श्रीरंगनाथ और श्रीरंगम् पर एक लम्बा स्तोत्र, दो भागों में: पहला भाग (पूर्व शतकम्) भट्टर् ने कष्टभरे वियोग-काल के बाद श्रीरंगम् लौटते हुए मार्ग में गाया, और दूसरा (उत्तर शतकम्) श्रीरंगम् में अपने घर लौट आने पर।
पाठ को prapatti.com, sanskritdocuments.org, sadagopan.org, Stotra Mala (1949) से श्लोक-दर-श्लोक मिलाया गया है। अर्थ पाठक की सहायता के लिए सरल रूप में दिए गए हैं; पाठ किसी अध्यापक से सीखें।
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