई-पाठ, उनके दूसरे संस्करण से हर पाशुर मिलाया गया। पाशुर देवनागरी में वैसे लिखा है जैसे तमिऴ् में पढ़ा जाता है: ழ को ऴ, ற को ऱ, ன को ऩ। अर्थ आचार्यों के व्याख्यानों के प्रकाश में इस साइट के लिए लिखी गई सरल प्रस्तुतियाँ हैं, और विद्वान् की समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।